Friday, December 22, 2017

सुंदर सुरम्य समुद्र तट से संवाद करने आइए- गोकर्ण

आप समदंर देखने के लिए देश के तमाम तटीय शहरों में गए होंगे पर यकीं मानिए कि गोकर्ण का समुद्र तट इन सबसे अलग है। इसका सौंदर्य कुछ ऐसा है कि शांति की तलाश में भारत आने वाले विदेशी सैलानियों को इसकी आभा मन मोह लेती है। महाबलेश्वर मंदिर के पीछे मुख्य तट पर सूर्यास्त देखने का सुख अदभुत है। इसके अलावा ओम बीच और कुदल बीच का सौंदर्य भी मोहक है। यहां बने रिजार्ट में कुछ दिन गुजारना आनंददायक हो सकता है।


गोकर्ण में हमने हरिप्रिया रेसिडेंसी को मेकमाईट्रिप से बुक किया था। पर नाम पर न जाएं यह कोई रेसिडेंसी नहीं बल्कि एक होम स्टे है। एक घर है जिसमें नीचे मकान मालकिन रहती है। पहली मंजिल के पांच कमरे गेस्ट हाउस के तौर पर तब्दील किए गए हैं।
यहां कमरा के अलावा खाना पीना चाय, काफी आदि की कोई सुविधा नहीं है। आपको  जूते चप्पल उतार कर कमरे में प्रवेश करना होता है। पर बेहतरीन बात है कि हरिप्रिया बस स्टैंड के काफी करीब है। हमें जो कमरा आंवटित हुआ उसमें बालकोनी भी थी। जहां से हरे भरे बागीचे दिखाई दे रहे हैं। हम यहां सिर्फ एक रात ही रुके। हरिप्रिया रेसिडेंसी के आसपास खाने के लिए कुछ सस्ते होटल और दैनिक जरूरतों की सामग्री खरीदने के लिए दुकानें भी हैं। आसपास में बैंक एटीएम के लिए भी दूर नहीं भटकना पड़ता है।

हमलोग महाबलेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद मंदिर के पीछे सुरम्य समुद्र तट पर पहुंच गए हैं। यहां एक रेस्टोरेंट है जहां हमने पराठे आर्डर किए। उत्तर भारत की तरह पराठे 20 रुपये में। अगर दही अलग से मांगा तो 10 रुपये और। डोसा इडली और दूसरे व्यंजनों की दरें भी काफी वाजिब थीं। तो हल्की पेट पूजा के बाद हमलोग चल पड़े समंदर के साथ संवाद करने के लिए। तकरीबन दो घंटे हमने यहां समुद्र तट पर गुजारा। धीरे-धीरे सूरज अस्त होने की ओर था। यहां सूर्यास्त देखने का सुख अद्भुत है। आनंद आ गया। अनादि काफी देर बालू पर खेलते रहे। जब शाम होने लगी तो हमलोग तट पर बने पार्क में आकर बैठ गए।


तट पर आदि शंकराचार्य की एक प्रतिमा भी स्थापित की गई है। हमलोग गोकर्ण का बाजार देखते हुए अपने होटल की ओर वापस लौट रहे हैं। रास्ते में एक दुकान पर सिलाई मशीन से तेजी से अलग अलग किस्म के मोनोग्राम बनाते कारीगर दिखाई दिए। एक मोनोग्राम 50 रुपये का। कारीगरों की काम में तेजी देखने लायक थी।

मंदिर के आसपास अच्छा बाजार है। बाजार में महंगाई का कोई असर नहीं है। दरें वाजिब हैं। कई बरतनों की दुकानें दिखाई दे रही हैं। यहां पुष्कर जैसी कपड़ों की भी कई दुकाने हैं। कुछ दुकानें वाद्य यंत्रो की भी हैं। गोकर्ण का परिवेश कस्बाई है। यहां कोई मॉल या विशाल शोरुम नहीं है।

गोकर्ण पाई रेस्टोरेंट – अगर आप गोकर्ण में खाने के लिए वाजिब जगह ढूंढ रहे हैं तो इसका उत्तर है पाई रेस्टोरेंट। यह बस स्टैंड से मंदिर के रास्ते में है। यहां पर आप शाकाहारी थाली के अलावा दक्षिण भारतीय व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं। सुबह से लेकर रात 9 बजे तक हमेशा यहां खाना तैयार मिलता है। पर हमने यहां पर रात को सिर्फ वेज बिरयानी ही खाया। ज्यादा खाने के लिए पेट तैयार नहीं था। गोकर्ण में इससे भी सस्ते भोजनालय हैं। पर यहां कोई ज्यादा हाईफाई रेस्टोरेंट नहीं है।

यहां आप कर्नाटक के कई तरह के रेडिमेड खाने पीने की सामग्री भी खरीद सकते हैं। जैसे चावल के लड्डू पोरमपोली आदि। हमने भी अगले सफर में रास्ते के लिए कुछ खरीद लिया। कोई नाइट लाइफ नहीं है यहां। जल्दी खाइए और जल्दी सो जाइए।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य 
( GOKARAN MARKET, PAI RESTAURANT )