Friday, February 20, 2015

बंद हुई जबलपुर –नैनपुर नैरोगेज - थमा सतपुड़ा एक्सप्रेस का सफर


एक दिन सतपुड़ा एक्सप्रेस का रोमांचक सफर हमेशा के लिए थम गया। एक अक्टूबर 2015 से जबलपुर-नैनपुर खंड छोटी लाइन को बंद कर दिया गया। ऐसे में इस पटरी पर रोजाना दौड़नेवाली 24 ट्रेनों का सफर हमेशा के लिए खत्म हो गया। इसके साथ ही 111 साल का शानदार सफर इतिहास बन गया। न सिर्फ सतपुड़ा एक्सप्रेस बल्कि तमाम ट्रेनें अब इतिहास के पन्नों का हिस्सा बन चुकी हैं। 

एशिया का सबसे बड़ा नैरोगेज का जंक्शन नैनपुर भी अब इतिहास बन चुका है। साल 2015 की जनवरी में मुझे सतपुड़ा एक्सप्रेस से सफर करने का सौभाग्य मिला था। तब रास्ते में जगह जगह आमान परिवर्तन का काम दिखाई
  दे रहा था। तब ये उम्मीद नहीं थी इतनी जल्दी एक सतपुड़ा के जंगलों के बीच से सबसे छोटी लाइन की छुक छुक बंद हो जाएगी।

सतपुड़ा एक्सप्रेस लोगों के बीच इतनी लोकप्रिय थी कि इलाके के लोग बड़ी लाइन में भी सतपुड़ा एक्सप्रेस देखना चाहते हैं इस तरह की मांग के समर्थन में अभियान चला रहे हैं। लोग चाहते हैं कि भविष्य में जब बड़ी लाइन चालू हो तो ट्रेन का नंबर भी वही रहे।


जुलाई 1904 को इस ट्रेन ने जबलपुर से अपने सफर की शुरुआत की थी। आखिरी दिनों में लोग बंद हो रही छोटी लाइन के सफर को अनुभव के रूप में लिए यात्रा की होड़ में लगे दिखाई दिए। लोग इस यादगार लम्हों को अपनी यादों में सहेज लेना चाहते थे।  

वहीं एक नवंबर 2015 से नैनपुर और बालाघाट के बीच भी छोटी लाइन बंद हो गई। इस लाइन पर आमान परिवर्तन करके बड़ी लाइन दौड़ने में दो साल लगने का अनुमान था। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में अब सिर्फ नागपुर नागभीर लाइन ही एक मात्र नैरो गेज लाइन के रूप में बची है।
नैनपुर जबलपुर के बीच चलने वाले लोगों के लिए 30 सितंबर 2015 का दिन भावनों से भरा हुआ था। लोग अपनी महबूब ट्रेन का आखिरी सफर देखर रहे थे। कोई सेल्फी ले रहा था तो कोई ड्राईवर से गले मिल कर  रो रहा था। मुश्किलें भी तो होंगी अगले कुछ साल इस मार्ग पर बिना रेल के सफर करना पड़ेगा।
और चल पड़ी बड़ी लाइन की रेल 
जबलपुर से नैनपुर जंक्शन के बीच 28 नवंबर 2017 को बड़ी लाइन की पैसेंजर ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया। दो साल के ब्लाकेज के बाद इस रेल मार्ग पर आमान परिवर्तन करके के ब्राडगेज रेल मार्ग पर पैसेंजर ट्रेनों का संचालन आरंभ कर दिया गया। क्षेत्रवासी एक बार फिर रेल का सफर करके खुश हैं। पर उनके जेहन में सतपुड़ा एक्सप्रेस की यादें रची बसी रहेंगी।
नैनपुर में नैरोगेज रेल म्युजियम - भले ही नैनपुर जंक्शन पर अब बड़ी लाइन की रेलें दौड़ने लगी हैं, पर रेलवे ने एक शानदार काम किया है नैनपुर में नैरोगेज रेलवे का संग्रहालय बनाकर। शानदार भवन में स्टीम लोकोमोटिव, डीजल लोकोमोटिव, सवारी डिब्बे, नैरोगेज से जुड़े रेलवे के तकनीकी समानों को संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है। संग्राहलय में नैरोगेज से जुड़ी हुई पिक्चर गैलरी भी सजाई गई है, जिससे आने वाली पीढ़ियां रेलवे के इतिहास से रुबरू हो सकें। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyutp@gmail.com