Saturday, July 4, 2015

पंडौल – यहां पांडवों ने किया था अज्ञातवास

पंडौल यानी पांडवों का आवास। मधुबनी जिले के पंडौल के  बारे में कहा जाता है कि पांडवों ने यहां अज्ञातवास में कुछ वक्त गुजारा था। मैं भवानीपुर गांव से कोई वाहन नहीं मिलने पर पैदल ही पंडौल के लिए चल पड़ता हूं। रास्ते में एक बाइक वाले लिफ्ट मांगता हूं। वे बोले ब्रह्मोतरा तक छोड़ दूंगा। मैं उनके बाइक पर पीछे बैठ जाता हूं। चार किलोमीटर बाद ब्रह्मोतरा गांव आ जाता है। यह गांव सकरी पंडौल मुख्य मार्ग पर स्थित है। यहां से पंडौल दो किलोमीटर आगे है।
मुझे सड़क के किनारे एक खूबसूरत मंदिर दिखाई देता है जो वीरान पड़ा है। मैं उसकी कुछ तस्वीरें क्लिक करता हूं। मुझे सड़क के किनारे बैठे कुछ लोग बुलाते हैं और मेरा परिचय पूछते हैं। परिचय जानकर खुश होते हैं और मुझे वह मंदिर दिखाने चल पड़ते हैं। इस मंदिर को गांव के एक पुराने रईस ने बनवाया था। इस मंदिर का निर्माण गांव के मुख्तार अनूपलाल ठाकुर ने बनवाया था। 

इस सीताराम मंदिर में सुंदर नक्काशी का काम कराया गया था। पर इस मंदिर के उत्तराधिकार को लेकर विवाद होने के कारण इसमें कोई पूजा पाठ नहीं होता है। कई साल पहले मंदिर के गर्भ गृह से बेशकीमती मूर्तियां भी चोरी हो चुकी हैं। मंदिर के पास अच्छी खासी जमीन भी है। पर मंदिर का रखरखाव विवादों में है। मंदिर के बगल में सुंदर सा सरोवर है। पर उसके पानी के सालों से सफाई नहीं हुई है इसलिए सरोवर का पानी निहायत गंदा हो चुका है। अब इस सरोवर में उतरा भी नहीं जा सकता। गांव के लोग बताते हैं किसी जमाने में ये मंदिर गुलजार होता था। मंदिर के प्रांगण में संगीत की महफिल जमती थी। पर ये सबस बातें अब अतीत की हो गई हैं। गांव के लोग चाहते हैं कि मंदिर को नवजीवन प्रदान किया जाए पर स्वामीत्वव विवाद के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है। सुनने में आता है कि महावीर मंदिर न्यास के किशोर कुणाल ने अब इस मंदिर को नवजीवन प्रदान करने के लिए पहल की है।
पंडौल में किसी जमाने में एक स्पिनिंग मिल हुआ करता था। पर मिल बंद हो जाने के बाद इस इलाके में कोई उद्योग नहीं है। ज्यादातर लोगों को पास खेती की जमीन कम हो गई है। इस मिल में कभी नौकरी करने वाले गांव के कमलकांत झा मिल बंद होने के अपना दर्द बंया करते हैं। पंडौल बाजार में के सुंदर मां दुर्गा का मंदिर है। मैं इसी मंदिर के पास से दरभंगा की बस लेता हूं। सकरी के पास बस नेशनल हाईवे 57 पर आ जाती है। थोड़ी देर में मैं दरभंगा पहुंच जाता हूं।


दुनिया भर में मधुबनी पेंटिंग के लिए विख्यात मधुबनी जिला देश के अत्यंत पिछड़े जिलों की सूची में शुमार है। आखिर ऐसा क्यों है। मधुबनी वह जिला है जहां से सबसे बड़ी संख्या में आईएएस और अलग अलग क्षेत्रों के सूरमा पैदा हुए हैं। भवानीपुर गांव के जनकदास जो प्रखंड जदयू किसान सेल के अध्यक्ष हैं बताते हैं कि क्षेत्र में पानी का स्तर काफी नीचे है। कहीं 160 तो कहीं 350 फीट नीचे है पानी। नहर से सिंचाई के बेहतर इंतजाम नहीं हैं। इसलिए खेती किसानी मुश्किल है। वहीं ललित नारायण मिश्रा के बाद किसी भी नेता ने मधुबनी के विकास के लिए ईमानदार प्रयास नहीं किए। इसलिए 1972 में दरभंगा से अलग होकर जिला बना 35 लाख से ज्यादा आबादी वाला मधुबनी विकास की दौड़ में देश के बाकी हिस्सों से पिछड़ गया है।

-         - विद्युत प्रकाश