Friday, September 1, 2017

अदभुत, अनूठा, अविराम- पावनधाम मंदिर

वैसे तो हरिद्वार इतने मंदिर हैं कि आप गिन नहीं सकते। एक दो दिन में सारे मंदिरों के दर्शन करने के लिए कम पड़ जाएंगे। पर हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु दिन भर इन मंदिरों के दर्शन करते हैं। पर इन सबके बीच एक ऐसा मंदिर है जिसके दर्शन आप जरूर करें। वह है पावन धाम मंदिर। पावन धाम मंदिर में शीशे की अद्भुत कारीगरी देखने को मिलती है।  यह  हरिद्वार का अदभुत, अनूठा अविराम मंदिर है। यह मंदिर का एक शीश महल है। यानी कांच का मंदिर। खास तौर पर बच्चों को यह मंदिर काफी पसंद आता है।


पावन धाम मंदिर की आधारशिला 1970 में 19 अप्रैल को रखी गई थी। इस मंदिर के निर्माण में पंजाब के शहर मोगा के संत और व्यापारियों का बड़ा योगदान है। मोगा के लाला श्रीरामजी के बड़े योगदान से इस मंदिर के निर्माण की शुरुआत हुई। उनके फर्म का नाम नानकचंद श्रीराम है। पावन धाम का संबंध मोगा में बने गीता भवन से है। गीताभवन ट्रस्ट, मोगा ने ही इस अदभुत पावन धाम मंदिर का निर्माण कराया। गीताभवन ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी वेदांतानंद महाराज जी ने किया था। संस्था का कार्य संत सेवा, गौ सेवा और संतों के लिए भोजन की सेवा करना है।

मोगा में ट्रस्ट द्वारा कई गतिविधियों का संचालन किया जाता है। कई साल पहले अपनी मोगा यात्रा के दौरान मुझे गीता भवन जाने का मौका मिला था। मोगा में गीता भवन ट्रस्ट एक विद्यालय का भी संचालन करता है। आजकल पावन धाम के अध्यक्ष स्वामी सहज प्रकाश जी हैं।


हरिद्वार के पावनधाम मंदिर में प्रवेश करने के बाद आप एक बड़े से आंगन के चारों तरफ शीशे का अदभुत काम देखते हैं। इन शीशे के काम में आप में रामकथा  और महाभारत के कई प्रसंगों को देख सकते हैं। शीशे के कारण कई जगह एक मूर्ति की कई अक्श शीशे में दिखाई देती हैं। मंदिर में कई गैलरियां हैं। इनको अच्छी तरह देखने के लिए कम से कम एक घंटे का समय अपने पास जरूर रखिए। मंदिर अंदर फोटोग्राफी पर कोई रोकटोक नहीं है। मंदिर को देखने का कोई शुल्क भी नहीं है।

मंदिर की कुछ कलाकृतियां अपने सौंदर्य के कारण देखने वालों को चकित करती हैं। महाभारत के युद्ध में रथ पर सवार अर्जुन और उनके सारथी बने श्रीकृष्ण की प्रतिमा काफी मोहित करती है।  भगवान शंकर माता पार्वती को अमर कथा सुनाते हुए जैसे कई प्रसंग यहां आप दीवारों पर देख सकते हैं।
मंदिर के आंगन में कुछ प्रेरक दोहे और शायरी का संकलन भी लिखा गया है। जिसको पढ़ना और प्रेरणा लेना अच्छा लगता है। ये बानगी देखिए...

जरा सी बात पर पुराने याराने गए,
अच्छा हुआ कुछ दोस्त पहचाने गए।

काम कुछ अच्छे कर लोग, अच्छी जिंदगानी आपकी,
लोग भी कुछ सीखें सबक सुनकर कहानी आपकी।

मुस्कुराके जिनको गम का जहर पीना आ गया,
ये हकीकत है, जहां में उनको जीना आ गया।

चिड़ी चोंच भर कर ले गई, नदी न घट्यो नीर,
दान दिए धन न घटे, कह गए दास कबीर।

कैसे पहुंचे - पावन धाम मंदिर हरिद्वार ऋषिकेश मार्ग पर स्थित है। यह हरिद्वार की हर की पौड़ी से दो किलोमीटर की दूरी पर है। हरिद्वार से आटो रिक्शा से या बैटरी रिक्शा से पावन धाम मंदिर पहुंचा जा सकता है। मंदिर परिसर में जूता घर, क्लाक रुम और रेस्टोरेंट आदि की सुविधा है। यहां पर एक पूजन सामग्री की दुकान  भी है।
- vidyutp@gmail.com

( PAWANDHAM TEMPLE, HARIDWAR RISHIKESH ROAD, GEETA BHAWAN TRUST MOGA, PUNJAB )