Tuesday, February 21, 2017

कुलधरा - पालीवाल ब्राह्मणों का एक अभिशिप्त गांव

एक गांव जो कभी आबाद था। हजारों लोग रहते थे। सुबह शाम संगीत गूंजता था। पर अब सिर्फ खंडहर। हम बात कर रहे हैं कुलधरा की। आज इसकी गिनती देश के कुछ प्रमुख भुतहा स्थलों में होती है।
 जैसलमेर आने वाले ज्यादातर सैलानी रेगिस्तान जरूर देखना चाहते हैं। अक्सर शाम को लोग जैसलमेर शहर से 40 किलोमीटर दूर सम सैंड ड्यून्स का रूख करते हैं। इस रास्ते में आता है कुलधरा गांव। यह गांव अब सैलानियों का प्रमुख आकर्षण है। देखने के नाम पर यहां अब सिर्फ खंडहर है। पर ये खंडहर चुपचाप एक दास्तां सुनाते हैं।
कुलधरा कभी पालीवाल ब्राह्मणों का आबाद गांव हुआ करता था। यहां 600 परिवार रहते थे। पर यह एक ऐसा गांव है जो रात ही रात में वीरान हो गया था। आखिर क्या थी कहानी। क्यों खाली हो गया गांव। इसके पीछे गांव की इजज्त का सवाल था। आप कल्पना कर सकते हैं कि एक लड़की की सुन्दरता न केवल उसके परिवार को बल्कि एक साथ 84 गांवों को रातों रात सुनसान उजाड़ में बदलने पर मजबूर कर देगी। जैसलमेर के पास स्थित इस कुलधारा की कुछ ऐसी ही कहानी है।
दीवान सालम सिंह की बुरी नजर - कुलधरा को जिस व्यक्ति की बुरी नजर लग गई, वो शख्स था रियासत का दीवान सालम सिंह। गांव के एक पुजारी की बेटी पर सालेम सिंह इस कदर मोहित हो गया कि वह उससे शादी करने की जिद पर आ गया। गांव वाले इसके लिए तैयार नहीं थे। सालेम सिंह ने उस लड़की से शादी करने के लिए गांव के लोगों को चंद दिनों की मोहलत दी। अब ये लड़ाई गांव की एक कुंवारी लड़की के सम्मान की बन गई थी और गांव के आत्म सम्मान की भी।
और रातों रात खाली हो गया गांव 
गांव की चौपाल पर पालीवाल ब्राह्मणों की बैठक हुई और 5000 से ज्यादा परिवारों ने अपने सम्मान के लिए जैसलमेर की रियासत छोड़ने का फैसला ले लिया। अगली शाम कुलधरा गांव को सारे लोग छोड़ कर चले गए। रह गई सिर्फ विरानगी। आज परिंदे भी उस गांव की सरहदों में दाखिल नहीं होते। कुलधरा पहुंचने पर आपको अब तमाम घरों के खंडहर दिखाई देते हैं। बीच में चौड़ा रास्ता और दोनों तरफ व्यवस्थित तरीके से बने मकानों की ईंटे इस बात की गवाही दे रही हैं कि कभी यहां कितना गुलजार मौसम रहा होगा। लोग बताते हैं कि गांव छोड़ते वक्त उन ब्राह्मणों ने इस जगह को श्राप दिया था कि यह जगह कभी फलेगा फूलेगा नहीं।
कहा जाता है कि पालीवाल ब्राह्मण काफी अमीर थे। उन्होने काफी सोना जमीन में गाड़कर रखा हुआ था। गांव खाली होने के बाद काफी लोग यहां सोने की तलाश में आए और खुदाई करके सोना ले गए।

रुहानी ताकतों का बसेरा - कहा जाता है कि उस समय से लेकर आज तक ये वीरान गांव रूहानी ताकतों के कब्जे में है। अक्सर यहां आने वालों को इन रुहानी ताकतों का एहसास होता है। बदलते वक्त के साथ 82 गांव तो दोबारा आबाद हो गए, लेकिन दो गांव तमाम कोशिशों के बावजूद आबाद नहीं हो सके। इनमें से एक है कुलधरा और दूसरा खाभा।

अब ये दोनों गांव भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में हैं। इन गांवों को दिन सैलानियों के लिए खोल दिया जाता है। यहां सैकड़ों पर्यटक आते हैं। पर रात में यहां आने की मनाही है। पर इस गांव में एक मंदिर है जो आज भी श्राप से मुक्त है। एक बावड़ी भी है जहां से लोग तब पानी लिया करते थे। कहा जाता है कि शाम ढलने के बाद अक्सर यहां कुछ आवाजें सुनाई देती हैं। लोग मानते हैं कि वो आवाजें दो सौ साल पहले के पालीवाल ब्राह्मणों का रुदन है। यह भी कहा जाता है कि गांव के कुछ मकान हैं, जहां रहस्यमय परछाई अक्सर नजरों के सामने आ जाती है।

कैसे पहुंचे - जैसलमेर शहर से कुलधरा की दूरी 18 किलोमीटर है। अब कुलधरा को सैलानियों के लिए विकसित किया जा रहा है। सैलानियों से 10 रुपये प्रति व्यक्ति प्रवेश टिकट लिया जाता है। वहीं प्रति वाहन 50 रुपये प्रवेश टिकट है। 

कुलधरा में एक घर को दोबारा निर्मित किया गया है जिससे आप अतीत में गुलजार रहे इस गांव को महसूस कर सकें। यहां पहुंचने वाले लोग इस घर के साथ खूब तस्वीरें खिंचवाते हैं। पर शाम ढलने से पहले यहां से निकल जाना पड़ता है। कुलधरा में रात में प्रवेश की बिल्कुल इजाजत नहीं है।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य
KULDHARA, JAISALMER, RAJSTHAN, HAUNTED VILLAGE, PALIWAL BRAHMAN )