Wednesday, June 14, 2017

हंपी का विशाल राज महल - विजयादशमी पर होता था विशाल जलसा


विजय नगर की विशाल राजधानी में सैर करते हुए मन में यह सहज सवाल कौंधता है कि राजा का महल कैसा है। आखिर इतनी बड़ी राजधानी में राजा कहां रहता होगा। तो इसका जवाब भी हमें जल्द ही मिल गया। हम महानवमी डिब्बा के पास हैं। वास्तव में राज प्रांगण का विशाल क्षेत्र है। हालांकि अब यह खंडहर के रूप में है पर इसकी भव्यता का अंदाजा इसे चारों तरफ से अच्छी तरह देखने के बाद सहज ही लगाया जा सकता है।

अनूठी जल प्रणाली से लैस हंपी का शाही अहाता
हंपी की सैर करते करते अब हम महानवमी डिब्बा पहुंच गए हैं। यह वास्तव में विशाल राज प्रांगण है। इसकी कई विशेषताएं हैं। इसमें सबसे खास है इसकी अनूठी जल संरक्षण प्रणाली। राजमहल के प्लेटफार्म की ऊंचाई 8 मीटर है। राजधानी विजयनगर में राजकीय प्रयोग में लाया जाना वाले ग्रेनाइट पत्थरों से बना यह विशाल ढांचा हुआ करता था। इसमें प्रवेश के लिए पूर्व-पश्चिम और दक्षिण दिशा से सीढ़ियां बनाई गई थीं।

शाही परिसर में 43 इमारतें - शाही अहाता का क्षेत्रफल 59 हजार वर्ग मीटर है। ऊंची और दोहरी दीवारों के अंदर इस अहाते में कुल 43 इमारतें हुआ करती थीं। अहाते में जाने के लिए तीन प्रवेश द्वार बने हैं। इसी अहाते में राजा का निवास भी हुआ करता था।

इस अहाते में पानी पहुंचाने के लिए सुंदर जल प्रणाली निर्मित की गई थी। इसमें कुल 23 छोटे बड़े हौज थे जिन्हें राजा के सेवकों द्वारा भरा जाता था।था। संभवतः इसमें तुंगभद्रा नदी से जल लाने का इंतजाम किया गया था। अहाते में एक कुआं भी है। यह शाही अहाता विजयनगर साम्राज्य की वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है।  पुर्तगाली यात्री देमिंगोस पायस विजय नगर सम्राज्य की सिंचाई व्यवस्था के बारे में  लिखता है। उसके अनुसार बेहतरीन सिंचाई व्यवस्था के कारण यहां उत्कृष्ट किस्म की खेतीबाड़ी होती थी। 

दशहरा पर होता था राजकीय आयोजन - यहां पर हर साल दशहरा के मौके पर रामनवमी और विजयादशमी के दिन बड़े राजकीय आयोजन हुआ करते थे। हजार राम मंदिर की हंपी में मौजूदगी से पता चलता है कि हंपी के शासक राम के बड़े पूजक थे। दशहर के इस विशाल जलसा में बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेते थे। यह राज्य का बड़ा उत्सव होता था। इसमें कई तरह के प्रदर्शन हुआ करते थे। सन 1520 में आने वाले यात्री अबदुर रजाक ने इस उत्सव का जिक्र किया है। सन 1520 के आसपास ही कृष्णदेव राय के शासनकाल में आए एक और पुर्तगाली यात्री देमिंगोस पायस ने भी विजयादशमी उत्सव का जिक्र किया है।





महानवमी डिब्बा से संबद्ध अनुष्ठान सितंबर एवं अक्टूबर के शरद महीनों में दस दिनों तक मनाया जाने वाला हिंदू त्योहार था। इस अनुष्ठान को उत्तर भारत में दशहरा, बंगाल में दुर्गा पूजा और दक्षिण भारत में महानवमी के नाम से जाना जाता है। इस मौके पर विजय नगर के शासक अपने रुतबा और शक्ति का प्रदर्शन करते थे। इस मौके पर अश्व पूजा और जानवरों की बलि दी जाती थी। नृत्य और कुश्ती का आयोजन होता था। हाथी घोड़ों पर शोभायात्रा निकाली जाती थी। त्योहार के अंतिम दिन राजा सेना का निरीक्षण करता था।


विशाल सुरंग - इस अहाते के अंदर एक विशाल सुंरग भी बनाई गई थी। यह सुरंग दूर बाहर जाकर निकलती थी। इस सुरंग के एक हिस्से को अभी भी देखा जा सकता है। हालांकि अब इस सुरंग में प्रवेश की अनुमति नहीं है। इस राज प्रासाद से लगा हुआ एक शाही अहाता भी है। 

तो यहां नहाती थी रानी -  शाही अहाता से आगे चलने पर हमें रानी स्नान कुंड दिखाई देता है, इसे आजकल क्वीन्स बाथ के नाम से जाना जाता है। जो 15 वर्ग मीटर में बना हुआ है। रानी के स्नान कुंड के बाहर विशाल उद्यान बना हुआ  है।




इस कुंड के चारों ओर सुसज्जित बरामदे और बालकोनी बनी हुई है। इन बरामदों की नक्काशियां भी शानदार हैं। हालांकि हमें देश के अलग अलग हिस्सों में शाही बावड़ियां देखने को मिलती हैं। क्वीन्स बाथ कुछ उसी तरह का है, पर यह खास तौर पर रानी के लिए बनाया गया था। रानियां यहां स्नान के दौरान रथ में सवार होकर अपनी सहायिकाओं के साथ जल क्रीड़ा करने के लिए आती थीं।

दोपहरी गहरा रही है। पर हमारा हंपी का सफर अभी जारी है। हमारी अगली मंजिल होगी हंपी का मशहूर विट्ठल स्वामी का मंदिर तो बने रहिए दानापानी के साथ।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyutp@gmail.com 

( HAMPI, VIJAYNAGAR KINGDOM , MAHNAVMI TIBBA, KING PALACE, QUEENS BATH ) 

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