Saturday, February 27, 2016

न्यू जलापाईगुड़ी रेलवे स्टेशन पर मीटरगेज का स्टीम लोकोमोटिव

गुवाहाटी से चलकर पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस दोपहर एक बजे  न्यू जलपाईगुड़ी पहुंच गई है।  हमने यहां  रेलवे स्टेशन से  दिन का भोजन लिया।  थोड़ी बात और न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन के बारे में । 

 लोगों को रेलवे के इतिहास से रूबरू कराने के लिए कई रेलवे स्टेशनों के बाहर पुराने लोकोमोटिव को सजा संवार कर प्रदर्शित किया गया है। न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन के बाहर निकलने पर दाहिनी तरफ एक विशाल लोकोमोटिव आराम फरमाता हुआ दिखाई देता है। यह एक मीटर गेज नेटवर्क पर चलने वाला इंजन है। इंजन का नाम एमएडब्यूडी 1798 ( MAWD 1798)  है। साल 1944 में निर्मित ये लोकोमोटिव अमेरिकी युद्ध के दौरान डिस्पोज किया गया स्टीम लोकोमोटिव है। इसका निर्माण ब्लाडविन लोकोमोटिव वर्क्स में किया गया था।

अमेरिका के फिलाडेल्फिया स्थित ब्लाडविन कंपनी की स्थापना 1825 में हुई थी। ब्लाडविन मूल रूप से स्टीम लोकोमोटिव बनाने वाली कंपनी थी। जब स्टीम का दौर खत्म होकर डीजल का दौर आया तो ये कंपनी बाजार में मजबूती से कायम नहीं रह सकी।

 करीब 70 हजार स्टीम लोकोमोटिव का निर्माण करने वाली कंपनी ब्लाडविन एक दिन दीवालिया हो गई। बहरहाल हम बात कर रहे हैं एनजेपी स्टेशन के बाहर खडे एमडब्लूडी 1798 लोको की। तो इसकी क्षमता 8.12 टन कोयला ग्रहण करने की है। जबकि इसका वाटर टैंक 10 हजार गैलन का है। लोकोमोटिव का बायलर 24 टन का है। लोकोमोटिव का कुल वजन 41 टन है।

1993 में आखिरी बार दौड़ा - इस लोकोमोटिव को मैकआर्थर नाम से बुलाया जाता था। वे दूसरे विश्व युद्ध के लोकप्रिय अमेरिकी जनरल थे। यह लोकोमोटिव 2-8-2 कनफिगरेशन का है। आमतौर पर यह शंटिंग संबंधी कार्यों के लिए काफी मुफीद था। इसे बहुत तेज गति के ट्रेनों के खीचने की अनुमति नहीं दी जाती थी क्योंकि इससे डिब्बो के पटरी से उतर जाने का खतरा था। अपनी स्टोव जैसी चिमनी, बार फ्रेम और सेंट्रल हैंडलैंप के कारण यह एक पारंपरिक अमेरिकी लोकोमोटिव जैसा दिखाई देता है। 


भारत में यह लोकोमोटिव 1948 में सेवा में आया। 1993 में इसने आखिरी बार अलीपुर दुआर और गीतालदह के बीच अपनी सेवाएं दी थी। इन क्षेत्र से स्टीम इंजन की विदाई के बाद यह लोकोमोटिव कई सालों तक गुवाहाटी के पास न्यू गुवाहाटी लोको शेड में आराम फरमाता रहा। बाद में रेलवे की रेल पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना तहत इसे रिस्टोर किया गया। बाद में इसे न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन के बाहर लाकर खड़ा कर दिया गया।  

साल 2001 में दुबारा लगाई दौड़ - साल 2001 में इस स्टीम लोकोमोटिव को रिस्टोर करने की योजना बनी। कुछ पुराने रेल कर्मियों के  23 दिन के प्रयास के बाद 20 फरवरी को इस स्टीम लोकोमोटिव ने एक बार फिर पटरियों पर दौड़ लगाई। यह स्टीम इंजन गुवाहाटी से पांडु के बीच दौड़ा। तमाम जगह सड़कों पर इस स्टीम लोकोमोटिव की चलते देखने के लिए लोग रूक गए।


 रेलवे ने इस स्टीम लोकोमोटिव को रिस्टोर करने में डेढ़ लाख रुपये खर्च किए। बाद में इस लोकोमोटिव को न्यू जलपाईगुड़ी  लाने का फैसला किया गया जो पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार है। अब आते जाते हजारों लोग रोज रूक रूक कर इस लोकोमोटिव को देखते हैं। हालांकि लोकोमोटिव के आसपास इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है।


इस ट्रेन में मेरा आरक्षण दो टुकड़ों में है।  गुवाहाटी से  एनजेपी तक किसी और कोच में तो  एनजेपी से दिल्ली तक किसी ओर कोच में।  तो एनजेपी में मैंने अपना कोच बदल लिया है। शाम ढलने से पहले ट्रेन बिहार में प्रवेश कर चुकी है। किशनगंज शहर  गुजर रहा है। इसके बाद कटिहार  आया। अब अंधेरा होने लगा है। तो रात्रि भोजन के बाद सोने की तैयारी  में जुट गया हूं। 

इस सफर में बिहार के  ज्यादातर रेलवे स्टेशन  रात में गुजर  गए।   सुबह  होने पर पता चला कि ट्रेन काफी  लेट हो गई है। दोपहर एक बजे ट्रेन  कानपुर जंक्शन पर पहुंची। पूरे छह घंटे लेट। यहां  पर मैंने दोपहर का भोजन लिया।  सोचा था आज शाम को ही दफ्तर चला जाउंगा, पर ऐसा नहीं हो  सकेगा। इसके बाद टूंडला जंक्शन आया।    दिल्ली पहुंचते-पहुंचे  शाम ढल चुकी है।
-  विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com
( NJP, STEAM LOCOMOTIVE, NEW JALPAIGUDI , MAWD 1798, BLADWIN  , USA , PURVOTTAR SAMPARK KRANTI  EXPRESS )  



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