Monday, March 28, 2016

शॉपिंग मुंबई के फैशन स्ट्रीट से

मुंबई में मध्यम वर्ग के लोगों के लिए खरीददारी करने का प्रिय स्थल है फैशन स्ट्रीट। पहले ये जान लेते हैं कि फैशन स्ट्रीट है कहां। तो जनाब ये वेस्टर्न लाइन के आखिरी स्टेशन चर्च गेट या फिर सेंट्रल लाइन के आखिरी टर्मिनल छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से बीच में है। दोनों रेलवे स्टेशनों से पैदल चलकर आप फैशन स्ट्रीट पहुंच सकते हैं। अगर मुंबई के चर्च गेट स्टेशन से बाहर निकलते हैं तो बायीं तरफ रेलवे मुख्यालय के भवन को पार करके अगली सड़क को भी पार करें। पहली सड़क है महर्षि कर्वे मार्ग। 

इसके बाद एक खेल का मैदान दिखाई देगा। यह कर्नाटक स्पोर्ट्स ग्राउंड है। इस मैदान को पार करने के बाद आप पहुंचते है कर्मवीर भाउराव पाटिल मार्ग। इसके बाद फैशन स्ट्रीट की दुकाने शुरू हो जाती हैं। सारी दुकानों को देखते हुए चलते चलते पहुंच जाइए मेट्रो सिनेमा तक। वैसे इस सड़क का नाम कर्मवीर भाउराव पाटिल मार्ग है। आगे यह सड़क महात्मा गांधी मार्ग को जोड़ती है। पर ज्यादातर लोग इसका असली नाम नहीं जानते। फैशन स्ट्रीट मुंबई के प्रसिद्ध आजाद मैदान के सामने है। फैशन स्ट्रीट में तकरीबन 400 पंजीकृत दुकाने हैं। इसके पास का प्रसिद्ध लैंडमार्क बीएसएनल का आफिस भी है।




तकरीबन एक किलोमीटर से ज्यादा लंबा फुटपाथ का बाजार और अस्थायी दुकाने हैं, पर इन दुकानों के नंबर तय हैं। आम तौर पर सुबह 11 बजे से रात के 9 बजे तक फैशन स्ट्रीट की दुकानें खुली रहती हैं। कभी छुट्टी नहीं होती. बाजार सातों दिन ही खुला रहता है। इससे मिलता जुलता बाजार कोलाबा में भी है। पर वहां कीमतें थोड़ी ज्यादा रहती हैं।
फैशन स्ट्रीट में आप पुरुषों के लिए टी शर्ट, पैंट, शर्ट, बारमुडा, कारगो, जींस, बेल्ट, पर्स कुछ भी खरीद सकते हैं।

महिलाओं के लिए स्कर्ट, टॉप, नाइटी, गाउन से लेकर देश में आने वाले हर नए फैशन और डिजाइन को आप फैशन स्ट्रीट में महसूस कर सकते हैं। बच्चों के लिए भी हर तरह के कपड़े आप यहां पा सकते हैं। लेडीज पर्स, स्कूल बैग, बैग पैक से लेकर खिलौने तक जो कुछ भी ढूंढ रहे हैं, यहां मिल सकता है। चलते चलते भूख लग जाए तो गोलगप्पे भी खा सकते हैं।
भोजपुरी का कमाल - मुंबई के अलावा, त्रिपुर, लुधियाना या देश के दूसरे शहरों में जो कुछ भी नया बनता वह फैशन स्ट्रीट पर पहुंच जाता है। कॉटेन होजरी का त्रिपुर से बनने वाला माल यहां हर रोज पहुंचता है। फैशन स्ट्रीट के ज्यादातर दुकानदार इलाहाबाद, बलिया, जौनपुर और बिहार के हैं। थोड़ी थोड़ी बारगेनिंग होती है। मैंने एक दुकानदार से जो बलिया के थे, जैसे ही भोजपुरी में बोला, कातना के पड़ी....तपाक से बोले सब केहू से त ढाई सौ, जाईं रउआ 200 ही दे दीहीं। तो ये था अपनी माृतभाषा का कमाल। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com 
( FAISHON STREET, KARMVEER BHAU RAO PATIL MARG, MUMBAI, MAHARSHI KARVE MARG, KARNATKA SPORTS GROUND,  ) 

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