Friday, June 24, 2016

चंबा शहर का दिल है ऐतिहासिक चौगान मैदान


चंपावती मंदिर के सामने विशाल हरा भरा मैदान है, जिसे चौगान कहते हैं। यह चंबा शहर का विशाल घास का मैदान है। मैदान के ठीक नीचे रावी नदी बहती हैजबकि मैदान के ऊपर शहर बसा है। आप यूं मान सकते हैं कि पूरा चंबा शहर चौगान के चारों तरफ बसा है। चौगान चंबा शहर का दिल है। लोग सुबह से शाम यहां टहलने और टाइम पास करने के लिए आते हैं। शाम को आप चौगान के किनारे बैठ कर रावी के निर्मल जल का संगीत सुन सकते हैं।

मलेशिया से मंगवाई गई थी घास - राजाओं ने बड़े ही चाव से इस चौगान मैदान को बनवाया था। इस मैदान में लगाए गए घास तब के राजाओं ने खास तौर पर मलेशिया से मंगवाया था। वहीं मैदान के चारों तरफ लगे बिजली के खंबे इंग्लैंड से मंगवाए गए थे। इस चौगान मैदान की सुंदरता लेकर चंबा में हिमाचली भाषा में बहुत से लोकगीत भी गाए जाते हैं। 
चंबा का ऐतिहासिक चौगान मैदान। 


किसी समय में चौगान एक विशाल मैदान था। पर बाद में इसे पांच हिस्सों में बांट दिया गया है। मुख्य मैदान के अलावा अब चार छोटे-छोटे मैदान हैं। छोटे मैदान में बांट देने से इसकी विशालता कम हो गई है। चौगान मैदान की कुल लंबाई लगभग एक किलोमीटर है। इसकी चौड़ाई 75 मीटर है। इसके एक तरफ समांतर बाजार की सड़क है तो दूसरी तरफ रावी दरिया। यह सब कुछ मिलकर बड़ा ही जीवंत नजारा पेश करते हैं। यहां आकर लगता है कि मानो जिंदगी ईस्टमैन कलर है। 

चौगान का मैदान सुबह से लेकर शाम तक वक्त गुजारने के लिए यादगार जगह है। यहां न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि सैलानी भी आकर बैठते हैं और घूमते हैं। स्थानीय लोग चौगान को अपनी शान समझते हैं। तो इसी चौगान के मैदान में हमारी मुलाकात एक बार फिर ममता शर्मा से हुई। वे कश्मीर में हमें मिलीं थीं। चंबा के पास के गांव की रहने वाली हैं। हमारे चंबा में होने की खबर सुनकर वे रुक गईं हमसे मिलने के लिए। हमने उनसे बात होने पर पहले ही बोल दिया था कि चौगान में मिलेंगे। 

यहां लगता है मिंजर मेला - चौगान मैदान में ही हर साल जुलाई में चंबा का प्रसिद्ध मिंजर मेला लगता है। यह चंबा  की लोक कलाओं को पेश करने वाला मेला है। मिंजर मेले के समय चंबा में दूर दूर से सैलानी पहुंचते हैं। सात दिनों तक चलने वाला ये मिंजर मेला देश के कला संस्कृति पर आधारित मेलों में प्रमुख स्थान रखता है। मेेले में कई तरह की प्रतियोगिताएं भी होती हैं। मिंजर मेला सावन महीने के दूसरे रविवार को शुरू होता है। मेला शुरू होने के समय लोगों को मिंजर बांटा जाता है। ये मिंजर क्या है। ये कपड़ों में पहना जाने वाला एक लटकन है।

हिमाचल संस्कृति के जाने माने लेखक सतीश धर के मुताबिक- चंबा के प्राचीन मिंजर मेले की शुरुआत कुंजड़ी गायन से होती है। गीत के बोल कुछ इस तरह होते हैं -  उड़-उड़ कूजडीये...वर्ष दे दिहायडे हो ...मेरे रामा जिन्देयाँ दे मेले हो .. इसके साथ ही ऐतिहासिक चौगान मैदान नाच उठता है l इस गीत को कहरवा ताल में गाया जाता है। मान्यता है कि कुंजड़ी केवल मिंजर के दिनों में ही सुननी चाहिए। 

तो मिंजर मेले के दौरान यहां सारे लोग मिंजर धारण किए हुए रंग बिरंगे नजर आते हैं। ये उल्लास का मेला होता है। काफी लोग बाहर से भी चंबा मिंजर मेले के समय में पहुंचते हैं। हमने स्कूल को दिनों में छोटी बहन ऋतंभरा की पत्र मित्र उषा मेहता दीपा से चंबा के चौगान मैदान के बारे में सुना था। वे चंबा के पास डुगली में एक स्कूल में शिक्षिका थीं। तो आज यहां आकर बड़ा अच्छा लग रहा है। 

चंबा का मिलेनियम गेट -  मंदिर के बगल में चौगान मैदान का लाल रंग का सुदंर प्रवेश द्वार है। चौगान मैदान में एक विशाल मिलेनियम गेट का भी निर्माण कराया गया है। चौगान का एक किनारा लंबाई में रावी नदी के साथ मिलता है। यहां दो झरोखे बनाए गए हैं, जहां बैठकर आप रावी नदी की कल-कल बहती जलधारा का मुआयना कर सकते  हैं। यहीं पर एक रावी कैफे भी है। चौगान के एक तरफ हिमाचल टूरिज्म का इरावती होटल स्थित है, जो चंबा शहर का प्रमुख होटल है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य   -vidyutp@gmail.com
(CHAMBA, CHAUGAN, MINJAR MELA, IRAVATI HOTEL) 
चंबा में चौगान मैदान के पास गांधी गेट। 


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