Friday, February 7, 2020

सारनाथ – आइए यहां इतिहास से संवाद करें


वाराणसी घूमने गए हों तो सारनाथ न जाएं ये कैसे हो सकता है। सारनाथ भारत के ऐतिहासिक विरासत का जीता जागता उदाहरण है। भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के पश्चात अपना प्रथम उपदेश यहीं दिया था। इसलिए सारनाथ का बौद्ध धर्म के इतिहास में काफी महत्व है। दुनिया भर से बौद्ध श्रद्धालु सालों भर सारनाथ पहुंचते हैं।  

अपने पांच साल के वाराणसी प्रवास के दौरान हमलोग अनगिनत बार सारनाथ गए। कभी दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने तो कभी अतीत से संवाद करने। कई बार तो बीएचयू के हॉस्टल से साइकिल से ही सारनाथ पहुंच जाते थे हमलोग। हालांकि गरमी  की दोपहरी में सारनाथ घूमने में परेशानी हो सकती है। यहां सर्दियों में जाना बेहतर है।


बौद्ध धर्म के इतिहास में इस घटना को धर्म चक्र प्रवर्तन ( Turning of the Wheel) का नाम दिया जाता है।तथागत के जन्म, ज्ञान प्राप्ति के बाद उनके जीवन से जुड़ा यह तीसरा महत्वपूर्ण स्थल है। इसलिए दुनिया भर से बौद्ध श्रद्धालु सालों भर सारनाथ पहुंचते हैं। यहां पर बर्मा, थाइलैंड समेत कई देशों के बौद्ध मंदिर हैं।

सारनाथ को जैन धर्म एवं हिन्दू धर्म में भी महत्व है। जैन ग्रंथों में इसे सिंहपुर कहा गया है और माना जाता है कि जैन धर्म के ग्यारहवें तीर्थंकर श्रेयांसनाथ का जन्म यहां से थोड़ी दूर पर हुआ था। यहां पर सारंगनाथ महादेव का मन्दिर भी है जहां सावन में मेला लगता है।

ऋषिपतन था पुराना नाम - कहा जाता है कि सारनाथ का प्राचीन नाम ऋषिपतन (इसिपतन या मृगदाव) (हिरनों का जंगल) था।  मुहम्मद गजनवी ने 1017 में आक्रमण कर सारनाथ के पूजा स्थलों आक्रमण कर नष्ट कर दिया था। सन 1905 में पुरातत्व विभाग ने यहां खुदाई करवाई। आप सारनाथ में धमेक स्तूप के पास खुदाई के अवशेष और सुरंगें देख सकते हैं। सारनाथ में खुदाई से मिली कई सामग्री कलकाता के इंडियन म्युजिम में देखी जा सकती हैं।  गुप्तकाल में सारनाथ कला का बड़ा केंद्र था। खुदाई के दौरान ही यहां अशोक स्तंभ और कई शिलालेख मिले।


चौखंडी स्तूप, यहीं मिले बुद्ध पांच शिष्यों से  – वाराणसी से सारनाथ जाते समय आशापुर चौराहा के बाद बायीं तरफ चौखंडी स्तूप नजर आता है। यह सारनाथ संग्रहालय से एक किलोमीटर पहले ही पडता है। चौखंडी स्तूप सारनाथ का अवशिष्ट स्मारक है। इस स्थान पर गौतम बुद्ध की अपने पांच शिष्यों से दुबारा मुलाकात हुई थी। सारनाथ में ही बुद्ध ने उन्हें अपना पहला उपदेश दिया था। 

बुद्ध ने उन्हें चार आर्य सत्य बताए थे। उस दिन गुरु पूर्णिमा का दिन था। बुद्ध 234 ईस्वी पूर्व में सारनाथ आए थे। इसकी याद में इस स्तूप का निर्माण हुआ। इस स्तूप के ऊपर एक अष्टपार्श्वीय बुर्जी बनी हुई है। कहा जाता है कि यहां पर हुमायूं ने भी एक रात गुजारी थी। बडी संख्या में विदेशी पर्यटक चौखंडी स्तूप को देखने के लिए भी रुकते हैं। 


