Tuesday, January 23, 2018

भुट्टा के बारे में जानिए - सुपर फूड है ये

मुन्नार में दूसरे दिन एरावीकलुम नेशनल पार्क से बाहर निकलने पर दोपहर में हल्की हल्की बारिश हो रही थी।धूप का नामोनिशान नहीं था। ठंड बढ़ी हुई थी। ऐसे मौसम में आपको भुट्टा खाने को मिल जाए। आग पर सेंका हुआ तो क्या कहना। नेशनल पार्क के गेट पर कई भुट्टे वाले सर्द मौसम में भुट्टा भून कर पेश कर रहे थे। तो भला कौन न खाा चाहे। महाबलेश्वर से लेकर महाबलीपुरम तकमनाली से लेकर मैसूर तक आप देश में कहीं भी घूमते हुए भुट्टे का स्वाद ले सकते हैं।

 आते जाते रास्ते में आपके लकड़ी के कोयले पर भुट्टा बेचने वाले मिल जाते होंगे। कभी कभी कभी आपने खाया भी होगा। पर क्या आपको पता है पांच से 10 रुपये में बिकने वाला भुट्टा सुपर फूड है। बचपन से ही सड़क किनारे लकड़ी की धीमी आंच पर पकाकर बिकने वाला भुट्टा मुझे आकर्षित करता रहा है पर इसके फायदों के बारे में ज्यादा नहीं पता था। पर ये हल्का मीठा भुट्टा सुपर फूड है।

पूरे उत्तर भारत में  ही नहीं दक्षिण भारत में और हिल स्टेशनों पर भी भुट्टा खाने को मिल जाता है। हां महाबलेश्वर और शिलांग में थोड़ा महंगा मिलता है।
सिनेमा घर और मॉल मेंयह कार्न के रुप में मिलता है। तो दिल्ली में इसे उबाल कर छल्ली के तौर बिकते हुए देखा जा सकता है। रेत मे भूनी हुई छल्ली। दिल्ली की महिलाओं को उबली हुई छल्ली काफी पसंद आती है। पर अपने राम को तो भुट्टा ही काफी पसंद आता है। जब इसे खरीदता हूं तो लगता है कि एक निहायत गरीब और श्रम करने वालों को रोजगार दे रहा हूं।

मक्का को हम आम बोलचाल की भाषा में भुट्टा,  मकई और छल्ली भी कहते हैं। इसे तेलुगु में 'मोक्का जोनालु', तमिल में 'मक्काचोलम', मलयालम में 'चोलम', कन्नड़ में 'मुसुकिना जोला,  गुजराती में 'मक्कई', मराठी  में मकई तो बांग्ला में भुट्टा कहते हैं। 


भुट्टा खाने से फायदे - आयुर्वेद में भुट्टा खाने के कई फायदे गिनाए गए हैं। इससे प्यास शांत होती है।  जहां बहुत सी चीजें पकने के बाद अपना पोषक गुण खो देती हैं वहीं भुट्टे का पोषण और बढ़ जाता है। भुट्टे को पकाने के बाद उसके 50 प्रतिशत  एंटी-ऑक्सीअडेंट्स बढ़ जाते हैं। कई बार देखा होगा लोग पूरा भुट्टा खा लेने के बाद उसे बीच से तोड़कर सूंघते हैं। ऐसा करने से सर्दी-जुकाम में फायदा होता है।

भुट्टा कैरेटोनॉएड और विटामिन ए का अचछा स्त्रोत है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है। बढ़ती उम्र के लक्षणों को रोकता है और कैंसर से लड़ने में मदद करता है। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी ये बहुत फायदेमंद है। इसमें कोलेस्ट्रॉल न के बराबर होता है और इसलिए ये दिल की सेहत के लिए भी बहुत अच्छा है। इसमें मौजूद विटामिन सीबायोफ्लेविनॉयड और फीनोलिक कोलेस्ट्रोल और उच्च रक्त दबाव के स्तर को नियंत्रित रखता है। यह कैंसर की आशंका को भी कम करता है।

अल्सर से छुटकारा - भुट्टे में कार्बोहाइड्रेट यानी कि घुलनशील तथा अघुलनशील फाइबर की मात्र अधिक होती है। यह आंतों में बैक्टीरिया या बीमारी फैलाने वाले जीवाणुओं को खत्म कर देता है। इससे अल्सर के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। गेहूं के आटे के स्थान पर मक्के के आटे का प्रयोग करें तो यह लीवर के लिए अधिक लाभकारी है। यह प्रचूर मात्रा में रेशे से भरा हुआ है इसलिए इसे खाने से पेट अच्छा रहता है। कब्ज और बवासीर जैसी पाचन संबंधी समस्याओं से भी राहत मिलती है।

हड्डियां होती हैं मजबूत - भुट्टे के पीले दाने मिनरल्स से भरपूर होते हैं जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं। भुट्टे में पाए जाने वाले मिनरल्स गुर्दे को सुचारू ढंग से काम करने में मदद करते हैं।

याददाश्त बढ़ाता है - भुट्टे में थायमिन और नायसिन जैसे विटामिन मौजूद होते हैं। थायमिन याददाश्त के लिए आवश्यक न्यूरोट्रांसमीटर का काम करता हैजिसके अभाव में उम्र बढ़ने के साथ-साथ अल्जाइमर रोग हो जाता है। नायसिन पैलेगरा होने से बचाता है जिसमें दस्त और आंत में सूजन जैसी स्थितियां होने की आशंका रहती है।

वजन घटाने में फायदेमंद - फाइबर से भरपूर भुट्टा वजन घटाने में सहायक होता है। कमजोरी होने पर भुट्टे का सेवन करने से तत्काल ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। तो जनाब इतने फायदें हैं तो क्या सोचना जब भी कोई फुटपाथ पर भुट्टा बेचता हुआ नजर आए तो आप भी लिजिए स्वाद। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य

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