Saturday, January 13, 2018

केरल – द स्पाइस कोस्ट ऑफ इंडिया

जब आप मुन्नार में रहकर आसपास घूमने निकलते हैं तो टैक्सी और आटोरिक्शा वाले स्पाइस गार्डन जरूर लेकर जाते हैं। मुन्नार कोचीन मार्ग पर ऐसे कई स्पाइस गार्डन बने हैं। ये निजी गार्डन किसी म्युजियम जैसे हैं। यहां पर आप मसालों की दर्जनों किस्मों के पेड़ और औषधीय पौधे भी देख सकते हैं। इनके सेल्स आउटलेट यानी बिक्री केंद्र से खरीदारी भी कर सकते हैं। हमलोग भी एक ऐसे ही स्पाइस गार्डन में पहुंच हैं। यहा 100 रुपये का प्रवेश टिकट है। साथ में एक गाइड मिलती है मुबीना मसालों के बारे में हिंदी में वे रोचक ढंग से जानकारी देती हैं। इस उद्यान में एक मिनी जू भी बना है। इसमें परंपरागत चूल्हे भी देखे जा सकते हैं। 


आपके खाने की थाली भला बिना मसालों को हो सकती है क्या। भारतीय खाने का स्वाद मसालों के बिना अधूरा है। पर ये मसाले सिर्फ स्वाद नहीं सेहत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। और इन मसालों की खेती के लिए हजारों साल से मशहूर का दक्षिण का राज्य केरल।

केरल के मसालों का जादू तीसरी शताब्दी ईस्वी पूर्व से पूरी दुनिया में बोल रहा है। कहा जाता है वास्कोडिगामा को इन मसालों की खुशबू ही यहां तक खींच लाई। रोम ने केरल के मसालों को खरीदने के लिए अपने खजाने की बोरी खोल दी थी। वहीं चीन अपने सिल्क के वस्त्रों के बदले यहां के मसालों की तिजारत करते थे। आजकल भी केरल तकरीबन 12 तरह के मसालों के साथ दुनिया भर में राज करता है। आज केरल मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।

तो फोर्ट कोच्चि के गलियों में घूमते हुए आप किस्म किस्म के मसालों की सजी हुई दुकानें भी देख सकते हैं और खरीद भी सकते हैं। इतिहास में केरल की प्रसिद्धी दुनिया में दूर दूर तक इसके सुगंधित मसालों के कारण फैली थी। केरल के मसाले सुगंध देने के साथ साथ सेहत के लिए भी काफी लाभकारी होते हैं।


काली मिर्च (BLACK PEPPER ) तमाम मसालों के बीच काली मिर्च का अपना महत्व है। केरल में काली मिर्च की खेती मिश्रित फसल पद्धति के तौर पर की जाती है। केरल के वयनाड जिले में काली मिर्च के पौधे कॉफी के पौधे के साथ लगाए जाते हैं। इस तरह एक साथ दो फसल वहां उगाई जाती है। वहां इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। हांलाकि काली मिर्च की खेती कर्नाटक, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार में भी की जाती है। काली मिर्च पाचन क्रिया में काफी लाभकारी है। काली मिर्च, नमक, जीरा और आजवाइन के साथ भून कर लेने पर पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है। काली मिर्च वजन को कम करने में भी सहायक है।

छोटी इलायची (CARDAMOM )- अपने अनोखे सुगंध और स्वाद के कारण इसे 'मसालों की रानी' कहा जाता है। इलायची एक बारहमासी, शाकीय, प्रकन्दीय मूल का पौधा है। पश्चिमी घाट का मौसम इलायची की खेती के लिए अनुकूल है। केरल और और कर्नाटक में बड़े पैमाने पर इलायची की खेती होती है। इलायची का सेवन आमतौर पर लोग सांस और मुंह को साफ रखने के लिए करते हैं। पर यह वाजीकरण के नुस्खे के तौर पर भी काम करता है। यह सेक्स पावर बढ़ाने और इंसान को हमेशा युवा बनाए रखने में भी काफी कारगर है।

दालचीनी (CINNAMON)  – दालचीनी एक छोटा पर सदाबहार पेड़ है। मसाले में दालचीनी के पेड़ की छाल का इस्तेमाल होता है। यह 10–15 मीटर तक ऊंचा होता है। इसकी खेती श्रीलंका में अति प्राचीन काल से की जाती थी। केरल में भी दालचीनी की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। दालचीनी को वंडर स्पाइस भी कहते हैं। यह खाने का जायका बढ़ाने के साथ गठिया का दर्द दूर करने में लाभकारी है। दालचीनी पाउडर को शहद के साथ लेने पर दर्द में आराम मिलता है। एक चम्मच शहद और आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर को मामूली गरम पानी के साथ नियमित तौर पर लेने से गठिया में आराम पड़ता है। दालचीनी पाउडर का पानी में पेस्ट बनाकर जोड़ो पर मालिश भी करने से गठिया दूर होता है।

लौंग – (CLOVE) -  अब बात लौंग की। केरल का एक सामान्य मसाला माना जाने वाला लौंग वास्तव में यूजीनिया कैरिओफिलीटा नामक वनस्पति की सूखी हुई कली होती है। केरल के लोग इसे ग्रम्बु या करयम्बु कहते हैं। लौंग गरम मसाला का प्रमुख सदस्य है। इसे गरम मसाला में विभिन्न अनुपातों में भूनकर और पीसकर तैयार किया जाता है। लौंग का औषधीय इस्तेमाल भी है। यह दांतो के दर्द उल्टी आदि में भी काफी काम आता है। अगर पहाड़ों की चक्करघिन्नी वाली यात्रा में आपको उल्टी होती हो तो लौंग चबाएं, आराम मिलेगा। 

हमलोगों ने स्पाइस गार्डन में सैर के दौरान काफी कुछ सीखा और समझने की कोशिश की। सुरम्य वातावरण में वहां एक हरी भरी दुनिया थी। हल्की बारिश ठंड बढ़ा रही थी।

केरल में मसालों की खेती का इतिहास तकरीबन पांच हजार साल पुराना है। पर अब यहां मसालों को लेकर अनुसंधान संस्थान भी खोले गए हैं। केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की संस्था स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया का मुख्यालय केरल के कोच्चि शहर में है। केरल के इडुक्की जिले में मसालों की खेती बड़े पैमाने पर होती है।

अकेले इडुक्की जिले में ही स्पाइस बोर्ड के 20 क्षेत्रीय कार्यालय खुले हैं। स्पाइस बोर्ड की सूची में कुल 52 तरह के मसालों के नाम हैं। ये अलग अलग तरह के पौधों के जड़, तना, पत्ती या फलों से प्राप्त होते हैं।

जब कोई केरल का व्यक्ति अपने बाहर के राज्य को दोस्तों रिश्तेदारों को कुछ उपहार देने की सोचता है तो सबसे पहले उसे मसालों की पोटली का ख्याल आता है। भला इससे बेहतरीन उपहार क्या हो सकता है।
 
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( SPICE OF KERALA, BLACK PEPPER, CARDAMOM, CINNAMON, CLOVE, MUNNAR )