Sunday, October 16, 2016

सुबह के सूरज के देस में - दिल्ली से इटानगर रेल से

अरुणाचल प्रदेश यानी उगते हुए सूरज का देस। वह देस जहां सूरज सबसे पहले आकर अपना डेरा डालता है। जी हां यहां दिलली से आधा घंटा पहले ही सुबह हो जाती है। कई साल से अरुणाचल जाने की हसरत थी। जो अब जाकर पूरी होने को आई है। पूर्वोत्तर का यह विशाल राज्य अब रेल नेटवर्क से जुड़ चुका है। अब दिल्ली से अरुणाचल की राजधानी के लिए दिल्ली नहारलागून एसी  एक्सप्रेस चलने लगी है। यह हफ्ते में एक ही दिन चलती है। इसका तारीख मुझे मुफीद नहीं बैठ रहा था इसलिए हमारी अरुणाचल यात्रा शुरू हुई देश की राजधानी से  नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस से।

 वैसे तो नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस से कई बार  सफर कर चुका हूं, पर गुवाहाटी तक इस ट्रेन से जाने का पहला मौका था . हमारी ट्रेन आनंद विहार से बिल्कुल समय पर चल पड़ी. हांलाकि हमारी पिछली यात्राओं का अनुभव अच्छा नहीं था.  एक बार पटना तक जाते वक्त तो यह 14 घंटे लेट खुली थी और कानपुर पहुंचते हुए 24 घंटे लेट हो गई थी। इस बार कानपुर, इलाहाबाद, मुगलसराय तक एक से डेढ़ घंटे लेट चल रही है। दानापुर ढाई घंटे लेट पहुंची. रात 12 बजे हमलोग पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर थे. यह पटना का नया स्टेशन है। थोड़ी देर बाद  हमारी रेल दीघा में बने नए रेल पुल से गुजर रही थी। यह हमारे लिए  गर्व का क्षण थाक्योंकि हम पटना में गंगा  को नए रेल पुल से पार कर रहे थे। 


अगस्त 2016 से नार्थ ईस्ट  इस नए मार्ग से चल रही है। तकरीबन दस मिनट बाद हम उत्तर बिहार में प्रवेश कर चुके थे। उत्तर बिहार का पहला रेलवे स्टेशन भरपुरा पहलेजा घाट जंक्शन आ गया। सारे यात्री सो रहे थे पर रेल से पुल के गुजरने के अनुभव से रूबरू होने के लिए  मैं  जाग रहा था। हांलाकि अभी पुल का एक ही ट्रैक चालू हो सका है। पर कई रेलें इस पुल से गुजरने लगी हैं। यह रेल कम रोड ब्रिज है पर रोड का पहुंच पथ तैयार नहीं हो सका है। हमारी ट्रेन सोनपुर और हाजीपुर में भी रूक गई है। हांलाकि यहां ठहराव नहीं है। इसके बाद मैं सो गया। एक बार नींद खुली तो बरौनी जंक्शन पर ट्रेन खड़ी थी।

हमारी अगली सुबह नवगछिया रेलवे स्टेशन पर होती है। ट्रैक के दोनों तरफ बाढ़ का असर अब भी दिखाई दे रहा है। पानी डूबी झोपड़ियां नजर आ रही हैं। एक महीने पहले यहीं पानी तांडव मचाया है । कटिहार स्टेशन पर हमलोग नास्ता लेते हैं। रेलवे प्लेटफार्म की दुकानों से पूरी और सब्जी। हमारी रेल तकरीबन 11 बजे रेल न्यू जलपाईगुड़ी पहुंची.  यहां हमने फूड प्लाजा से पुलाव लिया। यह माधवी और वंश को खूब पसंद आया.  रात पेंट्री से खाना लिया था। वह भी संतोषजनक था।  पेंट्री कार वालों ने नास्ते में समोसे बनाए वह भी अच्छे थे.  हालांकि अगले दिन के समोसे का स्वाद बदल गया था। एनजेपी से ट्रेन आगे बढ़ने के साथ ही रेल में अलग अलग तरह के सामान बेचने वाले आने लगे। एसी 3 में भी। हमने भी एक ट्रैवेल चार्जर खरीदा। नारियल पानी पीया तो चने भी खाए।

 हमारे आसपास ज्यादातर फौज के लोग हैं। इनमें से दो लोग असम के पहले बड़े स्टेशन कोकराझार में उतर गए। हमलोग सफर में उनसे घुलमिल गए थे इसलिए उन्हें अलविदा कहने  के लिए  नीचे प्लेटफार्म पर भी उतरे। उन्होंने  हमारे बेटे अनादि को  खूब दिल लगाकर पढ़ने को कहा। हालांंकि हमारा टिकट गुवाहाटी तक का है। पर ट्रेन कुछ घंटे की देरी से  चल रही है तकरीबन तीन घंटे। इसलिए हमलोगों ने रंगिया में उतरकर अरुणाचल के लिए  नहरा लागुन इंटर सिटी एक्सप्रेस पकड़ना तय किया। 


नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस का सफर तो ठीक रहा, पर कोच की मेनटेंनेंस घटिया है। एसी 3 के टायलेट का दरवाजा तक  खराब है। टायलेट के अंदर मकड़ी के जाले लगे हैं। हालांकि कोच महज एक साल पुराना है पर जाले देखकर लगता है कि इसकी नियमित सफाई तक नहीं  होती। कुछ ऐसा ही हाल पूर्वोत्तर जाने वाली सभी ट्रेनों का होता है।   इनकी रखरखाव में उपेक्षा नजर आती है।



खैर रंगिया जंक्शन स्टेशन की सफाई व्यवस्था ने हमें खुश कर दिया। प्रथम श्रेणी के लिए बने शानदार वेटिंग हॉल में बैठकर इंतजार करते हुए शाही एहसास हो रहा है। हमें इंतजार है नहार लागून इंटरसिटी एक्सप्रेस का।
 - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( RAIL, NORTH EAST EXPRESS, ARUNACHAL PRADESH, PATLIPUTRA JN, DIGHA BRIDGE , KATIHAR, KOKRAJHAR, RANGIA JN ) 



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