Tuesday, September 5, 2017

जिला गाजियाबाद से लखनऊ सेंट्रल वाया बरेली की बर्फी

हाल में फिल्म आई है बरेली की बरफी। यूं तो उत्तर प्रदेश के शहर बरेली की बरफी कोई प्रसिद्ध नहीं है। पर नाम में तुकबंदी अच्छी है। फिल्म में हंसी का पिटारा शानदार है इसलिए फिल्म को लोगों ने खूब पसंद किया है। इससे पहले सुनील दत्त की मशहूर फिल्म मेरा साया का गीत झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में काफी लोकप्रिय हुआ था। पर हाल के कुछ सालों में उत्तर प्रदेश के शहरों के नाम को समाहित करती कई फिल्में आई हैं। इस साल की एक और फिल्म है लखनऊ सेंट्रल। फरहान अख्तर को इस फिल्म से काफी उम्मीदें हैं। राजधानी लखनऊ के नाम पर ये फिल्म बनी है।

 हालांकि हिंदी फिल्मों के कहानी के कथ्य भाव में लखनऊ पहले भी कई बार आया है। एक गीत को बहुत प्रसिद्ध हुआ था- ये लखनऊ की सरजमीं...ये लखनऊ की सरजमीं... पर शहर के नाम पर ये पहली फिल्म है। पिछले दिनों आई जॉली एलएलबी -2 भी की कहानी में भी लखनऊ केंद्र में है। उत्तर प्रदेश से सांस्कृतिक शहर बनारस के नाम से जुड़ी फिल्में भी बनी हैं। देवानंद की फिल्म बनारसी बाबू (1973) में इसी नाम पर एक गीत भी था। दूसरी बनारसी बाबू 1997 में आई इसमें गोविंदा हीरो थे और राम्या हीरोइन। फिर प्रेम कथा में पिरोई फिल्म बनारस ए मिस्टक लव स्टोरी 2006 में आई। इसमें उर्मिला मांतोडकर ने बेहतरीन अभिनय किया था।
हालांकि बनारस की पृष्ठभूमि पर 2015 में बनी मसान शानदार फिल्म थी। और भी कई फिल्मों में कहानी के केंद्र विंदु में बनारस है। 1953 में फिल्म आई थी झांसी की रानी। इसमें महताब रानी लक्ष्मीबाई बनीं थीं। इस श्वेत श्याम फिल्म में सोहराब मोदी भी थे।

पर यूपी के शहरों के नाम पर 2013 में फिल्म आई जिला गाजियाबाद। संजयदत्त की यह फिल्म अपराधकथा पर केंद्रित थी। हालांकि फिल्म अच्छा कारोबार करने में सफल नहीं हो सकी।  साल 2015 में हंसल मेहता निर्देशित फिल्म अलीगढ़ आई। यह एक समलैंगिक प्रोफेसर की कहानी थी, जिसमें मनोज वाजपेयी ने अच्छा अभिनय किया था। फिल्म आलोचकों के बीच चर्चित हुई।

 यूपी के मेरठ शहर ने बालीवुड को कई बड़े स्टार और निर्माता निर्देशक दिए हैं। पर अब एक फिल्म बन रही है मेरठ 1987 ए लव स्टोरी। इसे निर्देशित कर रहे हैं प्रेम हंस। वहीं तिग्भांशु धुलिया मेरठ के पड़ोस के कस्बा सरधना की कहानी पर बेगम समरू फिल्म बना रहे हैं। 2017 की हिट फिल्म टायलेट एक प्रेम कथा की कहानी की पृष्ठभूमि मथुरा शहर है। तो कबीर कौशिक की 2005 की फिल्म सहर यूपी के गैंगवार पर केंद्रित थी।
आयुष्मान खुराना तापसी पन्नू को लेकर फिल्मकार शूजीत सरकार आगरा का डाबरा बना रहे हैं। तो अब ताज का शहर आगरा भी इस सूची में शामिल हो गया है। आपको बता दें कि भोजपुरी में एक फिल्म इलाहाबाद से इस्लामाबाद 2017 में आ चुकी है। इससे पहले 2016 में भोजपुरी में बलिया के दबंगई आई है।
अभी यूपी के शहरों पर फिल्मों के नाम की अनगिनत संभावनाएं बची हुई हैं। रामपुर, गाजीपुर, बलिया, मिर्जापुर के नाम पर भी फिल्में बननी चाहिए। 22 करोड़ आबादी वाले हिंदी हृदय प्रदेश के नाम और कहानियां भुनाने के लिए असमीमित उम्मीदे हैं अभी। कुछ नाम मैं सुझा देता हूं – आगरे का लड्डू, रामपुरी चाकू। कुछ आप भी सुझाइए।  


यूपी के शहरों के नाम पर कुछ फिल्में - 
बरेली की बर्फी
जिला गाजियाबाद
लखनऊ सेंट्रल
बनारसी बाबू
बनारस ए मिस्टिक लव स्टोरी
झांसी की रानी
अलीगढ़
इलाहाबाद से इस्लामाबाद (भोजपुरी)
बलिया के दंबगई (भोजपुरी)
आने वाली फिल्में - 
- मेरठ 1987 ए लव स्टोरी
- आगरा का डाबरा

- vidyutp@gmail.com विद्युत प्रकाश मौर्य
( लेखक पेश से पत्रकार हैं, घूमना उनका शौक है )