Tuesday, April 26, 2016

मिलेनियम एक्सप्रेस से विजयवाड़ा तक

मिलेनियम एक्सप्रेस ( 12646) देश की लंबी दूरी की चंद ट्रेनों में से है जो हजरत निजामुद्दीन से केरल के शहर एर्नाकुलम यानी कोच्चि तक जाती है। 

पर देश की राजधानी से दूसरे छोर तक जाने वाली ये ट्रेन दिल्ली से आगरा, ग्वालियर,झांसी, बीना, भोपाल, इटारसी, नागपुर, काजीपेट, वारंगल, विजयवाड़ा होकर केरल की ओर जाती है। यह पुराना परंपरागत रास्ता है। यह 48 घंटे में एर्नाकुलम साउथ (ERS) पहुंचती है। पर हमें राजामुंदरी ( राजा महेंद्रवर्मनपुरम) जाना था एक शादी में। रात को 12 बजे तक दफ्तर में काम करने के बाद ट्रेन पकड़नी तो मिलेनियम एक्सप्रेस का समय मुफीद है। यह निजामुद्दीन से सुबह 5.55 में खुलती है। आमतौर पर हर रोज समय पर ही खुलती है।
ग्वालियर और झांसी के बीच मिलेनियम एक्सप्रेस 

 दिल्ली से विजयवाड़ा का भी रास्ता इस ट्रेन में कुल 29 घंटे का है। राजमुंदरी जाएं तो 33 घंटे। पर हमें बारात के परिवार के लोगों ने कहा था कि वे लोग सुबह हैदराबाद से चलेंगे और 11 बजे विजयवाड़ा से गुजरेंगे इसलिए हमने विजयवाड़ा तक का टिकट लिया। कोच एस 6 में हमारी बर्थ 60 नंबर है।

आसपास की बर्थ खाली है। दिल्ली से ट्रेन समय पर खुली। कोच में मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट नहीं हैं। अब लंबे सफर के लिए ये जरूरी हो गया है। मिलेनियम में पेंट्री कार भी नहीं है। ट्रेन में मथुरा में रूकी। वहां प्लेटफार्म से नास्ता लिया।  आगरा के बाद ग्वालियर में है ठहराव। ग्वालियर से झांसी के बीच ट्रेन पहाड़ी रास्तों से गुजरती है। इस बीच कुछ खूबसूरत मोड़ हैं। ऑन बोर्ड केटरिंग वाले झांसी में दोपहर का खाना लेकर आए। 70 रुपये का खाना। चार पूरी, चावल, दाल, सब्जी। पैकिंग अच्छी थी पर खाना पसंद नहीं आया। 
ललितपुर के पास बेतवा नदी पर पुल 

इसके बाद ट्रेन ललितपुर जिले से होकर गुजरी। एक जगह बेतवा नदी पर पुल आया। इसके बाद अगला पड़ाव आया बीना जंक्शन। यहां पर सांची के स्टाल से छाछ लिया। 8 रुपये की छाछ। सांची की छाछ हमेशा ही अच्छी लगती है। रास्ते में कुछ लोग पर्चा बांटने आए। भोपाल में अलग अलग रेस्टोरेंट का मीनू। ट्रेन से फोन कर रात का खाना मंगाएं। दरें भी वाजिब थीं। पर ट्रेन भोपाल में शाम 5 बजे ही पहुंच जाती है। इतनी जल्दी खाना लेना मुफीद नहीं लगा। पर भोपाल रेलवे स्टेशन पर पकौड़े जरूर खाए। हमारी ट्रेन ज्यादातर स्टेशनों पर समय से पहले ही पहुंच जा रही है।

इटारसी स्टेशन पर हमेशा खाना बड़ी आसानी से और वाजिब दरों पर मिलता है। मैं सालों से यहां खाना लेता रहा हूं। पर इस बार इटारसी का भी खाना पंसद नहीं आया। 70 रुपये की पैक थाली मिली। पर हर व्यंजन में नमक कम। मजा नहीं आया। खैर अब सोने का समय था। नागपुर में हमारी ट्रेन पूरी तरह भर गई। इससे पहले आसपास की काफी बर्थ खाली थी। अब सुबह हो गई है। हालांकि मिलेनियम का काजीपेट में स्टॉप नहीं है पर ट्रेन रूक गई।

वारंगल में इडली का स्वाद -  हमने वारंगल में इडली खाई। 20 रुपये की एक प्लेट। हमेशा की तरह अच्छा स्वाद है। दक्षिण भारत के स्टेशनों पर खाने में कोई धोखाधड़ी नहीं दिखाई देती।

ट्रेन समय से पहले चल रही है। इसलिए खम्मम और कई छोटे-छोटे स्टेशनों पर ठहराव नहीं होने के बावजूद रूक जा रही है। इतने सारे स्टेशनों पर ठहराव के बावजूद विजयवाड़ा नियत समय पर यानी 10.30 बजे ही पहुंच गई। तो धन्यवाद मिलेनियम एक्सप्रेस। विजयवाड़ा पहुंचने पर मुझे अच्छी खासी गर्मी का एहसास होने लगा है। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य  vidyutp@gmail.com
( MILLENNIUM EXPRESS, ERNAKULAM SOUTH, RAIL, ANDHRA) 






और रास्ते में ये रेलवे स्टेशन भी आए। 




No comments:

Post a Comment