Sunday, January 15, 2017

शिलांग से वापसी का सफर - एक बार फिर गुवाहाटी में

शिलांग में दूसरे दिन गैरोटो चेपल चर्च, लेडी हैदरी पार्क और एयरफोर्स म्युजिम देख लेने के बाद अनादि और माधवी को भूख लग गई थी। सुबह का नास्ता तो हमने होटल के पास पूरी सब्जी वाले के पास कर लिया था। नेपाली भाई के होटल में पूरी सब्जी के साथ उनकी खीर कदम मिठाई अनादि को खूब पसंद आई। निपको दफ्तर के सामने इस नास्ता घर के बारे में हमें टैक्सी वाले भाई वांकी ने बताया था।
अब दोपहर के खाने के लिए हमलोग मारवाड़ी बासा पहुंचे। पुलिस बाजार का मारवाड़ी बासा  सस्ते आवास और शाकाहारी भोजन के लिए जाना जाता है। पर दोपहर में बासा वाले ने बोला कि आपको एक घंटे इंतजार करना होगा। साथ ही यह भी बताया कि थाली नहीं है। फिर यहां अलग अलग खाना महंगा था। हमने मारवाड़ी बासा की काफी तारीफ सुनी थी पर उनका व्यवहार काफी रुखा लगा। यहीं हमारी मुलाकात मुंबई से आए दो युवकों से हुई जो अपने लिए कमरा ढूंढ रहे थे, पर मारवाड़ी बासा वाले ने उनसे भी बड़ी बेरूखी से बात की।



फिर क्या हमलोग आगे बढ़े। बगल में एक बंगाली होटल नजर आया। यहां 40 रुपये की चावल की थाली है। हमें यहां का भी खाना अच्छा लगा। पर माधवी और वंश को संतुष्टि नहीं मिली। तो हम उन्हें दिल्ली मिष्टान भंडार ले गए। वहां पर मिठाइयां, रस मलाई, छोला भठूरा आदि खाकर वे लोग तृप्त हो गए। कई दशक से दिल्ली मिष्टान भंडार अपने स्वाद के लिए शिलांग में सर्वाधिक लोकप्रिय है।  खाने के बाद पुलिस बाजार की सड़क पर घूमते हुए असम इंपोरियम नजर आया। यहां सेल लगी थी। तो औने पौने दाम में पूर्वोत्तर के  बने कई हस्तशिल्प उत्पाद हमने खरीद डाले। झोला, वेस्ट पाउच,  मफलर, सलवार सूट आदि आदि।


गुवाहाटी के लिए वापसी - दोपहर के भोजन के बाद पुलिस बाजार में स्थित टैक्सी स्टैंड से ही वांकी भाई ने हमें गुवाहाटी की टैक्सी में बिठा दिया।  यह टैक्सी स्टैंड पुलिस बाजार चौराहे के पास ही होटल शेफायर और लिटल चायना के पास है। यहां टैक्सी तुरंत भर जाती है। जबकि सिविल हास्पीटल के पास के टैक्सी वाले एक घंटे तक चौराहे पर चक्कर लगाकर सवारी ढूंढते रहते हैं। दोपहर के बाद हमलोगों ने शिलांग शहर और वांकी भाई को अलविदा कहा।


शाम को टैक्सी नूंगपो में एक शानदार हाईवे ढाबे में रूकी। यहां शाकाहारी मांसाहारी खाने काे तमाम विकल्प थे। पर हमें कुछ खाने की इच्छा नहीं थी।  अनादि यहां देर तक झूला झूलते रहे। शाम के सात बजने तक हमलोग गुवाहाटी के पलटन बाजार में पहुंच चुके थे। इस बार हमारा ठिकाना बना होटल गीतांजलि।   रेलवे स्टेशन के पास यह एक मध्यमवर्गीय होटल है।


शाम को मैं अनादि और माधवी को खाने के लिए तिरुमाला ढाबा में ले गया जहां मैं पहले भी कई बार खाने जा चुका हूं। खाने के बाद हमलोग पलटन में बाजार में पूर्वोत्तर की कुछ निशानियां खरीदने में जुट गए। सबसे पहले जाफी खरीदी और बांस और बेंत के बने कुछ और सजावटी सामान। पलटन बाजार रात 10 बजे तक खुला रहता है। अब पलटन बाजार में  स्ट्रीट शॉपिंग से लेकर मॉल में खरीददारी का आनंद लिया जा सकता है।


-विद्युत प्रकाश मौर्य-  vidyutp@gmail.com 
(SHILLONG, NUNGPO, PALTAN BAZAR, GUWAHATI) 

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