Sunday, October 18, 2015

बुंदेलखंड के लोकदेवता हैं राजा हरदौल

बुंदेलखंड के लोकगीतों में राजा हरदौल की गाथा खूब गाई जाती है। वैसे तो वे राजा थे, पर अपने उच्च आदर्श और त्याग के कारण वे बुंदेलखंड में लोकदेवता का स्थान पा चुके हैं। राजा हरदौल का संबंध ओरछा से है। ओरछा के राजा राम मंदिर के बगल में स्थित फूलबाग में राजा हरदौल का मंदिर है।

मन्नत मांगने आते हैं लोग -  फूलबाग बुन्देल राजाओं द्वारा बनवाया गया फूलों का बगीचा है जो चारों ओर से दीवारों से घिरा है। इसके बीचों बीच राजा हरदौल का मंदिर है। हरदौल बुंदेल राजवंश के बहादुर राजकुमार थे। कहते हैं इस मंदिर में मन्नत मांगने से इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। बड़ी संख्या में लोग यहां पर मन्नत का धागा बांधने आते हैं। मंदिर परिसर में एक पेड़ दिखाई देता है जहां लोग मन्नत का धागा बांध जाते हैं।
पालकी महल के निकट स्थित फूल बाग बुन्देल राजाओं का आरामगाह था। वर्तमान में यह पिकनिक स्थल के रूप में दिखाई देता है। फूलबाग में एक भूमिगत महल और आठ स्तंभों वाला मंडप है। यहां के चंदन कटोरा से गिरता पानी झरने के समान प्रतीत होता है।

शादी में लोग भेजते हैं निमंत्रण - ओरछा के राजा हरदौल को लोग शादी-विवाह हो या यज्ञ का भंड़ारा,  लोग राजा हरदौल को आमंत्रित करना नहीं भूलते। लोगों का मानना है कि राजा हरदौल को निमंत्रण देने से भंडारे में कोई कमी नहीं आती। पूरे बुंदेलखंड के गांव में होने वाली हर शादी में आमतौर पर राजा हरदौल को निमंत्रण जरूर जाता है। 

राजा हरदौल का 23 साल में निधन हुआ था - हरदौल ओरछा के राजा वीर सिंह देव के बेटे थे। वीर सिंह देव ने अपने बड़े बेटे जुझार सिंह को ओरछा की राजगद्दी सौंपी और हरदौल को ओरछा का दीवान बनाया। जुझार सिंह कई बार मुगलों से लड़ाई में उलझते रहते थे। ऐसे में रियासत का सारा काम हरदौल ही देखते थे। 
महाराजा वीर सिंह के सबसे छोटे बेटे ‘हरदौलकी वीरता और ब्रह्मचर्य के किस्से हर बुंदेली सुनाता है। बुंदेली में राजा हरदौल की बहादुर और उनके व्यक्तित्व को बखान करने वाले अनगितन गीत हैं। सन 1688 में नौजवान राजा हरदौल की आसमयिक मौत हो गई।
कहा जाता है राजा जुझार सिंह ने सेनापति पहाड़ सिंहप्रतीत राय और महिला हीरादेवी के बहकावे में आकर अपनी पत्नी चंपावती से छोटे भाई हरदौल को जहर मिला हुआ भोजन देने को कहा। राजा को सेनापति द्वारा बहकाया गया था हरदौल अपनी भाभी रानी चंपावती से प्रेम करते हैं इसलिए विवाह से इनकार कर रहे हैं। भाभी के कहने पर हरदौल ने जहर मिला भोजन कर लिया और इस तरह 23 साल के राजकुमार हरदौल की मौत हो गई। अब फूलबाग के बीचों बीच राजा हरदौल की याद में सुंदर मंदिर बना है।

बुंदेली लोकगीतों के नायक – बुंदेली में सबसे ज्यादा लोकगीत राजा हरदौल पर बने हैं। नौटंकी में सुनाई जाने वाली कथाओं में भी राजा हरदौल नायक हैं। बुंदेलखंड के बाजार में आपको राजा हरदौल की वीरगाथा सुनाने वाली सीडी मिल जाएगी। बुंदेली में ...राजा हरदौल की भात  गाया जाता है। इसमें राजा हरदौल की ना कोई सानी... चुगलन ने चुगली करी... हरदौल लाला हमें छोड़ के आपन स्वर्ग सिधारे... जैसे गीत आप हरदौल की महिमा में सुन सकते हैं।

लाला हरदौल की महिमा में बुंदेली में विवाह गीत बने हैं - लाला हरदौल विनती मान लइयो हो आईओ आईओ हजारी हरदौल लाला ...जैसे गीत बुंदेलखंड में सुने जा सकते हैं। वास्तव में बुंदेलखंड और बृज में शादी के समय हरदौल को भात के लिए न्योता भेजा जाता है। इस दौरान महिलाएं भावुक होकर हरदौल के लिए गीत गाकर उसे भात देने के लिए आमन्त्रित करती हैं। 


  -  विद्युत प्रकाश मौर्य 
( RAJA HARDAUL, ORCHHA )