Wednesday, May 4, 2016

पेनुगोंडा से वापसी विजयवाड़ा की ओर


पेनुगोंडा तीर्थ में  मध्य रात्रि में शादी संपन्न हो जाने के बाद अब फैसला हुआ कि सुबह के बजाय रात में ही हैदराबाद के लिए प्रस्थान किया जाए। इससे हम दिन की गरमी से बच सकेंगे। सो दुल्हन लेकर रात एक बजे बाराती हैदराबाद के लिए चल पड़े। वे लोग दिन भर नौ घंटे सफर करके आए थे। फिर भी रात एक बजे से नौ घंटे का सफर शुरू हो गया। दुल्हन की विदाई में कोई रोना धोना नहीं दिखाई दिया। उत्तर भारत  24    मार्च को होली मनाने के लिए सुबह का इंतजार कर रहा था। हम एक बार फिर राजामुंदरी से विजयवाड़ा हाईवे पर सरपट भाग रहे थे। 

तीन  घंटे  के सफर के बाद रात के तीन बजे के करीब मैं एक बार फिर विजयवाड़ा शहर में था।   मेरी दिल्ली की फ्लाईट अगली सुबह  विशाखापत्तनम  से है।  तो मेरे पास आज दिन भर का समय होगा विजयवाड़ा शहर में घूमने के लिए।   तो हमने किया कि आज यहां किसी होटल में रुक  जाता हूं। चार घंटे विश्राम के बाद दिन में घूमने निकलूंगा। नवीन भाई मुझे  एमजी रोड पर  स्थित शहर के लोकप्रिय मनोरमा होटल के रिसेप्शन पर छोड़ गए।  बाकी लोग हैदराबाद चले गए  मैं विजयवाड़ा में में  ही रुक गया। पर मुझे  मनोरमा होटल के कमरे थोड़े मंहगे लगे।  

तो  मैं उनके जाने के बाद   रात के तीन बजे  विजयवाड़ा शहर   के एमजी रोड पर विचरण करने लगा।  मनोरमा के बगल में एक और होटल रवि  रेसिडेंसी के रिसेप्शन पर जाकर बात की । यहां पर डबलबेड रूम एसी 1200 रुपये का था, जबकि मनोरमा में  कमरे 2500 से  ऊपर के थे।   यहां गर्मी बहुत  है तो मैंने रवि  रेसीडेंसी में एक कमरा  ले लिया और जाकर तुरंत सो गया।   


यह  होटल पटटाभि रमैया स्ट्रीट पर  ओल्ड बस स्टैंड के पास है।   यहां रहने का मुझे फायदा हुआ  कि सुबह सुबह   किफायती खाने और नास्ते की दुकानें आसपास में   काफी हैं।  विजयवाड़ा का ये इलाका गवर्नर पेट कहलाता है।   मेरे होटल का कमरा अपनी दरों के हिसाब से काफी अच्छा है।  

इस होटल में  मुझे हालांकि  ज्यादा वक्त गुजारने का मौका नहीं मिला।  दिन भर शहर में घूमने के बाद शाम को वापसी में फिर थोड़ी देर के लिए होटल में आया। उसके बाद   विशाखापत्तनम जाने के लिए बस  के लिए निकल पड़ा।  दिन भर शहर में  मैंने   कनक दुर्गा मंदिर,  जुबली हॉल संग्रहालय और गांधी हिल की सैर की।  शाम को थोड़ी  देर शहर के बाजार में भी  घूमने का मौका मिला।
एमजी रोड पर स्थित राम मोहन लाइब्रेरी विजयवाड़ा शहर के प्रसिद्ध पुस्तकालयों में से एक है। इस पुस्तकालय की स्थापना 1911 में इयांकी वेंकट रमन्ना ने की थी। इसका नाम राजाराम मोहन राय के नाम पर रखा गया। आज भी इस पुस्तकालय में स्थानीय राजनेताओं का आना जाना लगा रहता है। कृष्ण लंका स्थित यह लाइब्रेरी हर सोमवार को बंद रहती है। 


- विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com
( VIJAYWADA,   OLD BUS STAND,  GOVERNER PET, HOTEL RAVI RESIDENCY, HOTEL MANORAMA) 

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