Tuesday, April 25, 2017

आंध्र और ओडिशा में थी एक नैरो गेज रेलवे - पीएलआर


बेंगलुरु रेलवे स्टेशन के बाहर एक नैरोगेज का स्टीम लोकोमोटिव आराम फरमाता हुआ नजर आता है। ये लोकोमोटिव है- पीएल 698  जो 2 फीट 6 इंच की पटरियों पर दौड़ता था।  यह आंध्र और ओडिशा के बीच चलने वाले एक भूले बिसरे नैरोगेज रेलवे नेटवर्क का हिस्सा हुआ करता था। इस लोकोमोटिव का निर्माण सन 1931 में हंसले इंजन कंपनी, लीड्स , ग्रेट ब्रिटेन द्वारा किया गया था। लंबे समय तक दक्षिण पश्चिम रेलवे का हिस्सा रहे इस लोकोमोटिव को अब संरक्षित किया गया है। यह लोको पहियों के लिहाज से 0-6-4 श्रेणी का है।


इस लोकोमोटिव के नाम से पहले पीएल इसलिए लगा है कि यह पारलाखेमुंडी लाइट रेलवे का हिस्सा हुआ करता था। इस लाइट रेलवे का संचालन नौपदा (आंध्र प्रदेश) और गुणुपुर (गजपति जिला, ओडिशा) के बीच हुआ करता था। कुल 40 किलोमीटर लंबे इस ढाई फीट चौड़ी पटरियों वाले रेलवे लाइन का निर्माण पारलाखेमुंडी के गजपति राजा ने 1898 में कराया था। दरअसल नौपदा तक ब्राडगेज लाइन आ चुकी थी। तब गजपति के राजा ने अपने राज्य को रेल नेटवर्क से जोडने के लिए नौपदा से पारलाखेमुंडी के बीच 40 किलोमीटर का नैरोगेज ट्रैक बिछाने का निर्णय लिया। 
दो साल में ये रेलवे लाइन बनकर तैयार हुई। सन 1900 से इस मार्ग पर नौपदा जंक्शन से पारलाखेमुंडी के बीच रेलों का संचालन होने लगा। तब इस लाइन के निर्माण पर सात लाख रुपये का खर्च आया था।

दो साल बाद ही 1902 में इस लाइन का संचालन बंगाल नागपुर रेलवे ने अपने अधीन कर लिया। पहले यह लाइन घाटे में चल रही थी। पर 1920 के बाद यह लाभ में आ गई। 1924 से 1931 के बीच इस नैरोगेज लाइन का विस्तार गुणुपुर तक किया गया। इस तरह से 40 किलोमीटर के नैरो गेज लाइन की लंबाई बढ़कर 90 किलोमीटर हो गई।

साल 2003 तक पीएलआर नेटवर्क पर नैरोगेज रेलगाड़ियों का संचालन हो रहा था। हालांकि 1992 में स्टीम इंजन की जगह जेडीएम श्रेणी के डीजल लोकोमोटिव ले चुके थे। साल 2003 में यह रेल नेटवर्क घाटे में चल रहा था। तो पहले इस पर रेल बस चलाने का फैसला हुआ। बाद में इसे आमान परिवर्तित कर बड़ी लाइन में बदलने पर फैसला हुआ।

और थम गया 104 साल का सफर - साल 2004 में 9 जून को इस नैरोगेज लाइन को आमान परिवर्तन के लिए बंद कर दिया गया। तकरबीन सात साल बाद साल 2011 में इस मार्ग पर बड़ी लाइन की रेलों का संचालन होने लगा।

नौपदा का स्टेशन कोड एनडब्लूपी (NWP) है यह आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में पड़ता है, जबकि गुणुपुर का कोड जीएनपीआर (GNPR)  है जो ओडिशा के गजपति जिले में पड़ता है। आजकल पुरी से गुणुपुर के बीच पैसेंजर ट्रेन का संचालन होता है।
चेन्नई में नैरो गेज स्टीम लोकोमोटिव पीएल 691 ( फोटो सौ - न्यू इंडियन एक्सप्रेस ) 

छह लोकोमोटिव का संरक्षण - इस लाइट रेलवे के छह लोकोमोटिव को अलग अलग स्थानों पर संरक्षित करके रखा गया है। इसमें से एक लोकोमोटिव केएसआर बेंगलुरु  रेलवे स्टेशन के बाहर पहुंच गया है जिसे आते जाते लोग देखते हैं।
पीएलआर के अन्य लोकोमोटिव की बात करें तो पीएल 691 को चेन्नई के दक्षिण रेलवे मुख्यालय के बाहर रखा गया है। इसका निर्माण केर स्टुअर्ट एंड कंपनी ने किया था। यह लोको 1998 में यहां लाया गया। साल 1987 में पीएल 691 पर डाक टिकट भी जारी किया गया था। अब यहां पर आते जाते लोग इस लोकोमोटिव के साथ सेल्फी लेते देखे जाते हैं।
ओडिशा के पुरी स्थित बीएनआर होटल में पीएल 692

वहीं पीएल 692 को बीएनआर होटल पुरी के बाहर रखा गया है। यह होटल बेंगाल नागपुर रेलवे की ओर से शुरू किया गया था। इसलिए इसका नाम बीएनआर होटल है। पीएल 693 को विशाखापत्तनम में रामकृष्णा समुद्र तट पर रखा गया है। पीएल 694 विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन के बाहर आपको दिखाई दे सकता है। वहीं पीएल 697 को विशाखापत्तनम डीआरएम आफिस के बाहर स्थापित किया गया है। तो ये सारे स्टीम लोकोमोटिव एक भूले बिसरे नैरोगेज रेलवे लाइन की याद दिलाते हैं।
-- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

(PLR, PARLAKHEMUNDI LIGHT RAILWAY, NG RAIL, AP, ODISHA, KARNATKA ) 

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