Monday, November 21, 2016

चमत्कारी होता है रुद्राक्ष का पौधा - शिव को है प्रिय

तो ये है रुद्राक्ष ..एक मुख,पंच मुखी या फिर माला बनवाएं...

हरे हरे रुद्राक्ष की  दुकान -   कामाख्या मंदिर के मुख्य द्वार से बाहर निकलकर  थोड़ा आगे चलने पर हमें एक रुद्राक्ष की दुकान दिखाई दे गई। फुटपाथ पर बैठे एक दुकानदार महोदय ने ढेर सारे हरे हरे रुद्राक्ष रखे हुए थे। आपके समाने इसको छीलकर उसके अंदर से रुद्राक्ष निकाल तक दिखा रहे थे।

कितने मुख का निकल आए ये आपकी किस्मत। ताजे रुद्राक्ष बेच रहे थे 10 रुपये में एक। मुझे तुरंत एक रुद्राक्ष छीलकर दिखाया, यह पंचमुखी निकल आया।  दरअसल  रुद्राक्ष में कई मुख होते हैं। इनमें एकमुखी को काफी प्रभावी माना जाता है। यह  आसानी से प्राप्त नहीं होता । कहा जाता है जिसे मिल जाए वह धन्य हो जाता है।


कामाख्या  मंदिर  में रुद्राक्ष को देखकर मुझे अपने  पहले संपादक माधव कांत मिश्र की याद आई। इन दिनों वे आध्यात्मिक गुरु  बनने के बाद रुद्राक्ष आंदोलन चला रहे हैं। वे लोगों को रुद्राक्ष लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही रुद्राक्ष के पौधे वितरित भी करते हैं। दरअसल सनातन धर्म में रुद्राक्ष का बड़ा महत्व है।  कहा जाता है कि रुद्राक्ष प्रकृति की ओर से दिया गया ऐसा फल है जिससे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।



माना जाता है कि रुद्राक्ष  भगवान शिव के आंसुओं से बना है। इसलिए शिव को रुद्राक्ष  बहुत प्रिय है।  लोग रुद्राक्ष की माला से पूजा पाठ करते हैं। रुद्राक्ष एक मुखी  से लेकर 14 मुखी तक पाए जाते हैं।  विज्ञान ने भी रुद्राक्ष के महत्व को माना है। यह ह्रदय रोग दूर करने में लाभकारी होता है। उत्तराखंड के ऋषिकेश में भी रुद्राक्ष की  खूब दुकाने हैं।  पर आप चाहें तो रुद्राक्ष का पौधा अपने घर में भी लगा सकते हैं। 


मां कामाख्या मंदिर के  परिसर  में आपको कई तरह के रंग दिखाई देेते हैं।  यहां संगीत मंडलियां भी दिखाई देती हैं जो अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों से अपनी आस्था प्रकट करती हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो विशाल शेर नजर आते हैं।  मां दुर्गा की सवारी शेर हैं। इन शेरों के देखकर नन्हें अनादि खूब खुश होते हैं। अब इस शेर को अपने साथ नहीं ले जा सकते तो उसके साथ एक फोटो ही सही। 


अब हमलोग  आगे की ओर बढ़ रहे हैं।  पर उससे पहले थोड़ी खरीददारी भी हो जाए।   कामाख्या मंदिर के पास गली में सजे रंग बिरंगे बाजार से माधवी ने मणिपुरी आर्टिफिशियल ज्वेलरी खरीदी तो अनादि ने भी अपने लिए कुछ खिलौने खरीदे। हालांकि ये चायनीज खिलौने दिल्ली में और सस्ते मिलते हैं, पर कुछ यादगारी लेकर तो जाना ही है ना...  


 मंदिर के प्रवेश द्वार से पहले  पुलिस थाना और पर्यटकों की सहायता के लिए दफ्तर भी बना हुआ है। थोड़ा आगे चलने पर हमने देखा कि कामाख्या  मंदिर के आगे एक व्यू प्वाइंट भी है। यहां से गुवाहाटी शहर का सुंदर नजारा दिखाई देता है।   पैदल और टैक्सी से आने जाने वाले लोग यहां पर रुक जाते हैं। यहां से शहर और आसपास का नजारा लेते हैं।   दोपहरी में यहां खूब रौनक है।  वापस जाने के लिए हमें शेयरिंग टैक्सी मिल गई  जो हमें नीचे के प्रवेश द्वार तक छोड़ देगी।   तो चलें वापस। जय मां कामाख्या।



यह भी पढ़िए ...तंत्र साधना के लिए विख्यात है कामाख्या 

नील पर्वत वासिनी मां कामाख्या देवी 

-         विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyutp@gmail.com 
( ASSAM, MAA KAMAKHYA TEMPLE, GUWAHATI, RUDRAKSH VIEW POINT) 





  

3 comments:

  1. घर बैठे कामाख्या के रुद्राक्ष भी दिखा दिये और सिंह द्वार के सिंहों से भी मिला दिया 👌 एक आध माता के फ़ोटो भी लगा देते सर!

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    1. आंतरिक फोटोग्राफी वर्जित है।

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    2. आप इसके पीछे के आलेख में मंदिर पर और भी लेख पढ़ सकती हैं।

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