Sunday, June 19, 2016

जायका का स्वाद जो कभी नहीं भूलता...

दोपहर में हमलोग होटल रायल ड्रीम में चेक-इन कर चुके थे। अब चंबा शहर को देखने निकलना था। चंबा में चौगान पर हमारा इंतजार ममता शर्मा कर रही थीं। वही ममता जो हमें श्रीनगर में मिली थीं। दिल्ली के प्रगति मैदान में भी दो बार मिलीं। वे अपने गांव जा रही हैं। उनका घर चंबा से 60 किलोमीटर आगे तीसा क्षेत्र में है। हमारे होटल से बस स्टैंड 5 किलोमीटर है। वहां तक जाने के लिए समय समय पर आने वाली बस ही विकल्प है। पर हमें भूख लग रही है। 

जायका रेस्टोरेंट का लजीज खाना
हमारे होटल वाले ने जायका रेस्टोरेंट में खाने की सलाह दी। तकरीबन 800 मीटर पैदल चलने के बाद बालू ब्रिज के पास होटल जायका रेस्टोरेंट आया। होटल का डायनिंग हाल विशाल है। हमने खाने का आर्डर दिया। 70 रुपये की समान्य थाली और 120 की स्पेशल थाली। समान्य थाली में दो लच्छा पराठा, चावल, दो सब्जियां, कडी पकौड़ा, दाल ।  जायका का बतरन बड़े ही सुंदर हैं। सभी सब्जियां परोसी जाने वाली कटोरियों की बनावट हमें काफी पसंद आईं। खाने का स्वाद भी अच्छा था। अगर दो लच्छा पराठा नहीं लें तो तीन बटर रोटी ले सकते हैं। जो 120 रुपये वाली स्पेशल थाली है उसमें एक पनीर वाली सब्जी, एक मिस्सी रोटी और एक स्वीट डिश (आईसक्रीम) अतिरिक्त है। हमने एक समान्य और एक स्पेशल थाली मंगाई और छक कर खाया। 

अपने चंबा प्रवास में जब-जब मौका मिला हमलोग खाने के लिए जायका में ही पहुंचे. हालांकि जायका सुबह के नास्ते में पराठे भी पेश करता है, पर हमें इसका मौका नहीं मिल सका। हमारी रेस्टोरेंटके प्रोपराइट से मुलाकात तो नहीं हो सकी, पर चंबा में इतने बेहतरीन रेस्टोरेंट के लिए धन्यवाद। ( JAYKA RESTURANT, Balu Bridge, Sultanpur, Chamba )
भरपेट खाने के बाद हमने बस स्टैंड तक जाने के लिए बस ली। बस सुल्तानपुर के बाद रावी नदी पर शीतला ब्रिज पार करके बस स्टैंड पहुंची। बस स्टैंड से दो सौ मीटर आगे जाने पर चंबा का विशाल चौगान मैदान आ जाता है। चौगान में खिली खिली धूप में ममता शर्मा हमारा इंतजार कर रही थीं। थोड़ी देर पुरानी यादें ताजा करने और सुख दुख साझा करने के बाद हमलोग आगे बढ़े। 
चंबा के बाजारों से होते हुए भूरी सिंह संग्रहालय की और बढ़े।संग्रहालय के बाद चर्च देखते हुए हम लक्ष्मीनाराय मंदिर पहुंच गए। ममता का गांव यहां से 60 किलोमीटर दूर है। उनके गांव जाने वाली आखिरी बस शाम को 4 बजे है। वे चली गईं गांव अपने। हम शाम तक चंबा के बाकी मंदिर और बाजार घूमते रहे। परेल स्थित होटल पहुंचने के लिए हमें रात 8 बजे बस मिली।

चंबा शहर में आटो रिक्शा या छोटे वाहन नहीं चलते। चूंकि हमारा होटल पठानकोट मुख्य मार्ग पर है इसलिए बनीखेत पठानकोट जाने वाली सारी बसें वहां से होकर गुजरती हैं। रात का खाना अपने होटल से सामने वाले ढाबे में खाने के बाद मीठी नींद में चले गए। कल फिर किसी नई जगह पर।
vidyutp@gmail.com

(CHAMBA, HIMACHAL, ZAIKA PISHORI DHABA, BALU BRIDGE)