Thursday, January 28, 2016

बाबा हरभजन सिंह रिटायर हो गए...अब छुट्टी नहीं जाते

बाबा मंदिर के नाम से मशहूर है यह जगह, तकरीबन 13 हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर। भारतीय फौज में इंडियन आर्मी की गहरी आस्था है बाबा में। कहते हैं बाबा की आत्मा भारत चीन सीमा पर फौजियो का मार्ग दर्शन करती है। तो चीन के फौजी भी बाबा की शक्ति से कहीं न कहीं डरते हैं।  हम बातकर रहे हैं बाबा हरभजन सिंह की। जिनके बारे में माना जाता  है कि वे अभी भी जीवित हैं।



गंगटोक से नाथुला के मार्ग पर सरथंग से बाबा हरभजन सिंह के मंदिर के लिए रास्ता बदलता है। वहां से नाथुला 4 किलोमीटर है जबकि पुराना बाबा मंदिर दाहिनी तरफ तकरीबन 9 किलोमीटर आगे है। हालांकि आजकल नया बाबा मंदिर बना दिया गया है, तो बड़ी संख्या में सैलानी नए बाबा मंदिर को ही देखकर वापस लौट आते हैं।

साल 2008 में रिटायर हुए - बाबा हरभजन सिंह की कहानी मैंने पहली बार सन 2000 में सुनी थी जब मैं जालंधर में अमर उजाला में कार्यरत था। हमारे साथी अरविंद श्रीवास्तव ने एक खबर लिखी की बाबा जी छुट्टी पर घर आ रहे हैं। उनके लिए ट्रेन में तीन बर्थ बुक हैं। वे दो महीने गांव में छुट्टी काटेगें फिर वापस सिक्किम में नाथुला सीमा पर जाएंगे। दरअसल बाबाजी तो इस दुनिया में रहे नहीं पर अनूठा आस्था है भारतीय थल सेना उन्हें वेतन भी देती थी और छुट्टी पर घर भी भेजती थी। पर साल 2008 में बाबा जी रिटायर हो गए तो अब उनकी पेंशन लग गई है। अब उनके छुट्टी पर घर जाने का सिलसिला रूक गया है।

कपूरथला जिले में जन्म हुआ था -   बाबाजी पंजाब के कपूरथला जिले के बारंदोल गांव पैदा हुए थे। वे 1966 में पंजाब रेजिमेट में बतौर सिपाही भर्ती हुए। 4 अक्तूबर 1968 को सिक्किम मे नाथुला इलाके में तैनाती के दौरान भयानक प्राकृतिक आपदा आई। भारी बारिश और चट्टान खिसकने से काफी लोगों की जान चली गई। इस समय सिपाही हरभजन सिंह अपने खच्चर कारवां को लेकर जा रहे थे। यह कारवां टुकला से डेंगचुला जा रहा था। इस दौरान हरभजन सिंह एक तेज बहती जलधारा मे बह गए। पांच दिनों तक उनका कुछ पता नहीं चला।


बाद में वे साथी प्रीतम सिंह के सपनों में आए। अपने बारे में बताया कि वे कहां दबे हुए हैं। बाद में तलाशी ली गई तो  उनका शव वहीं मिला। उन्होंने अपनी समाधि बनाने की इच्छा भी जताई थी। बाद में उनके साथियों ने उनकी इच्छा के मुताबिक चोकियाको में उनकी समाधि बनवाई। तब से बाबा सीमा पर खतरनाक गतिविधियों के बारे में फौजियों को सपने में आकर बताते हैं। उनपर चीनी सैनिक भी विश्वास करते हैं। पूरे सीमा क्षेत्र में एक छाया पेट्रोलिंग करती नजर आती है। अब बाबा को फौज ने मानद कप्तान पद से सम्मानित किया है।
पुराने बाबा मंदिर में बाबा जी की समाधि, बाबा जी का बंकर बना है। बंकर में उनका बिस्तर लगा है। उनके कपड़े, जूते आदि भी यहां रखे गए हैं। देश भर से आने वाले लोग श्रद्धा से शीश नवाते हैं। हर शुक्रवार को यहां पर लंगर भी लगाया जाता है।   जो सैलानी यहां शुक्रवार को पहुंचते हैं उन्हें लंगर  छकने का मौका मिलता है। 



जालंधर के बस्ती मिठू के फौजी गुरप्रीत सिंह 
बाबा जी की समाधि पर प्रसाद बांटते मुझे जालंधर के बस्ती मिठू के फौजी गुरप्रीत सिंह मिले। ये जानकर बड़े खुश हुए कि मैं जालंधर में लंबे समय तक रह चुका हूं। 14 हजार फीट पर जिंदगी कितनी मुश्किल होगी मैं इसका अनुमान लगाता हूं। दोपहर के बाद बर्फीली हवाएं चलने लगती हैं पर इस माहौल में भी हमारे  फौजी भाई मस्त हैं। देश की सेवा भी और   आस्था भी। 


ऑक्सीजन की कमी -   बाबा मंदिर पहुंचने पर   मैं टैक्सी से उतरने के बाद उनके  आवास   में  स्मृतियों को देखने के लिए पूरे उत्साह से लगभग दौड़ते हुए सीढ़ियां चढ़ने लगा। आधी सीढ़ियां चढ़ने  पर मेरी सांस फूलने  लगी। तब मुझे याद आया कि मैं 13 हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर हूं। यहां ऑक्सीजन कम होती  है। फिर मैं रुक गया और आहिस्ता-आहिस्ता सीढ़ियां चढनी शुरू की।  कुछ देर बाबा मंदिर क्षेत्र  में  गुजारने  के बाद हमलोग वापस लौट चले । वैसे भी आप यहां दोपहर 1.30 बजे के बाद नहीं रह सकते। 

यहां पर हमें सेना के अलग अलग बटालियन द्वारा स्थापित किए  गए बोर्ड नजर आते हैं। इन बोर्ड पर बाबाजी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की गई है। साथ ही बाबा जी से उनका आशीर्वाद मांगा गया है।  तो ये है सेना की बाबाजी के प्रति आस्था और विश्वास।
- विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
( NATHU-LA, SIKKIM, BABA HARBHAJAN SINGH SAMADHI MANDIR, KAPURTHALA PUNJAB ) 
( बाबा हरभजन सिंह पर बातें जारी हैं  पढ़िए अगली कड़ी  - बाबा हर भजन सिंह का नया मंदिर



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