Wednesday, January 27, 2016

थेवू ट्रेड सेंटर - यहां भारत-चीन के बीच होती है तिजारत

 
नाथुला की ओर जाते हुए   
शेरथांग  में नजर आता है थेवू ट्रेड सेंटर। इस सेंटर पर भारत चीन के बीच व्यापार होता है। पर यह सब कुछ साल के छह महीने में ही होता है। क्योकि बाकी के छह महीने बर्फ पड जाती है तो रास्ते बंद हो जाते हैं। व्यापार के लिए नाथुला के रास्ते से ट्रक चीन को जाते और आते हैं। चीन से यहां सस्ते कपड़े, जैकेट, टोपियां, दस्ताने आदि आते हैं। हालांकि उनकी क्वालिटी अच्छी नहीं होती। जबकि भारत से वनस्पति तेल और दूसरी खाने पीने की चीजें भेजी जाती हैं। हमारी आंखो के समाने व्यापार केंद्र वीरान था। क्योंकि आजकल  तिजारत बंद है।   



रास्ते में एक मील का पत्थर नजर आता है। लुंगथू 13 किलोमीटर। लुंगथू  पूर्वी सिक्किम जिले में गंगटोक 62 किलोमीटर दूर एक सीमांत कस्बा है। ये सड़क उसी ओर  जा रही है। कुछ सैलानी वहां भी जाते हैं। वहां  पर रहने के लिए होम स्टे भी उपलब्ध हैं। 

 वैसे 1962 के युद्ध के बाद भी नाथुला मार्ग को बंद कर दिया गया था। इस मार्ग से चीन साथ व्यापार को रिश्तों में नरमी आने पर 5 जुलाई 2006 में दुबारा खोला गया।  इस बीच चार दशक तक ये व्यापारिक मार्ग बंद रहा।  इस दौरान इधर सैलानियों की आवाजाही भी नहीं होती थी। अब तो गंगटोक  से हर रोज कई सौ  टैक्सियां नाथुला के लिए चलती हैं।  अब नाथुला दर्रे से होकल कैलाश मानसरोवर यात्रा  का नया मार्ग भी खोला गया है। यह पारंपरिक लिपुलेख मार्ग की तुलना में आसान है।

दुनिया का सबसे ऊंचा गोल्फ कोर्स – कोई सवाल पूछे की दुनिया का सबसे ऊचा गोल्फ कोर्स कहा हैं तो जवाब होगा पूर्व सिक्किम जिले के कुपुप में। पुराने बाबा मंदिर के रास्ते में नजर आता है दुनिया का सबसे ऊंचा गोल्फ कोर्स। कुपुप में यह गोल्फ कोर्स 13, 025 फीट की ऊंचाई पर है। इसे याक गोल्फ कोर्स नाम दिया गया है। गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में इसे दुनिया का सबसे ऊंचा गोल्फ कोर्स का दर्जा दिया गया है।

सन 1972 में निर्माण -  इस गोल्फ कोर्स का निर्माण 1972 में किया गया। पूर्वी सिक्किम में स्थित ये 18 होल का गोल्फ कोर्स  है। इसका प्रबंधन इंडियन आर्मी और इंडियन गोल्फर यूनियन देखती है। यहां पर इसका प्रमाण पत्र भी प्रकाशित किया गया है। 
गोल्फ कोर्स के साथ गुजरते मार्ग  से 1903-04 में ब्रिटिश आर्मी के कैप्टन यंगहसबेंड के नेतृत्व में अपनी  प्रसिद्ध   तिब्बत  के  अभियान पर गए थे।    तिब्बत पर ब्रिटिश अभियान, जिसे तिब्बत पर ब्रिटिश आक्रमण के नाम से भी जाना जाता है या तिब्बत में यंग हसबेंड अभियान दिसंबर 1903 में शुरू हुआ और सितंबर 1904 तक चला।

 ट्रांजिट कैंप में रहने का इंतजाम -  रास्ते मे मुझे टैक्सी ड्राईवर एक ट्रांजिट कैंप दिखाते हैं। बताते हैं कि ये सैलानियों के लिए आवास का इंतजाम है। अगर कभी बर्फबारी में सैलानी फंस गए तो सेना उनके आवास और भोजन का इंतजाम यहां करती है। यहां एक साथ करीब 500 सैलानियों के रहने का इंतजाम किया गया है। 



रास्ते में टैक्सी ड्राईवर हमें टूकला ( TUKLA)  दिखाते हैं। बताते हैं कि 1958 में इस हिस्से पर चीन ने कब्जा कर लिया था। इस क्षेत्र में बड़ी लड़ाई हुई थी। टुकला घाटी 12500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। बाद में इस क्षेत्र को 1962 में ही भारत की सीमा में वापस लिया जा सका। कहानी सुनकर सीना चौड़ा हो जाता है कि हमने ये इलाका चीन से छीन लिया था। 



सडक के किनारे  बर्फ की चादर -  आजकल इस इलाके में सड़क के दोनों तरफ खूब बर्फ पड़ी है। सिर्फ सड़क साफ दिखाई देती है बाकी दोनों तरफ बर्फ ही बर्फ। ड्राईवर साहब गाड़ी रोक देते हैं बर्फ के संग अटखेलियां करने के लिए। हम भी बर्फ के संग कुछ देर के लिए मस्त हो जाते हैं। सफेद बर्फ यूं लगते हैं मानों पहाड़ो पर बिस्तर बिछा हो और हम उसपर यूं लेट जाएं।  हां, मेेरे लिए पहाड़ों पर बर्फ देखने का ये पहला मौका है। 


इतनी ऊंचाई पर  बर्फीली वादियों में  हरियाली के बारे में सोचना ठीक नहीं है। पर  इन उंचाई पर रोडेंड्रम के पौधे दिखाई दे जाते हैं। इन्हें नेपाली में गुरांस  कहते हैं तो उत्तराखंड में इसका नाम बुरांश है। यह हाई एल्टीट्यूड पर होने वाला पौधा  है। इसमें लाल रंग के फूल खिलते हैं। बुरांश का जूस दिल के लिए काफी अच्छा होता है। पर इन दिनों बुरांश मं फूल नहीं आए हैं।  सिर्फ टहनियां दिखाई दे रही हैं।   इनमें फलियां भी आ गई हैं। 


कुछ नहीं बस ....मुट्ठी बर बर्फ। 

- विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com
( GANGTOK TO NATHULA, CHANGU LAKE, ANJU LAKE, MANJU LAKE ) 

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