Sunday, December 24, 2017

गोकर्ण से मंगलुरु मत्स्यगंधा एक्सप्रेस से

हमलोगों को अल सुबह गोकर्ण रोड से मंगलुरु के लिए डीएमयू पैसेंजर ट्रेन पकड़नी थी। यह ट्रेन सुबह 6.20 बजे गोकर्ण रोड रेलवे स्टेशन से चलती है। गोकर्ण बाजार से इतनी सुबह 8 किलोमीटर दूर रेलवे स्टेशन के लिए सवारी मिलने की उम्मीद नहीं थी। इसलिए एक दिन पहले ही एक आटो रिक्शा वाले से बात कर ली थी। किराया भी तय हो गया 180 रुपये लेंगे। सुबह के 5 बजे हमलोग तैयार हो गए। आटोरिक्शा वाले भाई का फोन आ गया। वे समय पर हमारे होटल आ गए हमें ले जाने के लिए। अभी उजाला नहीं हुआ था और हमलोग चल पड़े रेलवे स्टेशन के लिए। आटोवाले षणमुख ( 7899149126) को समय पर स्टेशन पहुंचाने के लिए धन्यवाद।

स्टेशन पहुंचने पर टिकट काउंटर की ओर मैं दौड़ पड़ा। तीन टिकटें मंगलुरु के लिए। काउंटर वाले ने पूछा एक्सप्रेस या पैसेंजर। अभी तो कोई एक्सप्रेस ट्रेन नहीं है। उन्होंने बताया कि तुरंत मत्स्यगंधा एक्सप्रेस आ रही है। यह ढाई घंटे लेट है। हमने कहा एक्सप्रेस का ही दे दिजिए जल्दी पहुंचा देगी। एक शंका थी सीट तो मिल जाएगी। पर मुंबई से आने वाली मत्स्यगंधा में छह जनरल डिब्बे हैं, जगह मिल जाएगी। ट्रेन आकर लग चुकी है। दो मिनट का ठहराव है। टिकट लेकर हमें जनरल डिब्बे तक जाने के लिए तेज दौड़ लगानी पड़ी। क्योंकि जनरल डिब्बे पीछे थे। हमारे चढ़ते ही ट्रेन चल पड़ी। पर जगह आराम से मिल गई। मुझे और अनादि को विंडो सीट। तो माधवी तो ऊपर जाकर सो गईं।

ट्रेन चल पड़ी है। कोंकण रेल में कई साल बाद हमलोग सवार हुए हैं। अगला स्टेशन आया कुमटा। कुमटा से भी सीधे बस लेकर गोकर्ण पहुंचा जा सकता है। अगला स्टेशन है होन्नावर। उत्तर कन्नडा जिले के इस शहर  से आप सड़क मार्ग से कर्नाटक का प्रसिद्ध जोग फाल्स देखने जा सकते हैं। यहां से जोग फाल्स की दूरी 40 किलोमीटर है। शिवमोगा जिले में स्थित जोग फाल्स देश का दूसरा सबसे ऊंचा झरना है। होन्नावर के बाद हमें रेल से शरावथी नदी का विस्तार नजर आता है। इसी नदी में जोग फाल्स का पानी आता है। होन्नावर के पास ये नदी अरब सागर में मिल जाती है।

अगला स्टेशन है मुरडेश्वर। मुरडेश्वर में शिव का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां का समुद्र तट भी अत्यंत मनोरम है। यहां समुद्र तट पर शिव की एक विशाल प्रतिमा भी स्थापित की गई है।

अगला स्टेशन है भटकल। भटकल भी उत्तर कन्नडा जिले का प्रमुख शहर है। यहां पर कुछ बुरके वाली कन्याएं हमारे कोच में चढ़ती हैं। बैठते ही टैब खोलकर फिल्में देखना शुरू कर देती हैं। तो अगला स्टेशन आता है मुकांबिका रोड जहां पर हमारी ट्रेन रुकती है। यहां मुकांबिका देवी के मंदिर के लिए जा सकते हैं। अनादि नजारे देखते देखते झपकी लेने लगते हैं। एक बार कॉफी भी पी थी। पर रात को ठीक से नींद नहीं ले सके थे। हरे भरे खेत और नदियां आती जा रही हैं। कोंकण रेल का सौंदर्य है जो मुझे सोने नहीं दे रहा। कुंडापुरा अगला स्टेशन है। उडुपी जिले का यह शहर कुंडेश्वर मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।

अगला स्टेशन है उडुपी जिले का बरकुर। यह पंचलिंगेश्वर मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। इसके बाद ट्रेन उडुपी में रुकती है। अगला स्टेशन है मुल्की। दक्षिण कन्नडा जिला आरंभ हो गया है। फिर आया सूरतकल। सूरतकल में कर्नाटक का एनआईटी स्थित है। यहां से मंगलुरु शहर 28 किलोमीटर रह गया है। सूरतकल से सात किलोमीटर आगे ठोकुर आता है जो कोंकण रेलवे का आखिरी रेलवे स्टेशन है। इसके बाद मंगलुरु जंक्शन रेलवे स्टेशन आता है। पर यहां मत्स्यगंधा एक्सप्रेस का ठहराव नहीं है। हमारी ट्रेन सुबह के साढ़े 10 बजे मेंगलुरु सेंट्रल पहुंचा देती है। हल्की बारिश के कारण मौसम सुहाना है। हमलोग प्लेटफार्म नंबर दो पर उतरते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य 
(GOKARNA TO MANGLURU, RAIL TRAVEL )