Saturday, October 17, 2015

सबसे भव्य है ओरछा का चतुर्भुज मंदिर

ओरछा शहर के सभी मंदिरों में सबसे भव्य है चतुर्भुज मंदिर। स्थापत्य कला के लिहाज से ये मंदिर बेजोड़ है। जब आप ओरछा के राजमहल के प्राचीर से भी नजर डालते हैं तो इस मंदिर की भव्यता दिखाई देती है।

ये मंदिर राजा राम मंदिर के ठीक बगल में स्थित है। मंदिर सिर्फ सुबह 8 बजे से दोपहर तक ही खुलता है। शाम को ये मंदिर बंद ही रहता है। इसलिए इसे देखने का कार्यक्रम सुबह में ही बनाएं। मंदिर की देखभाल पुरातत्व विभाग के हवाले है। 

कभी भगवान राम के लिए बना था मंदिर - चतुर्भुज मंदिर के बनाए जाने की रोचक कहानी है। दरअसलयह मंदिर भगवान राम की मूर्ति के लिए बनवाया गया थालेकिन मूर्ति स्थापना के वक्त मूर्ति अपने स्थान से हिली नहीं। इसलिए यहां चतुर्भुज मंदिर में रामजी को स्थापित नहीं किया जा सका।

राजा मधुकर शाह ने कराया निर्माण-  इस मंदिर का निर्माण 1554 से 1592 के बीच राजा मधुकर शाह ने करवाया था। हालांकि इतिहासकार यह मानते हैं कि बुंदेला राजाओं पर मुगलों के आक्रमण और राजा होरल देव की असमय मृत्यु के कारण मंदिर का निर्माण पूरा नहीं हो सका।

दो चरणों में हुआ निर्माण - 
चतुर्भुज मंदिर का निर्माण दूसरे चरण में महराजा वीर सिंह ( 1605-1627) के द्वारा करवाया गया। बाद में इसमें भगवान विष्णु जी की सुंदर मूर्ति स्थापित की गई। राजा राम के मंदिर के समीप स्थित चतर्भुज मंदिर ओरछा शहर का मुख्य आकर्षण है। 

भगवान विष्णु को समर्पित -  यह मंदिर चार भुजाधारी भगवान विष्णु को समर्पित है। अपने समय की यह उत्कृष्ट रचना यूरोपीय कैथोड्रल से मिलती जुलती है। मंदिर में प्रार्थना के लिए विशाल हॉल है जहां खास मौकों पर कृष्ण भक्त एकत्रित होते हैं।


विशाल चबूतरे पर बना है मंदिर - चतुर्भुज मंदिर एक विशाल चबूतरे पर निर्मित है। मंदिर के मुख्य तल तक पहुंचने के लिए 50 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है।  मंदिर नागर शैली में बना है। तल विन्यास में गर्भ गृह, अंतराल और अर्धमंडप युक्त है। मंदिर में तीन शिखर हैं। मध्य में विशाल शिखर और दोनों तरफ दो शिखर स्थित हैं। मंदिर के परिसर में चारों तरफ से ओरछा शहर का भव्य नजारा दिखाई देता है।

दूसरे चरण में इस मंदिर के निर्माण में महाराजा वीर सिंह ने ईंट और चूने का इस्तेमाल करवाया जो बुंदेला स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। कहते हैं कि चतुर्भुज मंदिर के शीर्ष पर एक स्वर्ण कलश भी हुआ करता था जिसे किसी काल खंड में चुरा लिया गया। मंदिर के बगल में प्राचीन मिंट (टकसाल ) देखी जा सकती है। अब यहां सिक्के नहीं ढाले जाते हैं, पर आप उसका भवन देख सकते हैं।
- विद्युत प्रकाश मौर्य ( ORCHHA, CHATURBHUJ TEMPLE ) 

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