Wednesday, October 5, 2016

मिलेनियम पार्क, बिनय बादल दिनेश बाग और धर्मतल्ला


मिलेनियम जेटी से  बाहर निकलकर कोलकाता शहर में पैदल ही आगे चल पड़ा हूं। यहां पर बोट जेटि से सफर की लोकप्रियता कुछ इस तरह है कि इसमें चढ़ने के लिए पहले से ही लोगों की लाइन लगी हुई है।  देखते ही देखते   हावड़ा स्टेशन जाने के लिए बोट हाउसफुल हो गई है।  और  मैं आनंददायक बोट के सफर को याद करते हुए आगे बढ़ चला हूं।

मेरी नजरों के सामने हुगली नदी का विशाल विस्तार दिखाई दे रहा है। इसमें कुछ नौजवान लोग  स्नान करके लिए डुबकी लगा रहे हैं तो कुछ लोग किनारे पर खड़े हैं।  कोलकाता वासियों  का हुगली में स्नान करना प्रिय शगल है। वे लोग तो इसे गंगा नदी ही कहते हैं। 


हुगली के  किनारे विशाल इमारतें नजर आ रही हैं।  एक इमारत के ऊपर गोल फुटबाल जैसी आकृति बनी हुई नजर आ रही है।   ये विशाल इमारतें कोलकाता को   विशाल महानगर  के रूप में   आलोकित करती  प्रतीत होती हैं। हों भी क्यों नहीं। 1911 से पहले कोलकाता देश की राजधानी हुआ करता था। 


हुगली नदी को छोड़कर आगे बढ़ते ही मिलेनियम पार्क नजर आता है। यह एक विशाल पार्क है।  यह  पार्क 2.5 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है।  इसमें प्रवेश के लिए टिकट है। यह कोलकाता के व्यस्त इलाके में विशाल हरा भरा पार्क है।  स्थानीय लोगों  के बीच ये पार्क काफी लोकप्रिय है।
 

मिलेनियम पार्क से आगे बढ़ते ही बिनय बादल दिनेश बाग रेलवे स्टेशन नजर आता है। दरअसल यह कोलकाता के लोकल  रेलवे नेटवर्क का छोटा सा स्टेशन है। पर यहां पर दिन भर में कुछ गिनी चुनी रेलगाड़ियां ही आती हैं।  आप चाहें तो लोकल ट्रेन से इस स्टेशन पर उतर कर हावड़ा जाने के  लिए फेरी सेवा  ले सकते हैं।  

स्वतंत्रता आंदोलन के तीन महान क्रांतिकारियों की याद में इस रेलवे  स्टेशन  का नामकरण किया गया है।   पश्चिम बंगाल के कोलकाता में द राइटर्स बिल्डिंग में 8 दिसंबर, 1930 को तीन क्रन्तिकारी बिनोय, बादल व दिनेश ने ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला बोल दिया था।  दो  को अंग्रेज जिंदा पकड़ नहीं पाए।  वहीं दिनेश को  कुछ दिनों बाद फांसी हो गई। साफ सुथरा रेलवे स्टेशन सूना-सूना  नजर आ रहा है। दरअसल यह कोलकाता के  सरकुलर  रेलवे का हिस्सा है।  


पहले यह कोलकाता पोर्ट कमिश्नर रेलवे का हिस्सा हुआ करता था।  यह रेलवे लाइन हुगली नदी के किनारे-किनारे चलती थी।  इसका विस्तार चितपुर से खिदिरपुर तक था। बीबीडी बाग रेलवे  स्टेशन से आगे निकलकर मैं पैदल ही  धर्मतल्ला की ओर बढ़ चला हूं।  

मैं स्ट्रैंड रोड पर चलता जा रहा हूं।
  यह कोलकाता की सबसे पुरानी सड़कों  में से एक है। रास्ते में कोलकाता शहर की पुरानी इमारतें  नजर आ रही हैं। इनमें कई इमारतें  ब्रिटिश कालीन हैं। कुछ इमारतें सौ  साल से ज्यादा पुरानी हैं। कुछ खतरनाक घोषित हो गई हैं तो कुछ अभी भी बुलंद हैं।   इन इमारतों से संवाद करते हुए मैं  एमजी रोड के करीब पहुंच गया हूं।
 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( KOLKATA, BENGAL, BIPIN BADAL DINESH BAG, DHRAMTALLA) 


 

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