Wednesday, January 18, 2017

एक बार फिर हैदराबादी शादी में- शुभ लगन आया है...


अरुणाचल असम और मेघालय की यात्रा से लौटने के तुरंत बाद हमें हैदराबाद जाना पड़ा। हुआ यूं कि रत्नाराव जी के तीसरे बेटे की शादी तय हो गई है। हम दो बेटों की शादी में गए तो तीसरे की शादी में कैसे नहीं जाते। 20 अक्तूबर 2016 को शादी और 21 अक्तूबर को स्वागत समारोह। मुझे तुरंत दफ्तर से छुट्टी मिलने में दिक्कत थी। तो कार्यक्रम में थोड़ा बदलाव किया। अनादि और माधवी शादी में शामिल होने के लिए हैदराबाद 19 अक्तूबर को ही फ्लाइट से चले गए। उनकी अकेले ये पहली विमान यात्रा थी। पर वे लोग हैदराबाद के नवनिर्मित एयरपोर्ट से उतरकर कैब बुक करके वनस्थलीपुरम पहुंच गए। 

साल 2016 में ही मार्च में मझले भाई बालगंगा धर की शादी हुई थी तब मैं अकेला ही गया था। पर इस शादी में हम सबके आने का आग्रह था। तो माधवी और अनादि शादी में शामिल हुए। बारात हैदराबाद शहर में ही जानी थी। मैं 21 अक्तूबर की सुबह स्पाइस जेट की फ्लाईट से हैदराबाद पहुंचा। मेरे बगल वाली सीट पर स्पाइस जेट की एक एयर होस्टेस सफर कर रही हैं। उनकी ड्यूटी हैदराबाद से लगेगी। सुबह की सुनहली धूप के बीच विमान हैदराबाद के नए नवेले एयरपोर्ट पर लैंड कर गया। मैं यहां पहली बार उतरा हूं। पर विमान एयरब्रिज से जाकर नहीं लगा। हमें बस में बिठाकर विमानतल तक पहुंचाया गया। 

एयरपोर्ट के लाउंज में तेलंगाना टूरिज्म का विज्ञापन लगा है। यहां से एलबी नगर चौराहा तक जाने के लिए मैंने एयरपोर्ट बस की सेवा ली। अकेले सफर के लिए यही किफायती है। क्योंकि हैदराबाद का ये नया एयरपोर्ट शहर से 50 किलोमीटर बाहर बना है। तो आपको आने या जाने के लिए एयरपोर्ट बस सेवा या टैक्सी का ही सहारा लेना पड़ेगा। 

मैं एक बार फिर वनस्थलीपुरम पहुंच चुका हूं। शादी के बाद दुल्हन घर आ चुकी है। शाम को होने वाले स्वागत समारोह की तैयारी चल रही है। उसी पनामा गार्डेन में आयोजन हो रहा जहां 2012 में नवीन की शादी का स्वागत समारोह हुआ था। इस बार के भोजन के मीनू में कई राजस्थानी व्यंजन शामिल किए गए हैं। दही और जलेबी का स्वाद एक बार फिर बरकरार है। तो एक बार फिर समारोह में खूब आनंद आया। रत्नाराव अंकल जी के सारे रिश्तेदार हमारे परिचित हो चुके हैं। उनसे पिछली शादियों में भी मुलाकाते हुईं थीं। 

तो इन सबके बीच में अपनेपन का एक रिश्ता लगता है। इस बार भी ईटीवी के अपने पुराने साथी अनिल पांडे जी और उनके परिवार से मिलना हुआ। वे पूरे हैदराबादी हो गए हैं। उन्होंने अब यहीं पर फ्लैट भी बुक कर लिया है। कई और पुराने साथी ईटीवी में आ गए हैं।

यह संयोग है कि रत्नाराव अंकल के तीनों बेटों की शादी में हमें शामिल होने का मौका मिला है। समय पंख लगाकर उड़ता जाता है। 2007 में अनादि के साथ खेलने वाली नन्ही सी काव्या अब बड़ी हो गई है। इतनी की उसने इस शादी में हाफ साड़ी पहनी है। सब कुछ समय के साथ बदलता है। हम बच्चे से बड़े होते जाते हैं।
इस शादी समारोह के दौरान पुराने साथी देव कुमार पुखराज, अनिल पांडे और नीतू पांडे से मुलाकात हुई। पुराने दोस्तों से मिलना काफी सुखकर लगता है। ये यादें ही तो हैं तो आपकी जिंदगी की धरोहर हैं। छोटी छोटी खुशियां हैं जो आपकी यादों की झोली में जुड़ती चली जाती हैं। वरना जिंदगी में मुश्किलें भी तो कुछ कम नहीं हैं। 


पर अब शादी के बाद हमारी वापसी की बारी है। हमलोग आए थे विमान से पर वापसी की यात्रा एक बार फिर ट्रेन से होगी। सफर की शुरुआत हुई सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन से। तेलंगाना के बाद आंध्र प्रदेश फिर महाराष्ट्र। महाराष्ट्र में जब नागपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रुकी तो हमलोग प्लेटफार्म पर उतर कर थोड़ी चहलकदमी भी कर आए। हालांकि अभी तक मैं अनगिनत बार नागपुर होकर गुजरा हूं पर नागपुर में उतर कर शहर को घूमने का मौका नहीं मिला है। 

- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( HYDRABAD, TELANGANA, NAGPUR, TRAIN, DELHI RETURN )  











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