Sunday, June 26, 2016

झुमार - ताल से ताल मिला....

रावी दरिया के तट पर  स्थित होटल में सुबह चिड़ियों की  चहचहाहट के साथ होती है। हमलोग  आज झुमार जाने वाले हैं। तो सुबह  बस से पहले चंबा के बस स्टैंड पहुंच गए हैं।  चंबा का छोटा सा बस स्टैंड बड़ा प्यारा सा है। यहां एक ढाबे में हल्के  नास्ते के बाद झुमार जाने के लिए टैक्सी वाले से बात की। 

  एक  टैक्सी   वाले से  सौदा पट गया है।  झुमार जाना वहां इंतजार करना और फिर बस  स्टैंड वापसी।   
चंबा की एक सुहानी सुबह हमलोग झुमार के लिए चल पड़े हैं। हमारी टैक्सी पहाडों पर चढ़ने लगी है। चंबा शहर नीचे छूटता जा रहा है।  


कोई आधे घंटे के सफर के बाद हम एक अलग दुनिया में पहुंच गए हैं। यहां सामने एक  नन्हें बच्चों का स्कूल और एक दुकान दिखाई दे रही है। एक छोटी सी दुकान है।  यहां  चाय, मैगी, अंडे आदि मिल रहे हैं। तो ये है झुमार का बस स्टैंड।  पर हम आखिर झुमार क्यों आए हैं।


हिमाचल में चंबा के पास झुमार पहुंच जाना यूं लगता है जैसे सपनों की दुनिया में आ गए हों। झुमार चंबा शहर से 14 किलोमीटर की दूरी पर है। रास्ता लगातार चढ़ाई वाला है। पर जब आप झुमार पहुंचते हैं तो मौसम काफी बदल चुका होता है। यह एक ग्रामीण इलाका है जहां दूर दूर तक हरियाली, सेब, चीड़ और देवदार के पेड़ दिखाई  देते हैं। 


झुमार का नैसर्गिक सौंदर्य फिल्मकार सुभाष घई को इतना भाया कि उन्होंने अपनी सुपर हिट फिल्म ताल की आधी शूटिंग झुमार में की। 1999 में आई इस फिल्म में चंबा का सौंदर्य निखर कर आया है। झुमार में जो सेब का बाग है उसका नाम ही ताल गार्डेन रख दिया गया है। 

हालांकि हमें स्थानीय लोगों ने बताया कि ये बाग चंबा के राजघराने का है। इस बाग में  इसकी रखवाली करने वाले परिवार का एक छोटा सा घर है। फिल्म ताल में भी हमें वह घर भी दिखाई देता है।  फिल्म में तो यह बाग और भी भव्य बनकर दिखाई देता है।  दरअसल फिल्में लार्जर दैन लाइफ होती हैं। और अगर कैमरा सुभाष घई जैसे शोमैन का हो तो कहना ही क्या...


सेबों के बाग में घूमते हुए हमारी मुलाकात इस घर में रहने वाले एक बच्चे से होती है जो अब 20 साल से ज्यादा उम्र के हो गए हैं। उन्हें याद है कि उन्होंने ऐश्वर्य राय और अक्षय खन्ना को यहां शूटिंग करते हुए देखा था। झुमार में फिल्म ताल के प्रारंभिक हिस्से की शूटिंग हुई है। फिल्म का लोकप्रिय गीत दिल ये बैचन है....रस्ते पे नैन है...ताल से ताल मिला....की शूटिंग हुई है। 

यहीं पर नायक और नायिका की पहली मुलाकात होती है। उनका प्रेम परवान चढ़ता है। झुमार की फिजा में आज भी रुमानियत तैरती है, जिसे आप महसूस कर सकते हैं। मई की दोपहर में यहां चटखीली धूप खिली है, पर मौसम सुहाना है। गरमी का तो नामोनिशान नहीं है। एक बार आ गए तो यहां से जाने का दिल नहीं करता।

कैसे पहुंचे - चंबा शहर के बस स्टैंड से झुमार जाने के लिए दिन भर में चार बसें जाती हैं। एक बस सुबह 9 बजे है दूसरी 1.30 बजे तो तीसरी 3 बजे। फिर 4.00 बजे फिर 5.45 , 6.30 बजे बसें जाती है। इसी तरह वापसी के लिए भी इतनी ही बसें हैं।


पर यहां आने के लिए आपके पास दूसरा विकल्प भी है। अपनी टैक्सी बुक करके जाएं। हमने एक टैक्सी बुक की। टैक्सी चौगान के आसपास से मिल जाती है। टैक्सी वाले आने जाने का 600 रुपये लेते हैं। वहां आप दो तीन घंटे रूक कर घूम सकते हैं।

झुमार ग्राम पंचायत बाट में पड़ता है। जम्मू नाग मंदिर के पास ही बस स्टाप है। वैसे बात करें तो झुमार मुल्तान इलाके के एक संगीत परंपरा का नाम है। हो सकता है झुमार का नाम इसी आधार पर पड़ा हो। पर यहां आप 24 घंटे प्रकृति का संगीत सुन सकते हैं।
कहां ठहरें - अगर आप पहाड़ों पर कुछ दिन शांति के पल बीताना चाहते हैं तो झुमार में भी ठहर सकते हैं।  स्वास्थ्य लाभ के लिए झुमार सुंदर जगह हो सकता है। झुमार में कुछ होटल और होम स्टे उपलब्ध हैं। 


यहां एक सरकारी रेस्ट हाउस भी है। यहां आप 400 से 800 रुपये प्रति दिन की दर पर ठहर सकते हैं। कई समूह में आने वाले लोग झुमार ( JHUMHAR)  में ठहरना पसंद करते हैं।  झुमार एक गांव है इसलिए यहां सीमित दुकानें हैं और सीमित सामान उपलब्ध हैं। अगर आपकी खास जरूरत की दवाएं आदि हों तो अपने साथ ही लेकर जाएं।

ट्रैकिंग का मजा - झुमार प्रवास के दौरान आप पहाड़ों पर ट्रैकिंग कर सकते हैं। यहां की ट्रैकिंग ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं है। नए लोगों के लिए ट्रैकिंग आनंददायक हो सकती है। स्थानीय लोगों की मदद से आसपास के कुछ गांवों का भ्रमण कर सकते हैं। झुमार से तीन किलोमीटर की ट्रैकिंग करके एक देवी मंदिर के दर्शन करने जा सकते हैं।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( JHUMAR, CHAMBA, TAL FILM, TRACKING, HIMACHAL ) 




3 comments:

  1. विद्युत् प्रकाश जी आपने अपने इस लेख में हिमालय के चंबा शहर के आगे का ग्रामीण इलाका झुमार की ख़ूबसूरती का यात्रावृतांत बेहद रोचक ढंग से किया है........ऐसी ही यात्रावृतांत से सम्बंधित रचनाएँ जहां पर उस जगह का पूरा वातावरण व अन्य बातों का विवरण आज कल कम देखने को मिलता है........ऐसी ही यात्रावृतांत से जुडी रचना समर यात्रा आप शब्दनगरी के माध्यम से पढ़ व अपनी रचनाएं व लेखों को लिख सकतें हैं......

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