Tuesday, May 23, 2017

एहोल में रावणपहाड़ी गुफा मंदिर और दस हाथ वाले शिव की तांडव मूर्ति

हमारा अगला पड़ाव है रावणफडि। यह एक गुफा मंदिर समूह है। यह एहोल के सभी स्मारकों में सबसे पुराना माना जाता है। हालांकि यह बादामी के गुफा मंदिरों से छोटा है। यह गुफा मंदिर सातवीं शताब्दी का बना हुआ है। पहाड़ों पर गुफाओं तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। पर ये सीढ़ियां बेहतर हाल में नहीं हैं।


इस मंदिर के बाहर चार खंभे दिखाई देते हैं। यहां शंखनिधि और पद्मनिधि स्तंभ दिखाई देते हैं। मंदिर में एक बरामदानुमा हॉल और आयताकार देवस्थान बना हुआ है। देव स्थान में विशाल शिवलिंगम और बाहर नंदी की प्रतिमा बनी हुई है। सभा मंडप के बरामदे में कई मूर्तियां बनी हुई हैं। इसमें हरिहर, गरुड पर सवार विष्णु और इंद्र की मूर्तियां प्रमुख हैं।


विक्रमादित्य प्रथम के शासनकाल में निर्माण-  ये गुफा मंदिर ऐलोरा की याद दिलाते हैं। इनका निर्माण काल भी ऐलोरा की गुफाओं के आसपास का ही प्रतीत होता है।  मूर्तियों का कला शिल्प आपको चमत्कृत करता है। इनका निर्माण काल चालुक्य शासक विक्रमादित्य प्रथम ( 655 -681 ) के समय का माना जाता है। उसने दुबारा चालुक्य शासन स्थापित होने पर परम महेश्वर की इस गुफा का निर्माण कराया। 

दस हाथों वाले तांडव करते शिव - सभा मंडप की कई मूर्तियों के बीच दीवार पर ऊंचे दस हाथों वाले शिव तांडव करते दिखाई देते हैं। शिव की ऐसी तांडव मूर्ति दुर्लभ है। उनके साथ पार्वती भी हैं। साथ में गणेश और कार्तिकेय भी नृत्य की मुद्रा में दिखाई देते हैं। उस महान सृजन शिल्पी को नमन करने का मन करता है जिसने बड़े मनोयोग से ये प्रतिमा बनाई होगी। एक अन्य कलाकृति में सप्तमातृकाएं शिव तांडव देखती हुई दिखाई गई हैं।



रावणफडि नाम से ऐसा लगता है कि कहीं यह वास्तव में रावण पहाड़ी तो नहीं है। इस गुफा मंदिर समूह में एक सुंदर सरोवर भी बना हुआ है। इसमें पानी मौजूद है, पर सरोवर की साफ सफाई नहीं की जाती है। कदाचित बारिश के दिनों में यहां बेहतरीन नजारा दिखाई देता होगा।


कई घंटे एहोल के प्रेम में आबद्ध रहने के बाद हमलोग अब मंदिर के इस विशाल ग्राम से निकल चुके हैं। रास्ते में गांव में फिर से कुछ देवालय दिखाई देते हैं जिसके आसपास बिल्कुल सट कर लोगों ने घर बना रखे हैं। अगर कर्नाटक सरकार चाहे तो एहोल का सौंदर्यीकरण और बेहतर ढंग से कर सकती है। गांव के इन घरों को मंदिर से थोड़ा दूर करके एहोल के बाकी मंदिरों को भी दर्शनीय बनाया जा सकता है।
एहोल गांव में मंदिर - कई मंदिरों का रखरखाव बिल्कुल नहीं होता...
एहोल को पार करके हमलोग हरे भरे सड़क पर हैं। सड़क पर बहुत कम ही वाहनों की आवाजाही दिखाई दे रही है। हालांकि कर्नाटक सरकार की ओर बेहतर सड़क का निर्माण कार्य जारी है। मलप्रभा नदी पर बने पुल को पार करके हम चल पड़े हैं दक्षिण के काशी की ओर। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( AHOLE, RAVNAPHADI CAVES, SHIVA TEMPLE ) 

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