Saturday, September 9, 2017

इस फल को खाइए और बने रहिए जवान

पूर्वोत्तर मेले के कई स्टाल पर हमें ड्रैगन फ्रूट नजर आया तो इसके बारे में जिज्ञासा बढ़ी। नाम है ड्रैगन फ्रूट । पर यह खतरनाक नहीं बल्कि बड़े काम का फल है। पूर्वोत्तर के कई राज्यों में इसकी खेती होने लगी है। खासकर मिजोरम में। ड्रैगन फ्रूट को पिताया या स्ट्रॉबेरी पीयर के नाम से भी जाना जाता है। ऊपर से काफी ऊबड-खाबड़ सा दिखने वाला ये फल अंदर से काफी मुलायम और सुस्वादु होता है। जब आप इसके फायदे जानेंगे तो खाना पसंद करेंगे।

भारत में ड्रैगन फ्रूट नया है। वैसे ड्रैगन फ्रूट की खेती थाइलैंड, वियतनाम, इज़रायल और श्रीलंका में पहले ही लोकप्रिय है। भारतीय बाजार  में इसकी कीमत 200  से 250 रुपये प्रति किलो तक है। इसलिए इसकी खेती में किसानों को लाभ हो रहा है। ठंडे प्रदेश में इसकी खेती अच्छी होती है। इसलिए पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में ड्रैगन फ्रूट की खेती हो रही है। ड्रेगन फ्रूट के पौधे का उपयोग सजावटी पौधे के तौर पर भी होता है। ड्रेगन फ्रूट को ताजे फल के तौर पर भी खाया जा सकता है। साथ ही इस फल से जैम, आइसक्रीम, जेली, जूस और शराब भी बनाया जा सकता है। सौंदर्य प्रसाधन के तौर पर भी इसे फेस पैक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।



आइए जानते हैं ड्रैगन फ्रूट के कुछ फायदे –

- खतरनाक कोलेस्ट्रॉल में कमी लाकर आपके दिल को मजबूत बनाए रखता है।

- शुगर से भी लड़ने में मददगार होता है। इसमें मौजूद फाइबर ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित करता है।
- यह आपके पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।

- अपने आहार में ड्रैगन फ्रूट को शामिल करके आप अर्थराइटिस (जोड़ों के दर्द ) आदि बीमारियों से भी बच सकते हैं।

- एंटीऑक्सीडेंट की अच्छी मात्रा होती है।  कैंसर पैदा करने वाले तत्वों से बचाव करता है।
असमय बुढ़ापा आने से रोकता है - 
ड्रैगन फ्रूट में एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण ही यह असमय बुढ़ापा आने से रोकता है। ड्रैगन फ्रूट को शहद मिलाकर फेस मास्क बना सकते हैं। इसका नियमित रूप से चेहरे पर इस्तेमाल से चेहरे से झुर्रियों को हटाता है और त्वचा को जवां बनाए रखता है।


बाजार में भारी मांग - तमाम तरह के पौष्टिक गुणों को देखते हुए ड्रेगेन फ्रूट की स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग हो रही है। इसलिए ड्रेगेन फ्रूट की खेती व्यवसायिक तौर पर लाभप्रद मानी जाती है।
खेती से हो रही लाखों की कमाई - 
समान्य वर्षा और कम धूप वाले क्षेत्र इसकी खेती के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। ड्रैगन फ्रूट के पौधे कम उपजाऊ मिट्टी और तापमान में होने वाले लगातार बदलाव के बीच भी जीवित रह सकते हैं। इसके पौधो को 50 सेमी औसत सालाना दर से बारिश की जरूरत होती है जबकि 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए उपयुक्त माना जाता है। तो पूर्वोत्तर के कई राज्य इसकी खेती के लिए मुफीद हैं। 

मिजोरम का हार्टिकल्चर विभाग ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा दे रहा है। इससे राज्य के किसानों की आमदनी बढ़ी है। इसके पौधों में मई से जून के महीने में फूल लगते हैं और अगस्त से दिसंबर तक फल आते हैं। इसके कच्चे फलों का रंग गहरे हरे रंग का होता जबकि पकने पर इसका रंग लाल हो जाता है। अभी तक इसके खेती में किसी तरह की बीमारी लगने का मामला सामने नहीं आया है।
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(DRAGON FRUIT, MIZORAM )