भारत का राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ है यहां

सारनाथ का संग्रहालय भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण का प्राचीनतम स्‍थल संग्रहालय है। इसकी स्थापना 1904 में हुई थी। यह भवन योजना में आधे मठ (संघारम) के रूप में है। इसमें ईसा से तीसरी शताब्दी पूर्व से 12वीं शताब्दी तक की पुरातन वस्तुओं का भंडार है। इस संग्रहालय में मौर्य स्‍तंभ का सिंह स्‍तंभ शीर्ष मौजूद है जो अब भारत का राष्‍ट्रीय प्रतीक है। चार शेरों वाले अशोक स्तंभ का यह मुकुट लगभग 250 ईसा पूर्व अशोक स्तंभ के ऊपर स्थापित किया गया था।  इस स्तंभ में चार शेर हैं, पर किसी भी कोण से तीन ही दिखाई देते हैं। 

कई मुद्राओं में बुद्ध की मूर्तियों के अलावा, भिक्षु बाला बोधिसत्‍व की खड़ी मुद्रा वाली विशालकाय मूर्तियां, छतरी आदि भी प्रदर्शित की गई हैं। संग्रहालय की त्रिरत्‍न दीर्घा में बौद्ध देवगणों की मूर्तियां और कुछ वस्‍तुएं हैं। तथागत दीर्घा में विभिन्‍न मुद्रा में बुद्ध, वज्रसत्‍व, बोधित्‍व पद्मपाणि, विष के प्‍याले के साथ नीलकंठ लोकेश्‍वर, मैत्रेय, सारनाथ कला शैली की सर्वाधिक उल्‍लेखनीय प्रतिमा उपदेश देते हुए बुद्ध की मूर्तियां प्रदर्शित हैं।

सारनाथ वाराणसी के बाकी पर्यटक स्थलों की तुलना में खुला खुला और हरा भरा है। यहां आप छोटा सा चिडियाघर (डियर पार्क) भी देख सकते हैं। यहां घूमने के लिए आधे दिन का समय जरूर निकाल कर रखें।

संग्रहालय में प्रवेश के लिए 20 रुपये का टिकट है। अगर आप संग्रहालय के साथ धमेक स्तूप और सारनाथ के खुदाई में मिले स्थलों को भी देखना चाहते हैं तो 25 रुपये का टिकट है। संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर बैग काउंटर बना है। यहां पर आप अपने सामान को निःशुल्क जमा करा सकते हैं। संग्रहालय की दीर्घाओं में मोबाइल लेकर जाना मना है। लिहाजा मोबाइल फोन भी जमा कराना पडता है।  
संग्रहालय घूमने बाद आप सारनाथ में कई अलग अलग देशों के बने बौद्ध मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं।यहां से आप तमाम वस्तुओं की शापिंग कर सकते हैं।  

कैसे पहुंचे - वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से आठ किलोमीटर की दूरी पर है सारनाथ। हालांकि सारनाथ नाम का रेलवे स्टेशन भी है जो वाराणसी से औरिहार जंक्शन जाने वाली लाइन पर स्थित है। रेलवे स्टेशन से सारनाथ के संग्रहालय की दूरी एक किलोमीटर है। आप वाराणसी कैंट से आटो रिक्शा से सारनाथ जा सकते हैं। हाल ही में बीएसएनएल ने यहां सैलानियों के लिए फ्री वाईफाई सुविधा शुरू कर दी है।

वाराणसी में और क्या देखें - दश्वाश्वमेध घाट, पुराना और नया काशी विश्वनाथ मंदिर, विश्वनाथ गली का बाजार,  जंतर-मंतर, रामनगर का किला, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, संकट मोचन मंदिर, मानस मंदिर, दुर्गा कुंड मंदिर। भारत माता मंदिर, भारत कला भवन (बीएचयू)। 

 - विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
( SARNATH, BUDDHA, VARANASI, COLORS OF BANARAS, UTTRAR PRADESH)

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