Wednesday, June 24, 2015

बेतिया से सीतामढ़ी - उत्तर बिहार में बेहतर सड़कों का संजाल

नरकटियागंज में जय प्रकाश नारायण की प्रतिमा। 

मैं भितिहरवा में बापू के आश्रम की मिट्टी को नमन कर आगे बढ़ता हूं। दो परिवार के लोग अपने वाहन से आश्रम देखने पहुंचे हैं। आश्रम के बाहर चौक पर चाय नास्ते की तीन दुकाने हैं। यहां चाय, दही चूड़ा आदि मिल जाता है। मुझे थोड़े इंतजार के बाद नरकटियागंज जाने के लिए आटो रिक्शा मिल जाता है। नरकटियागंज रेलवे स्टेशन के पूरब तरफ रेलवे गुमटी के पास बेतिया के लिए बस मिल जाती है। चनपटिया होते हुए बस बेतिया शहर पहुंच जाती है।


बेतिया से मुजफ्फरपुर के लिए दोपहर में बस लेता हूं। बस बेतिया बस स्टैंड से बाहर निकलती है। बेतिया से मोतिहारी की सड़क एनएच 28बी घोषित है। हालांकि इस सड़क पर लगातार निर्माण कार्य चल रहा है इसलिए जगह जगह धूल उड़ रही है।  एनएच 28बी छपरा से मोतिहारी, बेतिया, लौरिया, बगहा होते हुए कुशीनगर तक जाती है। पर इसके कई हिस्सों पर निर्माण कार्य जारी है। 

चलते चलते रास्ते में फुलवरिया बाजार आता है। यहां से रक्सौल के लिए रास्ता बदलता है। रक्सौल तक एनएच 28ए जाती है। सड़क मार्ग आने पर सुगौली रेलवे स्टेशन रास्ते में नहीं पड़ता। हालांकि रेल से आने पर सुगौली जंक्शन रेलवे स्टेशन पड़ेगा। सुगौली का इतिहास में अपना महत्व है। यहां अग्रेजों और नेपाल के बीच सुगौली की संधि हुई थी।
विकास की दास्तां सुनाता- मुजफ्फरपुर पूर्णिया नेशनल हाईवे -57 

फुलवरिया से आगे बढ़ने पर सेमरा रेलवे स्टेशन आता है। सेमरा रेलवे स्टेशन सड़क के किनारे है। रास्ते में सड़क के किनारे ताड़ी की दुकानें दिखाई देती हैं। कई दुकानें महिलाएं भी चला रही हैं। कहीं कहीं बारात निकल रही है। मैं बड़ा बदलाव देख रहा हूं। यहां बारात में महिलाएं भी झूमकर नाच रही हैं।

इसके बाद पटखौलिया, बनजरिया जैसे छोटे बाजार आते हैं। इसके बाद हम पहुंच जाते हैं मोतिहारी। मोतिहारी यानी बापूधाम मोतिहारी। मोतिहारी में महात्मा गांधी के नाम पर संग्रहालय है। मैं उसे देखने के लिए रुक नहीं पाता। बस निजी बस स्टैंड में जाकर थोड़ी देर रुकती है। मुजफ्फरपुर जाने वालों की बड़ी भीड़ आकर चढ़ती है। बस फिर आगे चल पड़ती है। सड़क अभी भी अच्छी नहीं है। पीपरा कोठी में एनएच 28 आ जाता है। चार लेन की शानदार सड़क का रूप ले चुकी है एनएच 28। सड़क के बीचों बीच सुंदर वृक्षारोपण किया गया है।

इस नेशनल हाईवे पर मुजफ्फरपुर तक बसें हवा से बातें करती हुई चलती हैं। रास्ते में चकियामेहसी जैसे बाजार आते हैं। इसके बाद मुजफ्फरपुर जिले का मोतीपुर और फिर कांटी थर्मल पावर स्टेशन आता है। मुजफ्फरपुर शहर से पहले आम के विशाल बगान भी नजर आते हैं। मैं मुजफ्फरपुर में बस बदलता हूं। यहां सीतामढ़ी जाने वाली बस तुरंत ही मिल जाती है। मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी का सफर एनएच 77 पर शुरू होता है। 

मुजफ्फरपुर से दरभंगा के लिए एनएच 57 शानदार सड़क बन चुकी है। ये पूर्णिया तक जाती है। कोसी महासेतु से होकर फरबिसगंज अररिया होते हुए ये सड़क उत्तर बिहार की लाइफलाइन बन चुकी है। चकिया से शुरू होता है एनएच 104 जो मधुबन, शिवहर सीतामढ़ी, बथनाहा, सुरसंड, भिट्ठामोड, जयनगर होते हुए फुलपरास तक जाता है। सड़क निर्माणाधीन है इसलिए जगह जगह पर पुल नहीं बने हैं। अभी रास्ता खराब है। सड़क तैयार होने पर नेपाल सीमा से लगती ये एक और महत्वपूर्ण सड़क होगी। शाम ढलने के साथ ही मैं सीतामढ़ी पहुंच चुका हूं। 

लखनदेई नदी की दुर्दशा - सीतामढ़ी शहर के बीचों बीच लखनदेई नामक नदी बहती है। बहुत कम चौड़ाई वाली यह नदी साल के आठ महीने तो सूखी ही रहती है। पर बारिश के दिनों में उफान पर होती है। कई बार इतनी उफान पर होती है कि आधे से ज्यादा सीतामढ़ी शहर को डूबो देती है। पर साल के आठ महीने शहर के लोग इस नदी की कोई इज्जत नहीं करते। नदी को नाला समझ उसमें कचरा फेंकते रहते हैं। मुझे नदी में कचरा देखकर बड़ा दुख होता है। लखनदेई बागमती की सहायक नदी है जो नेपाल से निकलती है। धार्मिक मान्यता है कि लखनदेई सीता की सहेली है। इसलिए इस नदी का पौराणिक,आध्यात्मिक तथा धार्मिक महत्व भी है। 

 -विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( NORTH BIHAR, ROAD, BETIAH, FULWARIA, SEMRA, MOTIHARI, MUZAFFARPUR ) 

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