Friday, January 20, 2017

सन 42 की क्रांति और पटना के वे सात शहीद

स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में युवाओं के जोश को जब-जब याद किया जाएगा तब-तब पटना के उन सात शहीदों के बिना चर्चा अधूरी रहेगी। ये सातों स्कूली छात्र थे, जो गांधी जी के करो या मरो के ऐलान के बाद 11 अगस्त 1942 को पटना में सचिवालय पर तिरंगा फहराने निकले थे। भले ही वे सचिवालय तक नहीं पहुंच सके, पर उनका जोश और जज्बा गजब का था। पर ब्रिटिश फौज की गोलियों ने उनकी सीना छलनी कर दिया।  

ये सभी नौजवान स्कूली छात्र थे। सबकी उम्र 18 से 20 साल के आसपास थी। पर मुंबई में बापू के अंग्रेजों भारत छोड़ो के आह्वान के बाद उनके खून में उबाल आ गया। वे तिरंगा लेकर निकल पड़े पटना की सड़कों पर। लक्ष्य था सचिवालय पर यूनियन जैक को उतार कर तिरंगा लहरा देना। हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। सीने में कई गोलियां लगी और वे गिरते चले गए। पर गिरने के साथ भारत माता की जय का उदघोष करते रहे। पटना में बिहार सरकार के पुराना सचिवालय के सामने गोलंबर (राउंड अबाउट) के बीच में इन सात शहीदों की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है। 1979 में छुटपन में पिताजी के साथ पटना गया तब पहली बार पिताजी ने ये शहीद स्मारक दिखाया था।

ये प्रतिमाएं इस तरह से लगी हैं मानो लगता है कि वे अभी भी उठ पड़ेंगे और जाकर तिरंगा लहरा देंगे। हालांकि ये 1942 के ये सातो शहीद पांच साल देश को मिली आजादी की सुबह नहीं देख सके। पर उनके जैसे तमाम शहीदों के कारण ही हम आजाद हवा में सांस लेने के काबिल हो सके। इस शहीद स्मारक में उन सात लीडरों की आदमकद प्रतिमाएं हैं जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में अपने प्राण दिए थे। वास्तव में यह स्मारक उन निडर नायकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता दिखाने के लिए बनाया गया है।

बिहार के पहले राज्यपाल जयरामदास दौलतराम ने 15 अगस्त 1947 को इस स्मारक की नींव रखी थी। सन 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन के समय विधान सभा भवन के ऊपर भारतीय तिरंगा फहराने के प्रयास में शहीद हुए पटना के इन शहीदों को याद रखने के लिए शहीद स्मारक बिहार विधान सभा के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने बना गया है।  पटना के स्कूलों से आजादी की लड़ाई में जान देने वाले सात शहीदों के प्रति यह एक विनम्र श्रद्धांजलि है।

देवी प्रसाद रायचौधरी ने बनाई थी ये मूर्तियां -  प्रख्यात मूर्तिकार देवी प्रसाद रायचौधरी द्वारा इन भव्य आदमकद मूर्तियों को इटली में बनाकर यहां लगाया गया था। राय चौधरी का जन्म रंगपुर ( अब बांग्लादेश ) में हुआ था। मूर्तिकला में उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें 1958 में पद्म  भूषण ने नवाजा गया। देश भर में उनके द्वारा सृजित कई मूर्तियों में से पटना का शहीद स्मारक भी एक है। इन मूर्तियों का औपचारिक अनावरण देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद द्वारा 1956 में हुआ। भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान बिहार में 134 लोग शहीद हुए थे। जबकि कुल 15 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई थीं।

कौन थे ये थे सात शहीद
11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय में ये स्कूली छात्र तिरंगा फहराने का इरादा लेकर पहुंचे थे।  इन सात शहीदों के नाम उमाकांत प्रसाद सिंह, रामानंद सिंह, सतीश प्रसाद झा, जगतपति कुमार, देवीपद चौधरी, राजेंद्र सिंह और रामगोविंद सिंह था। 

1. उमाकांत प्रसाद सिंह – राम मोहन राय सेमिनरी में नौंवी कक्षा के छात्र थे। वे नरेंद्रपुर जिला - सारण के रहने वाले थे।

2. रामानंद सिंह - राम मोहन राय सेमिनरी में नौंवी कक्षा के छात्र थे। वे शहादत नगर पटना के निवासी थे।  

3. सतीश प्रसाद झा – पटना कॉलेजियट स्कूल में कक्षा दस के छात्र थे। वे ग्राम खडहरा, जिला भागलपुर के रहने वाले थे।

4.जगतपति कुमार – बीएन कॉलेज ( बिहार नेशनल कॉलेज ) के सेकेंड इयर के छात्र थे। वे खराती जिला औरंगाबाद के रहने वाले थे।

5. देवीपद चौधरी -  देवी मिलर हाई स्कूल पटना में नौंवी कक्षा के छात्र थे। वे सिलहट, जमालपुर (मुंगेर) के रहने वाले थे।

6.राजेंद्र सिंह – राजेंद्र पटना इंगलिश हाई स्कूल में दसवीं कक्षा के छात्र थे। वे गांव बनवारी चक, जिला सारण के रहने वाले थे।

7. रामगोविंद सिंह – राम गोविंद पुनपुन हाईस्कूल में नौंवी कक्षा के छात्र थे। वे पटना जिले के दसरथ गांव के रहने वाले थे।

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(PATNA, SHAHEED SMARAK, 1942, BHARAT CHODO )


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