Wednesday, November 23, 2016

ब्रह्मपुत्र का किनारा और फैंसी बाजार की रौनक


नील पर्वत से मां कामाख्या के दर्शन करके लौटते वक्त हमलोग फैंसी बाजार जाने वाली बस में चढ़े।   
हमारी बस ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बने सड़क से होकर गुजर रही है। इस विशाल नदी को देखकर हमें मुंबई का मरीन ड्राईव याद आ रहा है। यह नदी के किनारे बनी सड़क मरीन ड्राईव जैसी ही लग रही है।

ब्रह्मपुत्र में कुछ स्टीमर और मोटर लांज दिखाई दे रहे हैं। सड़क और नदी के तट के बीच में हरा भरा पार्क बना हुआ है। पार्क में लोग टहलते हुए नजर आ रहे हैं। दोपहर में इतनी रौनक है तो शाम यहां काफी सुहानी होती होगी। नदी के किनारे झालमुड़ी बेचने वाले भी घूम रहे हैं। दरअसल ये गुवाहाटी  में  टाइमपास करने वालों  के लिए लोकप्रिय जगह है। 

नदी के तट पर कुछ प्रतिमाएं लगी हैं। यहां से बैठकर दूर तक बहते विशाल नद ब्रह्मपुत्र को निहारना बड़ा सुखकर अनुभव हो सकता है। यहां शाम को कुछ जहाज चलते हैं जो आपको ब्रह्मपुत्र की सैर कराते हैं। आप लंच क्रूज में सवार होकर ब्रह्मपुत्र की सैर के साथ खाने पीने का मजा ले सकते हैं। गुवाहाटी के इस रिवर फ्रंट की सुंदरता में और इजाफा हो सकता है अगर साफ सफाई पर थोड़ा और ध्यान दिया जाए।




नहीं जा सके उमा नंदा मंदिर - वैसे तो हमारी इच्छा उमा नंदा मंदिर जाने की है जो ब्रह्मपुत्र के बीच में बने पीकॉक द्वीप पर स्थित है। लोगों ने बताया कि फैंसी बाजार के पास ही शुक्लेश्वर घाट से उमा नंदा के लिए बोट जाती है। पर समय के अभाव के कारण हम वहां नहीं जा सके।  तो उमा नंदा मंदिर अगली बार की यात्रा में सही।
गुवाहाटी -- ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे किनारे...

फैंसी बाजार के बस स्टाप पर बस से उतरकर थोड़ी देर ब्रह्मपुत्र के दर्शन के बाद हमलोग फैंसी बाजार की गलियों में घुस गए। दोनों तरफ असंख्य रेडीमेड कपड़ों की दुकानें और लोगों की भीड़। हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी। गुवाहाटी का ये फैंसी बाजार दिल्ली के चांदनी चौक या मुंबई के फैशन स्ट्रीट से मुकाबला करता हुआ नजर आता है। 
बाजार में सुबह से लेकर शाम तक खरीददारों की भीड़ लगी है। आवाजें लगाकर बेचते दुकानदार और मोल जोल करते ग्राहक। आधा किलोमीटर इस बाजार में चलने के बाद में हमें फैंसी बाजार का गुरुद्वारा नजर आता है। यहां से हम दाहिनी तरफ मुड़ जाते हैं। आप गुवाहाटी से कुछ असम की निशानी ले जाना चाहते हैं तो फैंसी बाजार से खरीददारी कर सकते हैं।


पर दोपहरी गहरा गई है। इसलिए अब भोजन करने की इच्छा है। मंदिर परिसर में हमें गुवाहाटी के एक मारवाड़ी भाई मिले थे। उनसे हमने गुवाहाटी  के शाकाहारी भोजनालयों के बारे में पूछा था। ज्यादातर मारवाड़ी लोग शाकाहारी होते हैं इसलिए उन्हें इसके बारे में ज्यादा पता होता है।   उन्होंने हमें फैंसी बाजार में तीन शाकाहारी भोजनालयों के बारे में बताया था।   पहला जयश्री की रसोई, दूसरा गोपाल महाराज (गल्ला पट्टी में) और तीसरा जेबीएस घाट के किनारे। 


हम इन तीनों में से कहीं एक जगह जा सकते थे इसलिए फैंसी बाजार इलाके में जय श्री की रसोई में ही जाना तय किया।   हम तो तलाश कर रहे हैं जयश्री की रसोई।   एचबी रोड पर   मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय वाले भवन में गली में अंदर जाकर पहली मंजिल पर है जयश्री की रसोई। यह शाकाहारी वातानुकूलित भोजनालय है। पर यह मारवाड़ी बासा नहीं है। बैठने के लिए टेबल और कुरसियां लगी हैं। अंदर का डेकोरेशन तो अच्छा है। 
गुवाहाटी फैंसी बाजार, जयश्री की रसोई में भोजन का इंतजार। 


पर नवरात्र के कारम मेनू बदला हुआ है। हमने अपनी पसंद के अनुरूप आर्डर कर दिया। उन्होंने बताया आधा घंटा से ज्यादा वक्त लगेगा। हमें भी जल्दी कहां थी। खाना माधवी और वंश को सुस्वादु लगा, मुझे कुछ खास पसंद नहीं आया। यहां पर खाने पीने के दरें ऊंची हैं उस हिसाब से इस भोजनालय के वेटर भी पढ़े लिखे नहीं हैं। खाने के बाद हमलोग एक बार फिर फैंसी बाजार की सड़क पर थे।  बाजार में कुछ हरी भरी सब्जियां नजर आईं। कुछ ऐसी जो हमने दिल्ली में कभी नहीं देखीं।


हमलोग वहां से फिर फैंसी बाजार घूमते हुए बस लेकर पलटन बाजार पहुंच गए। माधवी और वंश होटल मेंआराम करना चाहते थे। कुछ घंटे बाद शाम को वे लोग बाजार में घूमने निकल गए। मैं गुवाहाटी चौथी बार आया हूं। इस बार पूर्वोत्तर के वरिष्ठ हिंदी पत्रकार श्री रविशंकर रवि जी से मिलने की इच्छा है। मैं उनके लेख और रिपोर्ट स्कूली जीवन से पढ़ता आ रहा हूं। वे दैनिक पूर्वोदय के संपादक हैं। नवरात्र के मौके पर अष्टमी और नवमी को गुवाहाटी के सारे अखबार बंद हैं। 
इसलिए उन्होंने जीएस रोड के  नंदन होटल में बुलाया है। फोन पर और फेसबुक पर संपर्क के बाद रवि जी से कुछ देर की मुलाकात यादगार बन जाती है। छोटी सी मुलाकात में वे मेरा पूर्वोत्तर को लेकर ज्ञान काफी बढ़ाते हैं। आप सब कुछ पढ़कर ही नहीं सीखते हैं, काफी ज्ञान विद्वानों संग से चर्चा से ही मिलता है।  
विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com

( GUWAHATI, BRAHAMPUTRA RIVER, FANCY BAZAR,  JAISREE KI RASOI, RAVI SHANKAR RAVI, NANDAN HOTEL ) 

  

2 comments:

  1. Vidyut bhai, Guwahati maine bhi dekha hua hai or ap ki kalam se yaade taza ho gayi. Aap Brahhmputra k tat se Fancy bazaar gaye or hum fancy bazaar se, Tat ki or bus pakdne. Or mujhe b chandani Chowk se Red Fort ki taraf aane vala nazara hi laga bus us se thodi si bheed kam.

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  2. धन्यवाद, बेहतरीन प्रतिक्रिया के लिए अपना परिचय भी देते और अच्छा लगता..

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