Saturday, August 26, 2017

आ जाओ झरने के नीचे हूं ... कैम्टी फॉल - मसूरी

कैम्प्टी फॉल के रास्ते में एक व्यू प्वाइंट। 
हमारी बस धीरे धीरे आगे बढ़ रही थी कैम्प्टी फॉल की ओर. पर जाम के कारण एक घंटे में एक किलोमीटर भी नहीं निकल सकी। तो हमारी बस में कुछ खाते पीते घरों की पंजाबी महिलाएं थीं, वे चिल्लाने लगीं, सी तो नई जाना कैम्पटी वैंप्टी..असी तो इत्थे उतर जाना...मॉल रोड पर घूमन चलांगा.. और वे उतर गईं। उनका फैसला अपनी जगह सही रहा होगा। पर हम तो कैम्पटी फॉल जाना ही चाहते थे। सो हम बस में बैठे रहे। पर रविवार को मसूरी में भारी जाम में बस धीरे धीरे सरक रही थी।

मसूरी बाजार के मुख्य चौराहे से कैम्प्टी फॉल की दूरी कोई 16 किलोमीटर है। यह यमुनोत्री जाने वाले मार्ग पर स्थित है। पर बस एक घंटे में तीन किलोमीटर ही सरक पाई। एक आशंका मन में थी, कैम्प्टी फॉल  पहुंचने तक अंधेरा हो गया तो क्या देख पाएंगे। हमारी बस लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी के पास फंसी हुई है। वही अकादमी जहां सिविल सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले लोग प्रशिक्षण लेने आते हैं।

खैर आगे जाकर रास्ता साफ हुआ। बस आगे बढ़ी। हमलोग कैम्प्टी फॉल पहुंच गए हैं। ये एक छोटा सा कस्बा है। यहां पर कुछ गेस्ट हाउस, होटल और बाजार भी है। आप चाहें तो कैम्पटी में भी ठहर सकते हैं। पर कैम्प्टी फॉल अपने झरने के लिए ही प्रसिद्ध है। बस वाले ने पार्किंग में उतार दिया। वहां से झरना आधा किलोमीटर दूर है। सूरज ढलने लगा था। हमलोग तेजी से दौड़ने लगे। क्योंकि अंधेरा होने से पहले कैम्पटी फॉल पहुंच जाना लक्ष्य था। रास्ते में सड़क के किनारे एक झरना दिखा। वहां भुट्टे खाते हए कुछ फोटो खिंचवाए फिर आगे बढ़ गए। कैम्पटी मुख्य में झरने तक पहुंचने के लिए कई सौ सीढ़ियां उतरनी पड़ती है। इन सीढ़ियों के दोनों तरफ दुकानें सजी हैं। इसलिए उतरना बोरिंग नहीं लगता। वैसे झरने तक जाने के लिए रोपवे भी बन गया है। पर हम रोपवे के टिकट में रुपये बर्बाद नहीं करना चाहते, सो तेजी से सीढ़ियां ही उतर रहे हैं। और हम अंधेरा होने से पहले उतर चुके हैं झरने के करीब। यहां सैकड़ो लोगों का हुजुम पहले से मौजूद है।

कैम्प्टी फॉल के झरने का पानी श्वेत श्वेत किसी दूध की धारा की तरह लगता है। पानी कई सौ फीट की ऊंचाई से बड़ी तेज गति से गिर रहा है। सैकड़ो लोग झरने के नीचे बने छोटे से तालाब के चारों तरफ जमा हैं। कुछ लोग पानी के अंदर भी हैं। हल्की हल्की हो रही बारिश ने ठंड और बढ़ा दी है।
इस ठंड में कुछ लोग चाय, काफी, आमलेट और मैगी खा रहे हैं। यहां पर नहाने वालों के लिए नायलन की निक्कर किराये पर या खरीदने के लिए उपलब्ध है। पर मैं पूरी तैयारी से आया हूं। तुरंत झरने के नीचे  कूद जाता हूं। अंधेरा होने से पहले झरने का जितना भी आनंद ले लूं, अच्छा रहेगा। ठंड काफी है, पर इसकी परवाह नहीं।
कुछ देर तक नहाने बाद पानी से निकल पड़ता हूं। अंधेरा होने पर हम वापस लौट पड़ते हैं। धीरे धीरे सड़क तक पहुंचने के लिए हमें अभी सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी है।

संकट में माइक्रो एटीएम का सहारा- 

याद आता है कि जेब में नकदी कम है। सिर्फ 300 बचे हैं। ठीक से डिनर भी नहीं कर सकते। वापसी में अगर बहुत देर हो गई तो हरिद्वार में किसी होटल में रात गुजारनी पड़ सकती है। एक दुकानदार से एटीएम के बारे में पूछता हूं। क्योंकि हरिद्वार और मसूरी के रास्ते में सारे एटीएम खाली मिले थे।  दुकानदार ने बताया कि ऊपर एक मोबाइल शॉप में माइक्रो एटीएम है।

हम उस शॉप में पहुंचे जहां माइक्रो एटीएम था। दुकान बंद ही होने वाली थी। हमने पैसे निकासी का आग्रह किया। माइक्रो एटीएम मतलब है एक स्वाइप मशीन, जिसमें आपका डेबिट कार्ड स्वाइप करके दुकानदार रुपये दे देता है। वह जमा भी ले लेता है। यह पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) का माइक्रो एटीएम था जहां से मैंने दो हजार रुपये निकाल लिए। समय पर काम आने के लिए धन्यवाद माइक्रो एटीएम।
-- vidyutp@gmail.com

(KAMPTY FALL,  MUSSOORIE, UTTRAKHAND, PNB MICRO ATM )