Wednesday, December 2, 2015

सुधारवादी वायसराय की याद- चेन्नई की ऐतिहासिक रिपन बिल्डिंग

  चेन्नई सेंट्रल रेलवे  स्टेशन के ठीक बगल में सफेद रंग की विशाल इमारत नजर आती है। इसका नाम रिपन बिल्डिंग (RIPON BUILDING)  है, जो  ग्रेटर चेन्नई कारपोरेशन का मुख्यालय है।  इस भवन के ऊपर भी एक विशाल घंटाघर  बना हुआ है।  यह भवन 1909 से 1903 के बीच बनकर तैयार हुआ। इसका नाम ब्रिटिश  भारत के गवर्नर जनरल लार्ड रिपन के नाम पर रखा गया है।

सफेद रंग की यह भव्य बिल्डिंग किसी राज्य की विधानसभा  भवन जैसी नजर आती है।  इसके तीनों तरफ चौबारे बने हुए हैं।  सन 1913 में जब यह बनकर तैयार हुआ तो इसकी कुल लागात 7.50 लाख रुपये थी। भवन तीन मंजिलों की है। इसमें आजकल चेन्नई नगर निगम के तमाम अधिकारी बैठते हैं।

इसका टावर 43 मीटर ऊंचा है। टावर में लगी घड़ी का व्यास ढाई मीटर है। इसमें काफी दूर से  ही आप समय देख सकते हैं।  इस घड़ी का नाम वेस्टमिंस्टर चिमिंग क्लॉक है जो इस भवन का मुख्य आकर्षण है।  इसमें चाबी देने के लिए मेकेनिकल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इसे हर रोज चेक किया जाता है।  रिपन बिल्डिंग के बगल में एक और ऐतिहासिक इमारत है जिसका नाम विक्टोरिया पब्लिक हॉल है। 

सुधारवादी वायसराय - भवन  के बाहर लार्ड रिपन की एक प्रतिमा भी लगी है।  वे 1880 से 1884 तक भारत के वायसराय  और गवर्नर जनरल थे।  उन्हें उदारवादी माना जाता है।  बल्कि इतिहासकार उन्हें सभी वायसराय में सबसे उदार मानते हैं। उन्हें लार्ड लिटन की  कई जुल्मी नीतियों  में बदलाव किए। उनका जन्म 24 अक्तूबर 1827 को लंदन में 10 डाउनिंग स्ट्रीट में हुआ था। 
 तो चेन्नई लार्ड  रिपन को याद करता है उनके नाम पर इस विशाल भवन के रूप में।   रिपन ने स्थानीय स्वशासन की  भी शुरुआत कराई।  कई नगरों में नगरपालिका का गठन कराया गया।  इसलिए उनके नाम पर चेन्नई नगर निगम के भवन  का नामकरण किया गया।    रिपन ने 1882 में वर्नाकुल प्रेस एक्ट को खत्म कर दिया।   रिपन ने शिक्षा में सुधार के लिए 1882 में हंटर आयोग का गठन किया।  रिपन ने 1881 में फैक्ट्री अधिनियम बनाया जिसके तहत काम के घंटे तय किए गए। 

कुछ प्रशासनिक मतभेदों के कारण  1884 में  रिपन को त्यागपत्र देना पड़ा। इसके बाद वे भारत से चले गए। पर वे जब जाने लगे थे  देश के कई शहरों  में उन्हें लोगों ने रोक-रोक कर भावभीनी विदाई दी गई।   फ्लोरेंस नाइटेंगल ने  उन्हें भारत का उद्धारक कहा है।
रिपन के  पिता एफजे रॉबिनंसन  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे। इतने बड़े सुधारवादी  वायसराय कभी स्कूल कॉलेज नहीं गए। उनकी शिक्षा घर में ही निजी तौर पर हुई थी। रिपन का निधन 9 जुलाई 1909 को हुआ।  देश में और भी लार्ड रिपन की यादें हैं। कोलकाता में रिपन स्ट्रीट नामक सड़क है  तो कर्नाटक के शिवमोगा जिले में रिपनपेट नामक  कस्बा है। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( MGR CHENNAI CENTRAL,  MADRAS, LORD RIPON )  


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