Wednesday, February 8, 2017

पापड़, भुजिया, दालमोट और रसगुल्ले का शहर - बीकानेर




बीकानेर रेलवे स्टेशन के बाहर निकलते ही पापड़ भुजिया की दुकानें दिखाई देती हैं। सबसे सस्ता भुजिया (सेव) यहां 100 रुपये किलो मिल रहा है। अच्छी गुणवत्ता वाला 140 रुपये किलो तक है। यह भुजिया के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले तेल पर निर्भर करता है कि उसकी गुणवत्ता कैसी होगी। बीकानेर के रसगुल्ले भी प्रसिद्ध है। बीकानेर से शुरू हुआ बीकाजी बहुत बड़ा ब्रांड बन चुका है।

दूसरा प्रमुख ब्रांड बीकानेर वाला है। पर बीकानेर में पापड़ भुजिया बनाने वाली अनगिनत इकाइयां हैं। यहां कुटीर उद्योग की तरह पापड़ , भुजिया का निर्माण होता है। यहां तकरीबन 25 लाख लोगों को इस क्षेत्र में रोजगार मिला हुआ है। साल 2010 में बीकानेरी भुजिया को इसके खास स्वाद के लिए ज्योग्राफिकल इंडेक्स भी मिल चुका है। कहा जाता है कि 1877 में महाराजा श्री डूंगर सिंह के कार्यकाल में बीकानेर शहर में चने के बेसन से भुजिया का निर्माण आरंभ हुआ। अब बीकानेर की पूरी दुनिया में पहचान भुजिया से होने लगी है।

कैसे बनी बीकानेरी भुजिया - बीसवीं सदी की शुरुआत में बीकानेर में तनसुख दास अग्रवाल मोठ दाल की बड़िया बनाया करते थे। एक बार उन्होंने इन बड़ियों को फ्राई पैन में भून दिया। उनका स्वाद अच्छा लगा। इसका नाम दिया उन्होंने भुजिया। इस तरह से भुजिया का आविष्कार हुआ। उनके बेटे भीखाराम ने इस कारोबार को आगे बढ़ाया। बाद में उनके पोते चांदमल ने भुजिया की गुणवत्ता में और सुधार किया। ये भुजिया बीकानेर के राजा के शाही दरबार के नास्ते का हिस्सा बन गया। और इस तरह भीखाराम चांदमल एक ब्रांड बन गया। इन दिनों इसे संक्षिप्त कर बीसी ब्रांड नाम दिया गया है। तो भुजिया का मुख्य तत्व होता है मोठ दाल (किडनी बीन्स) तेल और मसाले। पर जो स्वाद बीकानेर में बनी भुजिया का है वह कहीं और की भुजिया में नहीं आ पाता। 





भोजन का समय हो चला है। बीकानेर रेलवे स्टेशन के पास रात के खाने के लिए विकल्प ढूंढने निकला तो पहले लालजी का रेस्टोरेंट दिखाई दिया। हालांकि वहां खाने की दरें काफी ज्यादा थीं। मैं मीनू कार्ड देखकर बाहर निकल आया। और कुछ जगह देख लेने में क्या हर्ज है। इसके बाद मैं आनंद होटल एंड रेस्टोरेंट में पहुंचता हूं। होटल की आंतरिक सज्जा शानदार है। यहां पर खाने की थाली 88 रुपये की है। बस मैं यहीं जम गया। आनंद की थाली अत्यंत सुस्वादु रही।


 देखिए थाली में क्या क्या है आनंद की थाली में - चपाती, सलाद, पापड़, चावल, दाल, रायता, पनीर की सब्जी, सूखी सब्जी। हालांकि यहां पर थाली के अलावा आपके पास अलग अलग व्यंजन का भी विकल्प मौजूद है। इस रेस्टोरेंट में स्थानीय लोग बड़ी संख्या में जीमने पहुंचते हैं। इससे इसकी लोकप्रियता का पता चलता है। डायनिंग हॉल के सामने इनकी साफ सुथरी रसोई दिखाई देती रहती है। 



मैंने थाली का स्वाद लेने से पूर्व होटल के रिसेप्शन पर अपना मोबाइल चार्ज में लगा दिया। और अपनी सीट पर बैठकर थाली का इंतजार करने लगा।  आनंद रेस्टोरेंट में फ्रेशरूम का भी बेहतर इंतजाम है। मुझे रेलवे स्टेशन के पास खाने के लिए बेहतरीन जगह लगी। यहां पर आप भुगतान कार्ड से भी कर सकते हैं। ये भी अच्छी बात रही। नोटबंदी के 50 दिन हो गए हैं पर बीकानेर के शहर के ज्यादातर एटीएम पैसा नहीं उगल रहे हैं। 

बीकानेर शहर में रात को खाने के बाद दूध पीने का भी चलन है। रात्रि भोजन के बाद लोग दूध पीने बाहर निकलते हैं। कड़ाही में उबलता गर्मागर्म दूध 20 या 25 रुपये प्रति ग्लास। बीकानेर से चलते वक्त आप रसगुल्ले (सफेद वाले) भी खरीद सकते हैं। वह यहां सस्ते मिलते हैं।
ये रसगुल्ले मुझे बीकानेर रेलवे स्टेशन पर भी बिकते हुए दिखाई दिए। बीकानेरी रसगुल्ले इतने सस्ते होते हैं कि कई लोग तो यहां से बड़ी मात्रा में रसगुल्ले पैक कराकर ले जाते हैं। मैं सीधे घर नहीं जा रहा इसलिए रसगुल्ले पैक कराने मौका नहीं मिल सका। इसके अलावा शहर शुद्ध देसी घी के लिए भी प्रसिद्ध है। 


ऐतिहासिक पुस्कालय और पढ़ाई करते लोग -  मुझे बहुत खुशी हुई यह देखकर की स्टेशन रोड पर सुव्यवस्थित तरीके से एक पुस्तकालय और वाचनालय का संचालन किया जा रहा है। श्री जुबली नागरी भंडार बीकानेर 1908 से संचालित वाचनालय है। किताबें और पत्रिकाएं करीने से सजा कर रखी हैं। देश में जहां लोग कह रहे हैं कि पढ़ने लिखने का चलन कम होता जा रहा है, रात में इस पुस्तकाल में पढ़ाई करते लोग देखकर खुशी होती है। 

पुस्तकालय के अंदर एक मंदिर भी है। हालांकि यहां पढ़ाई करने वाले बूढ़े बुजुर्ग लोग ही ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। लोग अपनी पादुका उतार कर इस पुस्तकालय में प्रवेश करते हैं।  अगली ट्रेन के इंतजार में थोड़ी देर इस पुस्तकालय में गुजारता हूं। बीकानेर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर भी पापड़ भुजिया और रसगुल्ले बिकते हुए देखता हूं।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( BIKANER, PAPAD, BHUJIA, DALMOT, RASGULLA, GRAM, RAJSTHAN ) 

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