Sunday, December 27, 2015

पंजाब के आनंदपुर साहिब की ओर

सुबह-सुबह हरियाणा के प्रसिद्ध अंबाला रेलवे स्टेशन पर पहुंचा हूं। दिल्ली से रात भर बस का सफर तय करके। चार घंटे लगे हैं यहां तक बस से पहुंचने में। दफ्तर का काम खत्म करके दिसंबर की ठंड में सीधे कश्मीरी गेट बस अड्डे से बस में बैठ गया था। अंबाला का रेलवे स्टेशन बस स्टैंड के बिल्कुल सामने ही है। यहां से मुझे जाना है आनंदपुर साहिब। अभी उजाला नहीं हुआ है। 

सिख धर्म के पांच पवित्र तख्त में से एक है श्री केशगढ़ साहिब यानी आनंदपुर साहिब।अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन से सुबह छह बजकर 10 मिनट पर नंगल डैम के लिए मेमू ट्रेन खुलती है। यह ट्रेन आनंदपुर साहिब या नैना देवी जाने के लिए आदर्श और सस्ता तरीका है। हालांकि टिकट खिड़की से आधा किलोमीटर दूर प्लेटफार्म नंबर1ए  से ये ट्रेन हर रोज रवाना होती है।

मैं टिकट लेकर मेमू में सवार हो जाता हूं। मेमू ट्रेन में जगह आसानी से मिल जाती है। ट्रेन चल पड़ती है। अंबाला सिटी के बाद शंभू, राजपुरा जंक्शन, सराय बंजारा, साधूगढ रेलवे स्टेशन आते हैं। इसके बाद सरहिंद जंक्शन आता है। लुधियाना जालंधर जाते समय सैकड़ों बार इस मार्ग से गुजरा हूं। पर सरहिंद जंक्शन क्यों हैं। इतिहास में हम सरहिंद के युद्ध और संधि के बारे में पढ़ते हैं। पर अब सरहिंद से एक लाइन जाती है नंगल की तरफ इसलिए सरहिंद जंक्शन है।

मेमू ट्रेन में सुबह-सुबह अच्छी ठंड लग रही है। सरहिंद रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर पकौड़े तले जा रहे हैं। उसकी गर्माहट महसूस कर रहा हूं। पर मैं पकौड़े नहीं खा पाता। क्यों अभी तो ब्रश भी नहीं किया है। इस ठंड में ट्रेन में टीटीई साहब नजर आते हैं जो अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद है। बिना किसी मुरौव्वत के बेटिकट यात्रियों पर फाइन करते रसीद थमाते जाते हैं। मेरे पड़ोस में बैठे एक बीएसएफ के जवान भी बे-टिकट हैं। उन्हें भी दो सौ रुपये जुर्माना भरना पड़ता है। 

हमारी ट्रेन सरहिंद से निकलते ही फतेहगढ़ साहिब में रूकती है। स्टेशन के पास ही विशाल गुरुद्वारा है। दरअसल पंजाबी में जिन शहरों के नाम के आगे साहिब लगा है वहां विशाल गुरुद्वारे होते हैं और उनका संबंध सिख विरासत से होता है। फतेहगढ़ साहिब पंजाब का एक जिला है। ट्रेन आगे बढ़ती है। अगला स्टेशन है बस्सी पठाना। पंजाब में रहते हुए इस छोटे से कस्बे की खबरें हम अखबार में छापा करते थे। यह फतेहगढ़ साहिब जिले का ही एक कस्बा है। 



इसके बाद न्यू मोरिंडा जंक्शन आता है। यहां पर हमें सुबह के उगते हुए सूरज के दर्शन होते हैं। पर इससे सर्दी कम होती नजर नहीं आती। पर जब बाहर घूम रहे हों तो उतनी सर्दी नहीं लगती। रजाई में दुबके हुए हों तो सर्दी ज्यादा सताती है। रेल की खिड़की से ही उगते हुए सूरज को प्रणाम करता हूं। 

लुधियाना से चंडीगढ़ के बीच बनी नई रेलवे लाइन लुधियाना की तरफ से यहां आकर मिलती है। इसके बाद मोरिंडा आता है। मोरिंडा में हमें चंडीगढ़ से अमृतसर जाने वाली नई ट्रेन के दर्शन हुए। यहां से चमकौर साहिब जाने का रास्ता है। ऐतिहासिक गुरुद्वारा चमकौर साहिब यहां से 14किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बाद हम पहुंच जाते हैं पंजाब के एक और जिले रुपनगर में। रुपनगर शहर चंडीगढ से नजदीक है। मेमू सिटी बजाती आगे बढती है। किरतपुर साहिब स्टेशन आता है। यहां भी ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। 

किरतपुर साहिब से मंडी के लिए हाईवे का रास्ता बदलता है। सड़क मार्ग से मनाली जाने वाले लोग इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद का अगला स्टेशन होगा आनंदपुर साहिब। यह नंगल से पहले का स्टेशन है। हालांकि ट्रेन हिमाचल प्रदेश के उना जिले मे स्थित अंब इंदौरा रेलवे स्टेशन तक जाती है। ट्रेन में बीएसएफ के जवान आरके शर्मा मिलते हैं। गुजरात के कच्छ से अपने घर मंडी जा रहे हैं। उनके साथ बातों बातों में सफर कट जाता है।


आनंदपुर साहिब रेलवे स्टेशन की इमारत भी किसी गुरुद्वारा यानी  धार्मिक प्रतीक जैसी ही बनी हुई है। स्टेशन बिल्कुल साफ सुथरा चमचमाता हुआ है। रेलवे स्टेशन पर ही टूथ ब्रश करने के बाद मैं निकल पड़ता हूं सिख गुरुओं के इस ऐतिहासिक शहर को और करीब से देखने के लिए। सुबह सुहानी है। सरदी की धूप दवा सरीखी लग रही है। और मैं आगे कदम बढ़ाता जाता हूं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  
( AMBALA, SARHIND JN, FATEH GARH SAHIB, ANANDPUR SAHIB, PUNJAB ) 

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