Sunday, October 11, 2015

बलखाती बेतवा, जम्हाई लेते जंगल- ओरछा


बलखाती बेतवा, जम्हाई लेते जंगलों के बीच छिपा है ओरछा। वैसे ओरछा का मतलब ही होता है छिपा हुआ। तो छिपा हुआ सौंदर्य ही है ओरछा। जिसकी तलाश में दुनिया भर से सैलानी यहां पहुंचते हैं। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले का शहर। पर टीकमगढ़ यहा से 90 किलोमीटर है। यूपी का झांसी शहर 16 किलोमीटर है। इसलिए ओरछा पहुंचे का सुगम रास्ता उत्तर प्रदेश के झांसी शहर से है। ओरछा निवाड़ी तहसील में आता है। यहां के लोग अपने जिला मुख्यालय टीकमगढ़ के बजाए झांसी से ज्यादा जुड़े हुए हैं। झांसी रेलवे स्टेशन से ओरछा जाने के लिए पहले झांसी के बस स्टैंड आटो द्वारा पहुंचे।





होटल फोर्ट व्यू से वाकई किला और बेतवा नदी का नजारा दिखाई देता है। कमरे की दरें भी किफायती हैं। डबल बेड आकार का कमरा अटैच कमरा, कूलर के साथ 400 रुपये में। ओरछा के ज्यादातर होटलों में फ्री वाईफाई के बोर्ड लगे हैं। हालांकि हमारे होटल वाले ने बताया कि उनका वाईफाई काम नहीं कर रहा है।


झांसी के बस स्टैंड से ओरछा के लिए हमेश आटो रिक्शा चलते रहते हैं। इनका किराया 20 रुपये है। आठ किलोमीटर तक खजुराहो हाईवे पर जाने के बाद ओरछा के लिए रास्ता बदल जाता है। यहां पर ओरछा का रेलवे स्टेशन दिखाई देता है जहां पर पैसेंजर ट्रेनें रूकती हैं। पर इस रेलवे स्टेशन से भी ओरछा शहर सात किलोमीटर दूर है। यहां से ओरछा तक का रास्ता अत्यंत मनोरम है। दोनों तरफ हर भरे जंगल और बीच में सीना चीर कर चलती हुई सड़क। मानसन के दिनों में तो ओरछा का सौंदर्य और भी बढ़ जाता होगा। बस गर्मियों में यहां थोड़ी मुश्किल होती है। पर उस समय भी लोग यहां पहुंचते हैं।

शहर के दो प्रवेश द्वार  - शहर में पहले आता है प्रथम प्राचीन द्वार। फिर द्वितीय प्राचीन द्वार। ओरछा शहर की आबादी आजकल 20 हजार के आसपास है। पर मुख्य शहर में सैलानियों के रहने के लिए कई होटल बने हुए हैं। ये होटल ज्यादा महंगे नहीं हैं। ओरछा के जहांगीर महल में मध्य प्रदेश पर्यटन शीशमहल नाम का होटल भी चलाता है।


किले और मंदिरों का शहर ओरछा बुंदेल राजाओं की वीरता, धार्मिक रूचि और कला प्रेम की कहानी सुनाता है। चाहे आपकी रूचि जैसी भी हो यहां पहुंचकर आप निराश नहीं होंगे। यही कारण है कि ओरछा न सिर्फ देशी बल्कि विदेशी सैलानियों को भी हमेशा अपनी ओर आमंत्रित करता है। बल्कि यहां बड़ी संख्या में फिल्मों और टीवी धारावाहिकों की शूटिंग होती रहती है। ओरछा पहुंचने पर हमारा ठिकाना बना द्वितीय द्वार से आगे बायीं तरफ का होटल फोर्ट व्यू। 


शाम हो गई थी लिहाजा पता चला राजा राम मंदिर आठ बजे रात को खुलेगा। हमने अपने एक परिचित रामदास कुशवाहा (अवकाश प्राप्त पटवारी) से मिलने का तय किया। वे मंदिर के पीछे कल्याण कालोनी में रहते हैं। चाय पर लंबी चर्चा के बाद अचानक घड़ी देखी तो मंदिर खुलने का समय हो गया था। लिहाजा हम राजा राम की संध्या आरती में शामिल होने के लिए आगे बढ़ चले।


प्रसिद्ध कवि मैथलीशरण गुप्त ओरछा और बेतवा के साथ राजा राम का गान करते हुए लिखते हैं.... बेतवा नदी को हिंदू ग्रंथों में वेत्रवती कहा गया है...

कहां आज यह अतुल ओरछा, हाय! धूलि में धाम मिले।
चुने-चुनाये चिन्ह मिले कुछ, सुने-सुनाये नाम मिले।
फिर भी आना व्यर्थ हुआ क्या तुंगारण्य? यहां
 तुझमें
?
नेत्ररंजनी वेत्रवती पर हमें हमारे राम मिले।

कैसे पहुंचे - ओरछा पहुंचने का सबसे सुगम तरीका है कि आप कहीं से भी झांसी पहुंचे। झांसी से ओरछा कुल 17 किलोमीटर की दूरी पर है। हालांकि झांसी उत्तर प्रदेश में है और ओरछा मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में। वैसे झांसी से महोबा वाले रेलवे लाइन पर ओरछा नामक रेलवे स्टेशन भी है। पर रेलवे स्टेशन से भी ओरछा बाजार की दूरी सात किलोमीटर के करीब है। कुछ पैसेंजर ट्रेने ही ओरछा रेलवे स्टेशन पर रुकती हैं। इसलिए झांसी से शेयरिंग आटो या फिर टैक्सी से ओरछा जाना बेहतर है।

vidyutp@gmail.com

( ORCHHA, MP, FOREST, FORT ) 

ओरछा का दूसरा पुराना दरवाजा ( प्रवेश द्वार ) 



झांसी के पास बेतवा नदी रेल पुल से ( फोटो - विद्युत )