Sunday, September 17, 2017

इस विशाल इमारत को क्यों कहते हैं भूलभुलैया

बचपन से सुनता आया था कि लखनऊ शहर में एक भूलभुलैया है। जब पहली बार लखनऊ आया तो समय निकाल कर पहुंच गया देखने भूलभुलैया। वास्तव में लखनऊ शहर में स्थित बड़ा इमामबाड़ा को ही लोग भूलभुलैया कहते हैं। इसका नाम आसफी इमामबाड़ा भी है। इस बड़े इमामबाड़े में आने वाले लोग हमेशा ही भूलभुलैया में गुम हो जाते हैं। तो इसे अच्छी तरह घूमने के लिए लोगों को गाइड का सहारा लेना पड़ता है।

वास्तव में भूलभुलैया के अंदर प्रकोष्ठों ओर मार्गों का ऐसा जाल है जो घूमने वाले को भ्रम में डाल देता है। इसके बाद बाहर निकलने का मार्ग का ज्ञान होना कठिन होता है। आपको सारे दरवाजे और गलियारे एक ही जैसे नजर आते हैं। घूमते घूमते आप वहीं पहुंच जाते हैं जहां से चले थे।



बड़ा इमामबाड़ा का निर्माण – बड़ा इमामबाड़ा के निर्माण की कहानी दिलचस्प है। इसका निर्माण अकाल पीड़ितों को रोजगार देने के लिए किया गया था। तब इसके निर्माण में कुल 10 लाख की लागत आई थी। इसे नवाब आसिफुद्दौला ने 1784 में बनवाया था। इसके वास्तुकार किफायतउल्ला थे। तब लखनऊ में भारी सूखा पड़ा था। तो मजदूरों को रोटी देने के लिए इस विशाल इमारत का निर्माण शुरू कराया गया। बड़ा इमामबाड़ा के निर्माण में मुगल और राजपूत वास्तुकला का मेल दिखाई देता है। वास्तव में पूरी इमारत न कोई मस्जिद है न कोई मकबरा है। पर इसके परिसर में एक मसजिद और बावड़ी जरूर है।

इसका विशाल गुंबदनुमा हाल 50 मीटर लंबा और 15 मीटर ऊंचा है। इसकी चौड़ाई 16 मीटर है। इसकी छत को बिना किसी बीम या गार्डर के सिर्फ इंटे जोड़ कर बनाया गया है। जो अपने अपने आप में एक अजूबा है। भूलभुलैया में तीन बड़े कमरे हैं। इसकी दीवारों के छुपे हुए लम्बे गलियारे हैं। दीवारें लगभग 20 फीट मोटी हैं। इस भूल भुलैया में 1000 छोटे छोटे रास्तों का मकड़जाल है जिसमें से कुछ रास्ते बंद हैं। इन्ही रास्तों में लोग भूल जाते हैं।

अगर आप बड़ा इमामबाडा में पहुंचे हैं तो अधिकृत गाइड के साथ पूरी इमारत को घूमें। गाइड आपको भूलभुलैया में ले जाकर छोड़ देगा और आपको खुद से बाहर निकले को कहेगा। आप इसमें असफल होंगे, फिर कहीं से वही गाइड अवतरित हो जाएगा और आपको बाहर निकाल ले जाएगा।

बावड़ी और आसफी मसजिद - बड़ा इमामबाड़ा से जुड़ी हुई एक बावड़ी है जो पांच मंजिलों की है। इस बावड़ी में गोमती नदी से पानी आने का इंतजाम किया गया था। इमामबाड़ा के अंदर एक आसफी मसजिद भी है। इस मसजिद में गैर मुस्लिमों का प्रवेश प्रतिबंधित है। इमामबाड़ा के बाकी हिस्सों में सारे लोग घूम सकते हैं।

धीरे धीरे बोल को सुन न ले - भूलभुलैया की ओर खास बात है यहां की आंतरिक दीवारों में आप प्रतिध्वनि के माध्यम से आप सैकड़ों फीट दूर किसी के फुसफुसाने की ध्वनि सुन सकते हैं। यह अपने आप में अजूबा लगता है। पर यह वैज्ञानिक है। आपको गाइड ऐसा करके दिखा सकता है। वो जो गाना सुना होगा न धीरे धीरे बोल कोई सुन न ले, वह भूलभुलैया पर आकर चरितार्थ होता है। आप बड़ा इमामबाड़ा घूमते समय अपने गाइड से इसकी प्रस्तुति देख सकते हैं।


कैसे पहुंचे – लखनऊ के मुख्य रेलवे स्टेशन  चारबाग से बड़ा इमामबाड़ा की दूरी 5.5 किलोमीटर है। रेलवे स्टेशन से आपको शेयरिंग आटो रिक्शा बैटरी रिक्शा आदि मिल जाएंगे। यह कैसबाग बस डिपो से तकरीबन तीन किलोमीटर की दूरी पर है। आप साइकिल रिक्शा से भी लखनऊ शहर का नजारा लेते हुए इमामबाड़ा तक पहुंच सकते हैं। इमामबाड़ा के पास रुमी दरवाजा भी स्थित है। बड़ा इमामबाड़ा सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है। सामान रखने के लिए यहां क्लाक रुम उपलब्ध है। कैमरा के लिए 5 रुपये और वीडियो कैमरा के इस्तेमाल के लिए 25 रुपये का शुल्क है। बड़ा इमामबाड़ा का रखरखाव हुसैनाबाद ट्रस्ट के जिम्मे है।  
- vidyutp@gmail.com
( LUCKNOW, BARA IMAMBARA, BHULBHULAIYA )