Friday, April 22, 2016

अलग जायका है रतलामी सेव का

हमारी ट्रेन जब भी रतलाम से होकर गुजरती है मैं रतलामी सेव का एक पैकेट जरूर खरीदता हूं। वैसे तो सेव इंदौर और उज्जैन के भी प्रसिद्ध हैं पर रतलामी सेव की बात अलग है। रतलाम मध्य प्रदेश का शहर है। यह रेलवे का बड़ा जंक्शन है। ट्रेन जब  गुजरात से निकल कर मध्य प्रदेश में प्रवेश करती है तो रतलाम पहला बड़ा स्टेशन आता है। ज्यादातर ट्रेनें यहां रूकती हैं।

ब्रिटिश राज में रतलाम की रियासत मशहूर थी। पर अब रतलाम को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है यहां के सेव ने। वैसे कहा जाता है कि रतलाम की पहचान सोना , साड़ी और सेव से है। पर सेव ऐसी चीज है जो हर किसी के जेब के अनुकूल है।


रतलाम का सेव भी तो बेसन और नमक से बनता है। तो इसमें खास क्या है सेव तो पूरे देश में बनता है। पर रतलामी सेव का अपना अलग स्वाद है। इसमें एक खास तरह का तीखापन होता है। इसमें लौंग, लहसून, हिंग और काली मिर्च का इस्तेमाल होता है। रतलामी सेव मूंगफली के तेल में बनता है।

रतलाम की हवा, पानी और यहां का मौसम यहां के सेव को खास बनाते हैं। यहां के कारीगरों ने यही प्रयोग दूसरी जगह भी करके देखा पर वे रतलाम जैसा स्वाद नहीं ला सके। वैसे मालवा के लोग रोज खाने में सेव का इस्तेमाल करते हैं। दाल चावल की थाली मेंऊपर से सेव का छिड़काव करके खाने को और भी स्वादिष्ट बनाते हैं।

रतलाम की बात ही कुछ और है...

रतलाम में खंडेलवाल के रतलामी सेव काफी प्रसिद्ध हैं। पर मुझे स्टेशन पर गणेश का सेव मिलता है। इसका भी स्वाद अच्छा है। यहां मैं खरीदता हूं 80 रुपये में आधा किलो का पैकेट। हो सकता है बाजार में थोडा सस्ता हो। रतलाम के बाजार में आपको सादा सेव के अलावा लौंग सेव, पालक सेव, टमाटर सेव, लहसून सेव आदि किस्म मिल जाएंगी।

खास तौर पर लौंग सेव और लहसून सेव का स्वाद आपको लुभाएगा। एक अनुमान है कि रतलाम से रोज 10 टन सेव आर्डर पर दूसरे शहरों में भेजी जाती है। यानी की लौंग और लहसुन सेव की मांग बहुत है। अब आकाश और प्रकाश जैसे ब्रांड के रतलामी सेव देश के कई हिस्सों में मिलने लगे हैं। विदेशी बाजारों में भी रतलामी सेव की मांग होने लगी है। कई कंपनियां अब ऑनलाइन भी बेच रही हैं।  


रतलाम के बाद ट्रेन राजस्थान में प्रवेश कर जाती है। भवानी मंडी नामक रेलवे स्टेशन आता है जो झालावाड़ जिले में है। यह एक राज्य का सीमांत शहर है। इसके बाद रामगंज मंडी दूसरा स्टेशन आता है जो कोटा जिले में है हालांकि यहां दूरंतो, गरीब रथ जैसी ट्रेनें नहीं रुकतीं। रामगंज मंडी झालावाड जाने का निकटतम रेलवे स्टेशन हुआ करता था। यहां से झालावाड़ 26 किलोमीटर है। अब रामगंज मंडी से झालवाड़ तक रेल लिंक बन चुका है। झालावाड़ से 13 किलोमीटर आगे आप गगरोन का किला देख सकते हैं जो विश्व विरासत की सूची में शामिल है।   

2 comments:

  1. Telugu news portal Brings the Breaking & Latest current Telugu news headlines in online on Politics, Sports news,movie news visit
    Ap latest political news

    ReplyDelete
  2. IEEE Final Year projects Project Centers in India are consistently sought after. Final Year Students Projects take a shot at them to improve their aptitudes, while specialists like the enjoyment in interfering with innovation. For experts, it's an alternate ball game through and through. Smaller than expected IEEE Final Year project centers ground for all fragments of CSE & IT engineers hoping to assemble. Final Year Projects for CSE It gives you tips and rules that is progressively critical to consider while choosing any final year project point.

    JavaScript Online Training in India

    JavaScript Training in India

    The Angular Training covers a wide range of topics including Components, Angular Directives, Angular Services, Pipes, security fundamentals, Routing, and Angular programmability. The new Angular TRaining will lay the foundation you need to specialise in Single Page Application developer. Angular Training

    ReplyDelete