Friday, October 27, 2017

मुंबई का टर्मिनल-2 और लाइव म्युजियम

मुंबई के छत्रपति शिवाजी विमान तल का नया नवेला टी-2 टर्मिनल बड़ा शानदार बना है। बाहर से इसकी इमारत को आते जाते हाईवे से देखें तो काफी भव्य नजर आती है। अंदर से यह विशाल शापिंग मॉल सा नजर आता है। टर्मिनल के अंदर घूमते टहलते हुए आप सारा दिन गुजार सकते हैं। इसके अंदर एक शानदार म्युजियम भी बनाया गया है।
संयोग से हमें 20 सिंतबर को यहां पांच घंटे गुजारने का मौका मिला। दरअसल हमें दिल्ली से गोवा की सीधी फ्लाइट भी मिल रही थी। पर उतने ही किराये में जेट एयर का टिकट वाया मुंबई मिल रहा था। सो हमने जेट को चुना ये सोचकर दोनों विमान में खाना भी मिलेगा। पर इस बार जेट के खाने के पैकेज ने निराश किया। दिल्ली चेन्नई फ्लाइट जैसा शानदार खाना इस बार नहीं था। मुंबई से गोवा की बीच तो चाय-कॉफी भी नहीं मिली।
मुंबई टी-2 टर्मिनल का निर्माण जीवीके समूह ने कराया है। इसका डिजाइन और वास्तु विश्व स्तर का है। इसके निर्माण में परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का भी ख्याल रखा गया है।

इस टर्मिनल में 3.2 किलोमीटर लंबी मल्टी स्टोरी कला दीर्घा का निर्माण किया गया है। जय हे दीर्घा के निर्माण में ख्याति प्राप्त कलाकारों का सहयोग लिया गया है। इसमें 5000 कलाकृतियां देखी जा सकती हैं। टी-2 में घरेलू आवागमन प्रस्थान के अलावा अंतरराष्ट्रीय आवागमन प्रस्थान के टर्मिनल हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानो के लिहाज से यह देश का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है।  
किसी जमाने में टी-2 को सहार एयरपोर्ट के नाम से जाना जाता था। अब यह नए भव्य रूप में दिखाई देता है। वहीं टी1 टर्मिनल को लोग सांताक्रूज एयरपोर्ट के नाम से भी जानते हैं।
टी-2 पर विशाल शापिंग लांच है, जहां आप खादी से लेकर कई तरह के कपड़ों, किताबों और गिफ्ट की खरीददारी कर सकते हैं। खाने पीने के लिए तमाम लोकप्रिय ब्रांड के आउटलेट हैं। पर यहां बिकने वाले बिस्कुट,नमकीन के पैकेट बाजार से काफी महंगे हैं।
टी-2 व्यस्तता के मामले में दुनिया में 29 वें नंबर का एयरपोर्ट है। कोई 850 विमान यहां से रोज उड़ान भरते हैं। टेकऑफ और लैंडिंग की समयबद्धता में भी इसे कई अवार्ड मिल चुके हैं। टी-2 को आधुनिकीकरण के बाद जनवरी 2014 में शुरू किया गया। बाहर से पहुंचने के लिए मुंबई में बने वेस्टर्न एक्सप्रेसवे से यह 6 लेन के सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।

आस्वाद में फ्रेंच फ्राइज- पांच घंटे के इंतजार में हमें भी हल्की भूख लगने लगी थी। पर यहां बिकने वाली ज्यादातर रेस्टोरेंट की सामग्री काफी महंगी थीं। हमने आस्वाद नामक फूट आउटलेट में फ्रेंच फ्राइज खाई। वैसे आस्वाद के मीनू की बाकी चीजें भी काफी सुस्वादू थीं। इनका आउटलेट गेट नंबर 50 के पास है।  
टी-2 पर उतरते ही मैं एक यात्री से टकरा जाता हूं। वे मेरे फोन से एक मिस्ड कॉल मारने का आग्रह करते हैं। मैं उन्हें कहता हूं मिस्ड क्या फोन लिजिए और जिससे भी बात करनी हो पूरी बात करें। उन्हें अबू धाबी जाना है। पर सुबह 4.00 बजेकी फ्लाइट इस गफलत में छूट गई कि वे उसे शाम 4 बजे की समझ बैठे थे। उनके पास भारत का सिम कार्ड नहीं है। अब अपने भाई को फोन कर अपनी परेशानी बयां कर रहे हैं। मैंने उनकी बात तो करा दी पर और कोई मदद नहीं कर सका। आगे बढ़ता हूं तो खादी की दुकान पर बापू नजर आते हैं। प्रस्थान लांज में जाने के दौरान हमें एक बार फिर सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा। पर यहां पर बने सुंदर कृत्रिम झरने ने मन मोह लिया।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य

( MUMBAI AIRPORT, CST, SAHAR, SANATACRUZ, T2, GVK GROUP )