Saturday, January 9, 2016

गौड़ मालदा की अनूठी चीका मसजिद और लुका चुरी गेट

 




क्या कभी मंदिर हुआ करता था चीका मसजिद –    गौर मालदा में विचरण करते हुए हमें एक अदभुत मसजिद नजर आती है। इसका नाम है चीका मसजिद। इतिहास के पन्नों को अगर पलटें तो  सुल्तान युसुफ शाह ने 1475 में चीका मसजिद का निर्माण कराया था। वास्तव में यह कभी चीका यानी चमगादड़ों की शरण स्थली हुआ करता था। यह भी एक गुंबद वाली संरचना है। 
गौर मालदा की चीका मसजिद। 

अब इसका अवशेष ही बचा है। इसकी दीवारों पर शानदार नक्काशी दिखाई देती है। दीवारों पर हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां देखी जा सकती हैं। यह एक ऐसी मसजिद है जिसकी वास्तुकला हिंदू मंदिर की है। इससे प्रतीत होता है कि यह कभी हिंदू मंदिर रहा होगा।


सुंदर नक्काशियों वाला  गुमटी गेट –
  गुमटी गेट की इमारत दूर से ही अदभुत नजर आती है। यह चीका मसजिद के ठीक सामने है। 1512 में इसका निर्माण अलाउद्दीन हुसैन शाह ने करवाया। इसका आकार छोटा है पर देखने में सुंदर है। इसके निर्माण में ईंट और मिट्टी का इस्तेमाल हुआ है। पर इसके रंग अदभुत हैं और दरवाजे पर शानदार नक्काशी है।



 हालांकि आजकल इसके संरक्षण के लिए इसे बंद कर दिया गया है। गुमटी गेट और चीका मसजिद के बीच खाली मैदान में एक मंदिर का अवशेष दिखाई देता है। इसका अब सिर्फ आधार तल ही रह गया है। इसे देखकर लगता है कि कभी यहां मंदिरों का समूह रहा होगा।

गौर मालदा में गुमटी गेट के आगे। 


शाही दरवाजा हुआ करता था लुका चोरी गेट  –  कभी शाही दरवाजा हुआ करता था लुका चुरी गेट। आजकल इसके अंदर से आम लोगों के वाहन गुजरते हैं। लुका चुरी गेट का निर्माण 1655 का  है। यह नगर का मुख्य प्रवेश द्वार हुआ करता था। यह गेट दो मंजिला भवन  सा नजर आता है।  इसके ऊपरी मंजिल पर शाही   ड्रम बजाने वाले बैठते और सुल्तान के आगमन की  जानकारी देते थे। 


 इस गेट के अंदर से आजकल सड़क सरपट गुजरती है। इसके नाम के पीछे रोचकता है। अंगरेजी के खेल हाइड एंड सीक यानी लुका-छिपी के खेल के नाम पर इस गेट का बांगला नाम है लुका चोरी। कहा जाता है यहां सुलतान अपनी बेगमों के साथ लुका छिपी का खेल खेला करता था। दो मंजिला यह दरवाजा महल में प्रवेश के मुख्य दवारा के तौर पर काम करता था।

और ये रहा गौर मालदा का लुका चुरी  ( Hide and Seek ) गेट। 
कैसे पहुंचे –   मालदा टाउन के रथबारी चौक से प्राचीन गौड़ शहर की दूरी महज 12 किलोमीटर है। यहां आने के लिए आप आटोरिक्शा या टैक्सी किराये पर ले सकते हैं। यहां सार्वजनिक वाहन से नहीं जा सकते, क्योंकि सारे ऐतिहासिक स्थल एक ही जगह पर नहीं हैं। इसलिए आरक्षित वाहन से आना ही सुविधाजनक है।


इतिहास के शोधार्थी मोहम्मद अनवारुल हक के साथ हमारी गौर की यात्रा शुरू हुई थी। हमने रथबारी चौक  से आटो रिक्शा किराये पर लिया।  हमारे आटो चालक   बोबाई सिंह ( 98511-40223)  ने हमें सारे स्मारक बड़े दिल से घुमाया उनका धन्यवाद। कुछ घंटे में हमलोग शहर वापस चले आए हैं।  
-  विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
  ( LUKA CHURI GATE, HIDE AND SEEK, GAUR MALDA, GUMTI GATE, CHIKA MASJID ) 


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