Tuesday, November 24, 2015

देश के सात अजूबों में एक समुद्र तटीय मंदिर

समुद्र तटीय मंदिर तमिलनाडु के महाबलीपुरम  का सबसे खास आकर्षण है। इसे देश के सात अजूबों में गिना जाता है। साथ ही यूनेस्को द्वारा विश्वदाय स्मारकों की सूची में भी 1984 से ही शामिल है। समुद्र तटीय मंदिर को दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। यह आठवीं शताब्दी में निर्मित है और वास्तुकला की दृष्टि से भी अद्भुत है। वास्तव में ये स्थान पल्लव नरेशों की शिल्प साधना का अमर स्मारक है। यहां समुद्र तट पर द्रविड़ वास्तुकला के आधार पर यहां तीन मंदिर बनाए गए हैं। केंद्र में भगवान विष्णु का मंदिर हैजबकि उसके दोनों ओर शिव मंदिर हैं।

दो सौ साल पहले तक समुद्र तटीय मंदिर अनजाना था। पिछली शताब्‍दी में लगातार रेत हटने से समुद्र तटीय मंदिर के आस –पास की जमीन में दबी अनेक संरचनाएं सामने आईं। इन सब में आरंभिक पल्‍लव काल की सीढ़ीदार संरचना सबसे अनूठी है जो लगभग 200  मीटर लंबी है। इस विशाल इमारत का ठीक –ठीक प्रयोजन क्‍या थायह अभी पता नहीं है। इसकी सीढि़यां ग्रेनाइट स्‍लैबों से निर्मित है।


महाबलीपुरम - विशाल शिवलिंगम। 
साल 1990 में अकस्‍मात खोजी गई भूवराह मूर्ति , लघु मंदिर और कुआं पल्‍लव नरेश नरसिंह वर्मन ( 638 से 660  ई.) के शासन काल के हैं। ये राजसिम्हा ( 700 से 728 ई.) के शासन काल में निर्मित एक बड़े गोलाकार अहाते से घिरे हैं। इनको अनगढ़ आधार शैल पर तराशा गया है। यहां विष्‍णु जी लेटी हुई मुद्रा में विराजमान  हैं। शिव को समर्पित लघु मंदिर पत्थरों से तराश कर बनाया गया है। इसका शिल्‍प अनूठा है। मंदिर में विशाल शिवलिंग देखा जा सकता है।

मंदिर के आधार पर पल्‍लव शासक राजसिम्हा का नाम खुदा है। चारों तरफ दीवार का निर्माण संभवत: इसलिए किया गया था कि अंदर रेत न आ पाए। पश्चिमी मंदिर में एक बाह्य दीवार है और एक साधारण गोपुरम है। बीच में विश्राम मुद्रा में लेटे विष्‍णु का एक आरंभिक मंदिर है। इन सभी मंदिरों के नाम राजसिम्‍हा के विभिन्‍न उपनामों का प्रतिनिधित्‍व करते हैं।


प्रवेश शुल्क :  समुद्र तटीय मंदिर और पंच रथ मंदिर के लिए भारतीय नागरिक और सार्क और बिमस्टेक देशों के पर्यटक- 10 रूपये प्रति व्यक्ति  है। अन्य देशों के लिए 250- रूपये प्रति व्यक्ति शुल्क है।  15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश शुल्क नहीं है। एक स्‍मारक पर खरीदा गया टिकट अन्‍य स्‍मारकों पर भी वैध है। छोटी पहाड़ी पर स्थित शेष स्‍मारकों तथा अन्‍य स्‍थानों पर प्रवेश शुल्‍क नहीं है। स्टिल फोटोग्राफी के लिए कोई शुल्‍क नहीं है। यहां सुबह 6 बजे से शाम 5.30 बजे तक जाया जा सकता है।

कैसे पहुंचे - महाबलीपुरम बस स्टैंड से समुद्र तटीय मंदिर की दूरी आधा किलोमीटर है। मंदिर के बगल में बालु के मैदान पर चौपाटी नुमा बाजार लगा रहता है। यहां आप घुड़सवारी का आनंद ले सकते हैं। समुद्री चीजों की खरीददारी कर सकते हैं। यहां समुद्र तट पर तमिल संत तिरूवल्लुर की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। यहां काफी लोग समुद्र तट पर स्नान करते दिखाई देती है। समुद्र तट काफी सुंदर है, पर स्नान करना खतरनाक है।


( Remember-  It is a UNESCO World Heritage Site )

http://whc.unesco.org/en/list/249/video
समुद्र तटीय मंदिर का विंहगम नजारा  ( विश्व धरोहर 1984 से ) 

( MAHABALIPURAM, SEA SHORE TEMPLA, CHOLA KING )