Thursday, June 16, 2016

पुखरी गांव की सैर - तीन किलोमीटर की ट्रैकिंग

पुखरी गांव की ओर...

दोपहर के बाद हमने पुखरी गांव जाने को तय किया। कई लोगों ने घोड़े से जाने की सलाह दी। पर तीन किलोमीटर का सफर हमने पैदल चलने को ही तय किया। कुछ लोगों से रास्ते की जानकारी ली और मैं और अनादि चल पड़े। होटल मिनी स्विस के रास्ते पर चल पड़े। रास्ते में स्कूल से आ रही नन्ही स्नेहा और उसके भाई मिले जो छुट्टी के बाद बस्ता संभाले अपने घर जा रहे थे। उन्होने पुखरी गांव का रास्ता बताया। 

होटल मिनी स्विस से थोड़ा आगे बढ़ने पर एक हनुमान जी की विशाल मूर्ति नजर आई। इसके आसपास कुछ नए आवासीय होटल बन गए हैं। यह एक मोटर चलने वाली सड़क है पर यहीं से एक पगडंडी ऊपर जंगलों में जाती है। यह रास्ता पुखरी गांव जा रहा है। इस पगडंडी पर हमलोग चल पड़े। रास्ते में कुछ बच्चे स्कूल से घर लौटते  हुए मिले। उनसे बातों में पता चला कि  वे पुखरी से रोज तीन किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक आते  हैं फिर उन्हें अपने स्कूल जाने वाली बस मिलती है। 


 रास्ते में कुछ पेड़ के ठूंठ नजर आए जो किसी बाघ या फिर किसी पक्षी के आकार में बन गए थे। निर्जन रास्ते पर हमारे अलावा कोई नहीं था और हम चले जा रहे थे। स्कूल से आते बच्चे भी काफी पीछे रह गए थे। वे आराम से चल रहे थे। थोड़ी दूर चलने पर एक मंदिर आया। हमने वहां सिर झुकाया और आगे बढ़ चले। 

ये कौन सा जानवर लगता है....
कोई ढाई किलोमीटर चलने के बाद पुखरी गांव हम पहुंच गए। यह गांव खजियार से भी ऊंचाई पर है। यानी 2000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर। गांव से रावी नदी बल खाती हुई नजर आती है तो चंबा शहर भी नजर आता है। मौसम साफ है तो हमें बर्फ से ढकी मणिमहेश पर्वत की चोटी भी नजर आई। 

गांव के लोगों ने कहा कि आप किस्मत वाले हैं कि आपको कैलाश के दर्शन हुए। ये हर रोज दिखाई नहीं देते। गांव कुल 10 से 15 घर हैं। गांव में एक दुकान है जहां बिस्कुट, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक आदि मिल जाती है। प्रिंट से 5 रुपये ज्यादा मांगते हैं क्योंकि सामान खच्चरों पर लाद कर लाना पड़ता है। गांव में कुछ लोग आरगेनिक तरीके से उत्पादित लहसुन और धनिया बेच रहे हैं। हम आगे बढ़ते हैं।


अमर चंद शर्मा का सेब बगान - गांव में अमरचंद शर्मा ने अपना निजी सेब बगान बना रखा है जिसे सैलानी देखने आते हैं। उन्होंने अपने बाग में टूरिस्ट समूह के लिए प्रवेश की फीस रखी हुई है 10 के समूह के लिए 100 रुपये। बगान के अंदर ही उनका सुंदर सा घर है। घर के प्रांगण में गुलाबों के सुंदर फूल खिले हैं। शर्मा जी हमें सेब के बाग दिखाते हैं। सेब अभी हरे हरे हैं। उन्होने खुरमानी (APRICOT )  बादाम, अखरोट (NUT) भी लगा रखे हैं। सेब बेचकर वे हर साल अच्छी कमाई करते हैं। शर्मा हिमाचल में राजकीय सेवा से रिटायर कर चुके हैं। 
अमर चंद जी से सेब बगान में 

शर्मा जी ने हमें घर की बनी काफी बेहतरीन चाय पिलाई। हम वापस लौटने वाले थे कि उनके दो पोते पोतियां स्कूल से लौटे। वे पास के अंगरेजी स्कूल में पढ़ते हैं। पर खजियार से तीन किलोमीटर पैदल चलकर घर तक पहुंचते हैं। अनादि को यहां हरी हरी घास पर खरगोश मिले जिनके साथ वे खेलने लगे। वापस लौटने की तो इच्छा नहीं हो रही थी। पर खजियार ग्राउंड में माधवी हमारा इंतजार कर रही थीं। सो हम उसी रास्ते से वापस चले। एक सपनों सा गांव है पुखरी। पर शर्मा जी बताते हैं कि सर्दियों में बर्फ से ढक जाता है पूरा गांव। 

पुखरी के एपल गार्डन में खरगोश के साथ खेलते अनादि।

अमर चंद शर्मा का संपर्क नंबर है-  88945 65927 , 98162 54569  कभी आप पुखरी जाएं तो अमरचंद जी से मिल सकते हैं। पुखरी गांव से दूर तक नजर दौड़ाएं रावी नदी भी नजर आ सकती है। काफी दूर आपको चंबा शहर भी दिखाई दे सकता है। कुछ नहीं तो हिमालय की सुंदर चोटियां नजर आती हैं। 
पुखरी गांव से दिखाई देती हिमालय की चोटियां....

विद्युत प्रकाश मौर्य -   vidyutp@gmail.com

( KHAJJIYAR, APPLE GARDEN, PUKHRI, CHAMBA ) 
आगे पढ़िए - लोक आस्था के प्रतीक खज्जिनाग 
        

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