Thursday, November 23, 2017

मंगेश महादेव - लता मंगेशकर के कुल देवता का मंदिर

हमलोग ओल्ड गोवा से मंगेश के मार्ग पर हैं। आम के बाग, कटहल के पेड़ और हरियाली के बीच रास्ता चल रहा है। बारिश का मौसम आ गया है। पर खैर मनाएं कि बारिश नहीं हुई। वरना हमारे पास आज स्कूटी पर बारिश से बचने का कोई इंतजाम नहीं है। आधे घंटे के सफर के बाद हमलोग मंगेश महादेव के पास पहुंच गए हैं।   
गोवा की राजधानी पणजी से 23 किलोमीटर दूरी पर प्रियोल गांव में श्री मंगेश महादेव का प्रसिद्ध मन्दिर है। इसका वास्तविक नाम मांगोश है। ये महाराष्ट्र के पंच गौड़ीय ब्राह्मणों में से वत्स ब्राह्मणों के कुल देवता हैं।

मंगेश महादेव मतलब महादेव शिव। यहां शिव की प्रतिमा मानव रुप में है। उनके चेहरे पर मूंछे भी देखी जा सकती हैं। मंगेश को गोवा का भगवान माना जाता है। मंगेश महादेव को गोवा के सारस्वत ब्राहम्ण अपना कुल देवता मानते हैं। लोककथाओं के मुताबिक मंगेश लिंगम को भागीरथी नदी के किनारे ब्रह्मा से प्राप्त किया गया था। इसे सारस्वत ब्राह्मण लोग तिरोहितपुरी बिहार से अपने साथ लेकर आए थे। वे इसे अपने साथ गोमांतक (गोवा) लेकर आए।


मंगेश महादेव श्रंगार अदभुत है। मंदिर का गर्भ गृह कई दरवाजों के बाद स्थित है। मंदिर का इंतजाम मंगेश देवस्थानम ट्रस्ट देखता है। परिसर अत्यंत साफ सुथरा और मनोरम है। मंदिर का सात मंजिला दीप स्तंभ शिखर दूर से ही काफी भव्य नजर आता है।


मूल रूप से श्री मंगेश महादेव कुशस्थल ग्राम में प्रतिष्ठित थे। इस गांव का नाम बिगड़कर बाद में कुडथाल या कुट्ठाल हो गया। पर इसका प्राचीन नाम कुशस्थल ही है। इस गांव में मंगेश महादेव का विशाल मन्दिर थापरन्तु पुर्तगालियों के शासनकाल में मन्दिर को नष्ट कर दिया गया था। 1543 में पुर्तगालियों के आक्रमण के बाद वत्स ब्राह्मण लोग ये गांव छोड़कर मंगेशी गांव में जाकर रहने लगे। 1739 में पेशवाओं ने मंगेशी गांव की जमीन मंदिर को दान में दी थी। यहां पहली बार 1744 में मंदिर का निर्माण किया गया। एक बार फिर मंगेश गांव में 1890 में पुनः शिव मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया। वर्तमान मंदिर का भवन 1973 का बना हुआ है। तब इसके कलश को सोने का निर्मित कराया गया।

मुख्य सड़क से मंगेश मंदिर तक जाने वाली सड़क का नाम दीनानाथ मंगेशकर मार्ग रखा गया है। इस मार्ग की लंबाई लगभग एक किलोमीटर है। बड़ी गाडियों के लिए पार्किंग मुख्य सड़क के पास उपलब्ध है। छोटी गाड़ियों से आप मंदिर तक जा सकते हैं। साल 2011 में मंदिर में प्रवेश के लिए शालीन ड्रेस कोड का प्रावधान किया गया। मंदिर परिसर में स्थानीय महिलाएं बिल्व पत्र और कमल के फूल बेचती नजर आती हैं।

लता मंगेशकर से है रिश्ता - मंगेशी गांव का संबध प्रख्यात गायिका लता मंगेशकर से है। प्रख्यात गायिका लता मंगेशकर के पिता दीनानाथ मंगेशकर का जन्म 29 दिसम्बर 1900 को गोवा के मंगेशी गांव में ही हुआ था।  उनके पितागणेश भट्ट नवाथे एक कर्हाडे ब्राह्मण थे। वे प्रसिद्ध मंगेशी मंदिर में पुजारी की भूमिका में थे। वैसे इनके परिवार का मूल उपनाम हार्डिकर था। उनके परिवार को मंगेशी मंदिर के शिवलिंग के लिए अभिषेक का सौभाग्य प्राप्त हुआ था इसलिए उन्हें अभिषेकी उपनाम से भी जाना जाता था। हालांकिदीनानाथ ने अपने पिता के परिवार के दोनो उपनामों को नहीं अपनाया। चूंकि वे परिवार सहित गोवा के मंगेशी गांव में रहते थे। इसलिए उन्होंने अपना उपनाम मंगेशकर अपनाया। इसका अर्थ है मंगेश द्वारा अपनाया गया। संयोग से यह मंगेश देवता (शिवका नाम भी है।


कैसे पहुंचे - मंगेश महादेव का मंदिर पिरोल गांव में पोंडा तालुक में मनोरम वादियों के बीच स्थित है। यह राजधानी पणजी से 23 किलोमीटर और मडगांव से 26 किलोमीटर की दूरी पर है। दोनों शहरों से नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। आप करमाली रेलवे स्टेशन से भी मंगेशी सुगमतापूर्वक पहुंच सकते हैं। मंदिर सुबह 5.30 बजे से रात्रि 10.30 तक खुला रहता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए अतिथि गृह का भी निर्माण कराया गया है। ओल्ड गोवा से मंगेशी के रास्ते में कोरलिम और भोमा आते हैं। भोमा में सड़क के किनारे हमें एक सुंदर मंदिर दिखाई देता है। श्री सातेरी प्रसन्न मंदिर भोमा। रास्ते में तिरुपति बालाजी मंदिर का बोर्ड भी नजर आया। पर हम समय की कमी से नहीं जा सके।( संदर्भ - पुस्तक पुण्यभूमि भारत- पंडित जुगलकिशोर शर्मा ) 
-    - माधवी रंजना 
(  ( MANGESH MAHADEV, GOA, LATA MANGESHKAR )