Thursday, November 16, 2017

463 साल से सेंट फ्रांसिस की ममी संरक्षित है यहां

बॉम बेसेलिका गोवा का सबसे प्राचीनतम चर्च में से है। पर इसकी ख्याति इसलिए भी है कि यहां 1554 से ही महान संत फ्रांसिस जेवियर्स की ममी (रैलिक्स) या यों कहें कि शरीर को संरक्षित करके रखा गया है। साथ बॉम बेसेलिका यूनेस्को के विश्व विरासत के स्थलों की सूची में भी शुमार है।
बॉम जीसस यानी नेक या शिशू जीसस है। इस गिरजाघर का निर्माण 1594 में शुरू हुआ। इसका निर्माण 1605 में संपन्न हुआ जिसका जिक्र गिरिजाघर में लगे अभिलेख में भी है। 11 साल में इस लाल रंग के अदभुत गिरिजाघर का निर्माण पूरा हुआ। इसका अगला भाग तीन मंजिला है। दो छोटे और एक विशाल प्रवेश द्वार इसमें बनाया गया है।  पूरे गिरिजाघर के निर्माण में बेसाल्ट पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। शेष भाग में लेटराइट का इस्तेमाल हुआ है। चर्च के ऊपरी भाग में रोमन चिन्ह आईएचएस ग्रीक भाषा में लिखा गया है।

बॉम बेसेलिका चर्च का प्रार्थना कक्ष अत्यंत विशाल है। यहां प्रवेश करने पर आपको यहां कई गाइड मिलेंगे जो शुल्क लेकर चर्च के बारे में और गोवा में क्रिश्चियनिटी के आगमन के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं। वे बड़ी खूबसूरती से चर्च के बारे में जानकारी देते हैं। अगर आप गाइड न भी करें तो उनके कुछ वाक्य आपके कान में पड़ ही जाते हैं।

प्रार्थना कक्ष में अंदर बढ़ने पर दायीं तरफ सेंट एंथोनी की वेदी है। यहीं बाईं तरफ सेंट फ्रांसिस जेवियर की काष्ठ की विशाल मूर्ति है। वहीं मध्य भाग के उत्तरी दीवार पर गिरिजाघर के संरक्षक डोम जोरोनिमो मस्कार्नहास का समाधि लेख है। दक्षिणी दीवार पर लकड़ी का चंदोवा युक्त मंच बना है। मुख्य वेदी के पार्श्व में आवर लेडी ऑफ होप और संत माइकेल की वेदियां हैं।

आकर्षक ढंग से सजाई गई वेदियों में शिशु यीशु, संत इग्नेश लोयला की मूर्तियां देखी जा सकती हैं। वहीं गोलाकार फलक के ऊपर परमेश्वर फादर, पुत्र और पवित्र आत्मा चित्रित है। बॉम बेसेलिका के गलियारों में घूमते समय लोगों से पूरी तरह शांति बनाए रखने की उम्मीद की जाती है।

संत फ्रांसिस जेवियर की ममी यहां
बॉम बेसेलिका का संबंध महान संत फ्रांसिस जेवियर से भी है। यहां पर संत फ्रांसिस जेवियर के पवित्र शारीरिक अवेशेषों को संरक्षित करके रखा गया है। इसके पास ही संत के जीवन के दृश्यों को देखा जा सकता है। यहां पर लकड़ी का बना वो ताबूत भी देखा जा सकता है जिसमें संत फ्रांसिस जेवियर के शरीर को लंबे समय तक रखा गया था। यह सुंदर नक्काशीदार ताबूत है।
इस ताबूत का निर्माण 1744 में किया गया था। यह पाइनवुड का बना हुआ है। इसके बाहरी हिस्से में चांदी का काम किया गया है। इसमें 1952-1953 तक संत फ्रांसिस की अस्थियां रखी गई थीं। पर बाद में इसे क्रिस्टल के बने दूसरे कैफीन में स्थानांतरित कर दिया गया। यहां पर आप दोनों कैफीन के दर्शन कर सकते हैं।

1698 में यहां संत फ्रांसिस जेवियर की अस्थियों के लिए संगमरर का चबूतरा तस्कनी के ड्यूक कासमास 3 के आदेश पर बनवाया गया। चर्च के बाहर एक छोटा सा स्मृति स्थल है जहां लोग संत फ्रांसिस जेवियर की याद में मोमबत्तियां जलाते और प्रार्थना करते हुए दिखाई दे जाते हैं। 


बिना किसी लेप के शव सुरक्षित है -  ओल्ड गोवा के बेसिलिका ऑव बोम चर्च में रखे संत फ्रांसिस जेवियर के मृत शारीर की बात करें तो यह जानकर आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे कि यह शव पिछले 463 वर्षों से बिना किसी लेप या मसाले के आज भी एकदम तरोताजा है। फ्रांसिस ज़ेवियर का जन्म 1505 में नवारे (पुर्तगाल) में हुआ था। 

पुर्तगाल के सम्राट जोमामो (त्रितीय) की प्रेरणा और पोप की सहमति से जेवियर 6 मई, 1542 को को लिस्बन से गोवा आ गए। इस यात्रा के दौरान वे  मोजांबिक, मालिंदी (केन्या), सोक्रेता होते हुए गोवा पहुंचे थे। ओल्ड गोवा को अपना स्थायी निवास स्थान बनाकर काफी समय तक आसपास के क्षेत्रों में धर्म प्रचार किया। 

सेंट फ्रांसिस ने यहीं से जापान और चीन की भी यात्राएं की। चीन के क्वान्तुंग तट के पास एक दुर्घटना में उसकी मृत्यु  3 दिसंबर 1552 को हो गई।

फरवरी 1553 में पुर्तगालियों ने उसके शव को कब्र से निकाल कर 14 मई 1554 को गोवा लेकर आए। इसके बाद शव को ममी बनाकर लोगों के दर्शनार्थ रखा गया है। फ्रांसिस जेवियर को मृत्यु  के 108 साल बाद रोम ने उसे उसकी 'सेवाओं' के लिए 'संत' कि उपाधि प्रदान की।

बॉम बेसेलिका का परिसर काफी विशाल और हराभरा है। चर्च के बगल में एक ऊपर सीढ़ियां चढ़कर एक सुंदर संग्रहालय भी है। इसके साथ ही यहां एक ध्वनि और प्रकाश का शो भी होता है। चर्च के अंदर पुस्तकें और स्मृति चिन्ह बिक्रय का काउंटर भी बना हुआ है।    

गोवा के चर्च में ड्रेस कोड -  गोवा के सभी चर्च में प्रवेश के लिए ड्रेस कोड देखने को मिलता है। खास तौर पर महिलाएं कम कपड़ो में प्रवेश नहीं कर सकतीं। उनसे उम्मीद की जाती है कि वे मिनी स्कर्ट या स्लिवलेस कपड़ों में इन चर्चों के अंदर प्रवेश ना करें। हमने कई जगह सही तरीके से दुपट्टा नहीं रखने पर भी सुरक्षाकर्मियों को महिलाओं को हिदायत देते हुए देखा।  
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
-        (ST FRANCIS XAVIER , OLD GOA, BASILICA OF  BOM JESUS)