Friday, March 6, 2015

एक और नैरो गेज - नाडियाद- भादरण

देश में सबसे ज्यादा नैरो गेज रेलवे का नेटवर्क गुजरात में रहा है। बिलीमोरा वघई, कोसांबा उमरपदा, प्रताप नगर जंबुसर के अलावा एक और नेटवर्क संचालन में थी। गुजरात में नाडियाद से भादरण के बीच एक और नैरो गेज रेलवे नेटवर्क पर गाड़ियां दौड़ती थी। साल 2016 के रेल बजट में इस नेटवर्क को बंद करके ब्राडगेज में बदलने की बात कही गई। फिर 2018 में इस मार्ग को बड़ी लाइन में बदलने के लिए बंद कर दिया गया। नाडियाद से भादरण के बीच में कुल आठ रेलवे स्टेशन हुआ करते थे। नाडियाद अहमदाबाद से बड़ौदा के बीच का एक रेलवे स्टेशन है। रेल मार्ग पर ट्रेनों का संचालन बंद होने के बाद इसके कुछ कोच नाडियाद रेलवे स्टेशन पर लंबे समय तक खड़े रहे। 

इस मार्ग के रेलवे स्टेशन
नाडियाद जंक्शन ( ND)
पीज (7.6 किमी पर)
वासो (12.3 किमी पर)
देवा (17.9 किमी पर)
सोजित्रा ( 26 किमी पर)
विरोल ( 30.4 किमी पर)
पेटलाद जंक्शन ( 36.8 किमी पर)
बोचासान जंक्शन (50.8 किमी पर)
भादरण (BDRN) (58.2 किलोमीटर पर)

नाडियाद खेडा जिले का एक व्यापारिक शहर है। यह ब्राडगेज लाइन पर है। अहमदाबाद से नाडियाद की दूरी 45 किलोमीटर है। सभी पैसेंजर और कई एक्सप्रेस ट्रेनें यहां रुकती हैं। कहा जाता है कि इस शहर को संपेरा नृत्य करने वालों ने बसाया था। कभी इसका नाम नटपुर या नंदगाम हुआ करता था। यह गुजरात में साक्षर भूमि यानी पढ़े लिखे लोगों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। शहर के बीचों बीच झूलेलाल मंदिर स्थित है। साफ है कि शहर में सिंधी लोगों की अच्छी संख्या है।


एक जोड़ी ट्रेन हर रोज - सुबह 9.15 बजे चलने वाली नाडियाद भादरण पैसेंजर (ट्रेन नंबर 52037) दोपहर 12.25 बजे भादरण पहुंच जाती थी। यानी कुल 60 किलोमीटर के सफर के लिए 3 घंटे 10 मिनट का समय लेती थी। औसत देखें तो 20 किलोमीटर प्रति घंटा। ये स्पीड गुजरात के बाकी नैरोगेज ट्रेन से काफी अच्छा औसत माना जाएगा। पर दिन भर में एक ही ट्रेन चलती थी नाडियाद से भद्रण के बीच। यही ट्रेन उधर से 52038 नंबर बनकर वापस लौटती थी। यह भादरण से 14.10 बजे चलती थी और शाम को 17.25 बजे नाडियाद जंक्शन पहुंच जाती थी। दोनों स्टेशनों के बीच किराया 15 रुपये था। भादरण की बात करें तो यह आनंद जिले का छोटा सा कस्बा है। आमतौर पर तंबाकू खेती के लिए जाना जाता है।

वहीं शाम को 7.15 बजे नाडियाद से पेटलाद जंक्शन तक एक नैरो गेज ट्रेन (52039) चलती थी। यह रात में पेटलाद में ही रुक जाती थी। यही ट्रेन सुबह में 6.00 बजे 52040 नंबर से पेटलाद से नाडियाद के लिए चलती थी। बाद में यही ट्रेन 9.15 बजे भादरण के लिए सफर पर निकलती थी। नाडियाद से पेटलाड के बीच का सफर 37 किलोमीटर का था। पेटलाड में आनंद खंभात ब्राडगेज सेक्शन इस लाइन को क्रास करता है, इसलिए यह नैरोगेज और ब्राडगेज दोनों का स्टेशन है। वैसे पेटलादऔर भादरण के बीच कुल पांच स्टेशन हुआ करते थे। पर इनमें से चार स्टेशनों को बाद में बंद कर दिया गया। बंद किए गए स्टेशन हैं – विशरामपुरा, सुंदराना, धर्मज और झारोला। इन स्टेशनों पर कोई उतरता चढ़ता नहीं था, लिहाजा ये रेलवे के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहे थे। इस नैरो गेज रेल मार्ग पर पेटलाद और भादरण के बीच काफी कम लोग सफर करते हैं।

1913 में हुआ था रेलमार्ग का निर्माण -
नाडियाद – भादरण रेल मार्ग का निर्माण 1913 में किया गया था। यानी इस  रेलमार्ग पर 100 साल से ज्यादा समय तक सफर जारी रहा।  1913 में यह लाइन पीज से भादरण के बीच निर्मित की गई थी। पर 1953 में पीज और नाडियाद के बीच 4 किलोमीटर की लाइन का निर्माण कर इसे नाडियाद तक विस्तारित किया गया। इस लाइन का निर्माण बांबे बड़ौदा सेंट्रल रेलवे (बीबीसीआईआर) के तहत किया गया था।


बाकी नैरो गेज की तरह ही इसकी पटरियों की चौड़ाई दो फीट 6 इंच थी। नैरो गेज ट्रैक पर जेडीएम 5 सीरीज लोकोमोटिव चार डिब्बों को आराम से खींचता हुआ चलता था। ट्रेन में स्थानीय लोगों की ज्यादा भीड़ नहीं होती। कभी कभी भीड़ देखने को मिलती है। कभी कभी तेज बारिश होने पर नैरो गेज मार्ग पर चलने वाली इकलौती ट्रेन को रद्द भी करना पड़ता है। नाडियाद भादरण के बीच का रेलवे ट्रैक बहुत बुरे हाल में है। अभी भी लकड़ी के स्लीपर लगे हैं।

नैरो गेज का भादरण रेलवे स्टेशन उजाड़ सा नजर आता था। स्थानीय लोग इस रेल मार्ग को बापू ट्रेन कहते थे , क्योंकि यह आराम से चलती है। वहीं काफी लोग इसमें टिकट भी नहीं लेते थे । साल 2018 में इस नैरोगेज रेल मार्ग को बड़ी लाइन में बदलने के लिए हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।
- vidyutp@gmail.com

( NARROW GAUGE, RAIL, GUJRAT, NADIAD, BHADRAN, PETLAD JN, BBCIR ) 



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