Monday, August 28, 2017

प्रकाशेश्वर शिव मंदिर - यहां दान देना मना है....

देश में आपने जहां भी मंदिर देखे होंगे वहां पर दान पात्र रखा होता है, या दान की रसीद काटी जाती है। पर एक ऐसा मंदिर भी है जहां पर दान देने की सख्त मनाही है। ऐसा मंदिर है उत्तराखंड के देहरादून में। पर इस मंदिर में जाने से पहले कैम्पटी फॉल से वापसी की कहानी....

  कैम्प्टी फॉल का यादगार डिनर और वापसी - कैम्प्टी फॉल से वापसी का समय है।  लेकिन भूख लगी है तो एक रेस्टोरेंट मे रुकते हैं। दाल मखनी और तंदूरी रोटी आर्डर करते हैं। खाना बहुत सुस्वादु मिला। अगर अनादि को खाना पसंद आ गया हो तो खाना वाकई अच्छा है। खाने के बाद घड़ी देखता हूं। बस के खुलने का समय हो गया है। बस वाले ने 8.30 का समय दिया था। हमलोग तेजी से बस पार्किंग की ओर दौड़ते हैं। अगर बस छूट गई तो यहीं कैम्प्टी फॉल में ही रात गुजारनी होगी।
हम पहुंचे को वाकई बस हमारा ही इंतजार कर रही थी बाकी सारे लोग आ चुके थे। बस में बैठकर राहत मिली। पर मसूरी पहुंचते ही एक बार फिर जाम शुरू हो गया। जो लोग मॉल घूमने के लिए उतर गए थे वे भी वापस बस में आ गए।
बस जाम में बस फंसी है, तो अनादि को बस में अपनी उम्र के चार पांच बच्चे मिल गए जिनके साथ वे अंत्याक्षरी खेलने लगे। उन्नाव का एक परिवार है जिसमें कई स्कूली बच्चे भी हैं। पर सारे बच्चे खेलते खेलने कब सो गए पता नहीं चला। इस बीच मैं बाहर देखता हूं तो नजर आता है कि मसूरी शहर रात की रोशनी में रोशनी से नहा चुका है। उसकी सुंदरता बहुत प्यारी लग रही है। यहां से पूरा देहरादून शहर भी दिखाई देता है। रात में वह भी रंगबिरंगा दिखता है।

प्रकाशेश्वर महादेव मंदिर, देहरादून

जाते समय हमें बस के पड़ाव में देहरादून के राजपुर इलाके में प्रकाशेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करने का सौभाग्य मिला था। हम सब उतर कर इस मंदिर में दर्शन के लिए गए। यह शिवजी का लोकप्रिय मंदिर है। हालांकि यह बहुत पुराना नहीं है पर मंदिर में हमेशा श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती है।

हम भला भगवान को क्या दे सकते हैं-  प्रकाशेश्वर महादेव मंदिर में साफ साफ लिखा है कि मंदिर में किसी तरह का दान देना मना है। मंदिर में कोई दान बाक्स नहीं है। यहां लिखी गई जानकारी के मुताबिक मंदिर एक निजी प्रोपर्टी है। इस मंदिर का निर्माण शिवरत्न केंद्र हरिद्वार द्वारा कराया गया है। मंदिर के निर्माता योगीराज मूलचंद खत्री का परिवार है। मंदिर में यह भी बताया गया है कि भला हम भगवान को क्या दे सकते हैं। हम तो हमेशा उनसे लेने की कामना रखते हैं। मंदिर में शिव के जलाभिषेक के लिए लंबी लाइन लगी रहती है। मंदिर की ओर से खीर प्रसाद दिया जाता है। कई बार खिचड़ी और चाय भी मिलती है। मंदिर में शिव के अलावा कई देवी देवताओं की मूर्तियां भी हैं। इन्हे फूलों से सजाया गया है।

प्रकाशेश्वर मंदिर परिसर में एक बड़ी सी दुकान है, जिसमें धार्मिक वस्तुएं उपलब्ध है। यहां लोग खूब खरीदारी कर रहे हैं। मंदिर के बगल में एक कैंटीन भी है, जहां खाने पीने की चीजें खरीदने के लिए मारामारी है। अनादि भी सैंडविच खाने की इच्छा जताते हैं। तो मैं उनके लिए कैंटीन से सैंडविच खरीदता हूं। खाने के बाद हमलोग बस में बैठ जाते हैं आगे के सफर के लिए।


प्रकाशेश्वर महादेव का मंदिर देहरादून में मसूरी रोड पर कुठाल गेट के पास स्थित है। यह देहरादून से 12 किलोमीटर की दूरी पर है। मंदिर का निर्माण 1990-91 के दौरान कराया गया। मंदिर के पास से देहरादून की घाटी का सुंदर नजारा दिखाई देता है। मंदिर मुख्य सड़क पर ही स्थित है। पार्किंग के लिए सीमित जगह उपलब्ध है। पर मसूरी जाने वाले ज्यादातर लोग यहां रुकते हैं।
हमारी मसूरी यात्रा का लंबा समय तो जाम में ही गुजर गया। इसलिए हम सभी मसूरी आने वालों को ये सलाह देना चाहेंगे कि आप शनिवार और रविवार को इधर न आएं तो अच्छा रहेगा।

और रात को डॉक्टर अनूप के घर - हमारी चिंता है कि देर रात हरिद्वार पहुंचने पर कहां रुकेंगे। इसी बीच मैं अपने मोबाइल पर मिस्ड कॉल और एसएमएस देखता हूं। हरिद्वार से डॉक्टर अनूप गक्खड़ याद कर रहे हैं। मैंने उन्हें आने की सूचना दी थी। मैं बताता हूं कि बस हरिद्वार देर रात पहुंचेगी। वे कहते हैं जब भी पहुंचे फोन किजिएगा। मैं लेने आ जाउंगा।

हमलोग रात 1.30 बजे हरिद्वार के लालतरौ घाट की पार्किंग पहुंचते हैं। डॉक्टर अनूप हमें लेने पहुंच गए हैं अपनी कार से। हमलोग ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर में उनके आवास में पहुंचते हैं। सुबह देर से सो कर उठे तो भाभी जी ने सुस्वादु पंजाबी पराठे तैयार कर रखे थे। पंजाबी पराठों पर तो अनादि टूट ही पड़ते हैं। मैं भी पांच साल पंजाब में गुजार चुका हूं। तो पराठे उदरस्थ कर हमलोग निकल पड़ते हैं फिर गंगा जी के तट की ओर।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
   ( PRAKASHESHWAR MAHADEV MANDIR, DEHRADUN, KAMPTY FALL DINNER, RETURN BY BUS )