Wednesday, August 30, 2017

हरिद्वार में भारत माता का अदभुत मंदिर

देश में जगह जगह आप मंदिर देखते होंगे पर कहीं भारत माता का मंदिर देखा है क्या। देश में भारतमाता के दो ही मंदिर हैं एक हरिद्वार में और दूसरा वाराणसी में। वाराणसी का भारत माता मंदिर काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के परिसर में स्थित है। हरिद्वार का भारत माता मंदिर ऋषिकेश मार्ग पर साधुवेला में स्थित है। 

हरिद्वार का भारत माता मंदिर अत्यंत भव्य है। यह सात मंजिला है। अगर आप हरिद्वार ऋषिकेश की यात्रा पर हैं तो इस मंदिर को देखने का समय जरूर निकालें।  मंदिर को देखने के लिए एक से दो घंटे का समय भी अपने पास रखें।

भारत माता का मंदिर आपको देश की सांस्कृतिक विविधता की नयनाभिराम झांकी पेश करता है। मंदिर के दर्शन के साथ आप अपने देश के बारे में काफी कुछ जान लेते हैं। इसलिए खास तौर पर छात्रों के लिए ये मंदिर उत्सुकता जगाने वाला है। मंदिर का भव्य भवन दूर से ही नजर आने लगता है। 
ऊपर तक जाने के लिए लिफ्ट भी - 
मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए जूते-चप्पल आदि उतारना आवश्यक है। भारी सामान है तो क्लाक रूम का इंतजाम है। परिसर में पेयजल का भी इंतजाम है। सात मंजिले मंदिर को पूरी तरह घूमने के लिए आप लिफ्ट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए 2 रुपये शुल्क है। लिफ्ट से सीधा सातवीं मंजिल तक जाएं और हर मंजिल को देखते हुए सीढ़ियों से उतर आएं। पर हम तो चलेंगे सीढ़ियों से ही।

आधार तल पर भारत माता 
आधार तल पर भारत माता का भव्य मंदिर बनाया गया है। भारत माता एक कल्पना है। पर हिंदू परंपरा में जन्मभूमि को जननी के समान माना गया है। इसलिए ये मिट्टी भी हमारी माता ही है। तो इसके सम्मान में भारत माता की कल्पना कर लेते हैं। भारत माता की प्रतिमा अत्यंत भव्य है। उनका श्रंगार भी बेहतरीन किया गया है। 

प्रथम तल पर वीर सेनानियों की प्रतिमाएं हैं। इनमें महात्मा गांधी से लेकर आरएसएस के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। दूसरे तल पर मातृ मंदिर की संकल्पना है। इसमें अहिल्याबाई, मीरा बाई, एनी बेसेंट, सिस्टर निवेदिता आदि की प्रतिमाएं देख सकते हैं।

तीसरे तल पर संत गण विराजमान हैं। इनमें गौतम बुद्ध, महावीर, नरसी मेहता, तुलसीदास आदि की प्रतिमाएं हैं। कई संतो को आप नहीं जानते होंगे, उनके भी आप यहां दर्शन कर सकते हैं।

चौथी मंजिल पर देश के अलग अलग राज्यों की झांकियां हैं। इन झांकियों का निर्माण ज्वालापुर हरिद्वार के कलांगन से जुड़े कलाकार चंद्रमणि ने किया है।
शक्ति मंदिर में देवी प्रतिमाएं
पांचवां मंजिल शक्ति मंदिर के नाम पर समर्पित है। यहां पर देवियों की प्रतिमाएं हैं। इनमें वेदमाता गायत्री, नव दुर्गा के नौ रूप देखे जा सकते हैं। अब चलिए और ऊपर चलते हैं। छठी मंजिल भगवान विष्णु को समर्पित है। यहां नारायण की भव्य प्रतिमा है। दक्षिण भारत में इन्हे विट्ठल स्वामी के रूप में जाना जाता है। तो यहां विष्णु के साथ उनके रूप भगवान विट्ठल भी विराज रहे हैं।

सातवीं मंजिल पर देवों के देव महादेव शिव 

और चलते चलते हम पहुंच गए मंदिर के सबसे ऊपरी मंजिल पर। यानी सातवीं मंजिल पर। सातवीं मंजिल पर विराज रहे हैं देवों के देव महादेव यानी शिव। यह भारत माता मंदिर की आखिरी मंजिल है। यहां से जरा बाहर की ओर देखिए सामने गंगा नदी का अदभुत नजारा दिखाई देता है। मंदिर के आंतरिक भागों की फोटोग्राफी निषेध है।

भारत माता मंदिर का उदघाटन 1983 में 15 मई तो तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने किया था। इसके वास्तुकार नरेंद्र भाई एकनाथ पटेल, वडोदरा, गुजरात के रहने वाले थे। मंदिर का निर्माण समन्वय सेवा ट्रस्ट द्वारा स्वामी सत्यमित्रानंद जी गिरी के प्रेरक नेतृत्व में किया गया। आगे भी इस मंदिर का प्रबंधन यही ट्रस्ट देखता है। 

-vidyutp@gmail.com
(BHARAT MATA MANDIR, HARIDWAR, SWAMI SATAYMITRANAND GIRI )

4 comments:

  1. रोचक। अगली बार उधर की यात्रा करूँगा तो इधर जरूर जाऊँगा।

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’रसीदी टिकट सी ज़िन्दगी और ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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  3. Bahut hi sundar hai Bharat mata ka mandir. Darshan karane ka aabhar.
    Kripya inhe bhi dekhen-Bengal florican mating dance & Lion tailed macaque pronunciation

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