Sunday, June 14, 2015

लोक देवता - पशुपालकों के पूज्य भुइंया बाबा


उत्तर बिहार के वैशाली जिला ही नहीं बल्कि इसके आसपास के जिले के लोगों के बीच भुइंया बाबा काफी लोकप्रिय हैं। आस्था ऐसी है कि भुइंया बाबा इस क्षेत्र में लोक देवता बन चुके हैं। वैशाली जिला और आसपास के सैकड़ो गांव के लोग हर रोज पानापुर लंगा गांव स्थित भुइंया बाबा के स्थान पर दूध चढ़ाने के लिए जाते हैं। माना जाता है कि उन्हें दूध चढ़ाने से पशुओं की रक्षा होती है। सोमवार और शुक्रवार को तो मंदिर परिसर के आसपास ऐसा नजारा होता है मानो दूध की नदियां बह रही हों। 


सैकड़ो साल से यहां पशुपालकों द्वारा देवता को दूध अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। वैशाली और आसपास के जिले में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े लोगों के दिल में भुइंया बाबा के स्थान का बहुत ज्यादा सम्मान है। खास तौर पर भैंस या गाय का पहला दूध तो जरूर ही भुइंया बाबा को अर्पित किया जाता है। बाबा के मंदिर में सोमवार और शुक्रवार को दूध चढ़ाने वालों की भीड़ ज्यादा उमड़ती है।


वसंत पंचमी और दशहरा पर मेला वैसे तो इस स्थान पर सालों भर मेले जैसा माहौल रहता है पर पानापुर लंगा स्थित मंदिर परिसर में वसंत पंचमी के दिन विशाल मेला लगता है। आमतौर पर वसंत पंचमी के दिन 30 हजार से ज्यादा लोग दूध चढ़ाने पहुंचते हैं। अब भुइंया बाबा के मंदिर क विकास के लिए बाबा बसावन ट्रस्ट बना दिया गया है और यहां पर भव्य मंदिर का भी निर्माण किया गया है।

पशुओं की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी   मानर के धुन पर भक्त लोग भुइंया बाबा का गीत गाते हैं जिसमें उनकी बहादुरी की दास्तान होती है। गीतों में बाबा बसावन, बाबा बख्तौर और माता गहिल की कहानी सुनाई जाती है। इसमें कहानी कुछ साफ साफ पता नहीं चल पाती है।भुइंया बाबा के काल का निर्धारण सही सही नहीं हो सका है, लेकिन अनुमान लगाया जाता है कि बाबा बसावन मुगल काल में हुए थे। वे औरगंजेब के समकालीन माने जाते हैं।

माता बहुरा के पुत्र बसावन - भुइयां बाबा की माता का नाम बहुरा था। उनका विवाह पटना जिले में हुआ था। जब वे गर्भवती हुईं तो अपने पितृ ग्राम पानापुर लंगा में आकर रहने लगीं। लोककथाओं के मुताबिक ससुराल में सदव्यवहार न होने के कारण उन्हें मायके में आकर रहना पड़ा था। यहीं पर उन्होंने बसावन ( भुइंया) को जन्म दिया। इसी पानापुर लंगा गांव में उनका बचपन गुजरा। 

दलेल सिंह से लड़ाई -  बसावन अपने मामा नरुकू राउत के साथ अपने परिवार क स्वभाविक वृति यानी भैंस चराने का काम करने पूरब दिशा में जाने लगे। पूरब की ओर धनुआ परगना मे ंउनकी प्रगाढ़ मैत्री बख्तौर के साथ हुई। धेनुआ परगना का जमींदार राजा दलेल सिंह था जो चरवाहों पर काफी जुल्म ढाता था। वह किसानों और चरवाहों से अनुचित लगान वसूलता था। नहीं देने पर उन्हें जेल में डाल देता था। बाबा बसावन ने किसानों और चरवाहों का संगठन खड़ा किया और दलेल सिंह के जुल्म के खिलाफ लड़ाई लड़ी। तो बाबा बसावन ने अपने पशुओं की रक्षा के लिए दुश्मनों से कई बड़ी लडाइयां लड़ी।

और शुरू हो गई बाबा बसावन की पूजा -  कालांतर में बाबा बसावन का निधन धेनुआ परगना में ही एक षडयंत्र के दौरान हो गया। उनकी सारी भैंसे अपने स्वामी के न रहने पर अपने आप ही अपने गांव पानापुर लंगा की ओर लौट आईं। बसावन की मृत्यु के बाद ग्रामीणों ने तय किया कि जो दूध कर के रूप में हम राजा दलेल सिंह को दिया करते थे वह अब बाबा बसावन को अर्पित किया करेंगे। इसके बाद बाबा बसावन का स्थान बनाकर उनकी पूजा करने की शुरुआत हो गई।

गीतों में बहादुरी और महिमा का बखान - वज्जिका भाषा में गाए जाने वाले गीतों में उनकी बहादुरी का बखान होता है। गीतों में बाबा बख्तौर का नाम भी बार-बार आता है जिन्हे यदुवंश का शिरोमणि कहा जाता है। बाबा बख्तौर यदुवंश के बड़े योद्धा हुए। आजकल बाबा बख्तौर की बहादुरी के किस्से वाले आडियो कैसेट भी बनने लगे हैं।

अब भव्य और विशाल मंदिर -  साल 2013 में पानापुर लंगा स्थित बाबा भुइंया के मंदिर और और भव्य रूप प्रदान किया गया। यहां बाबा भुइयां स्थान मंदिर में त्रिदेव मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। बाबा बसावन मंदिर के प्रवेश द्वार के उपरी तल पर अवस्थित नए गर्भ गृह में बाबा बसावन और की मूर्ति प्रतिस्थापित की गई। यहां लोग पशुपालक बाबा बसावनबाबा बख्तौर एवं मां गहिल की मूर्ति का दर्शन कर सकेंगे। अपने हाजीपुर प्रवास के दौरान मुझे कई बार भुइयां बाबा के स्थान पर जाने का मौका मिला था। आप भी यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। 


कैसे पहुंचे -  वैशाली जिला के मुख्यालय हाजीपुर से 10 किलोमीटर दूर स्थित पानापुर लंगा गांव में बाबा भुइंया स्थान है। हाजीपुर महुआ मार्ग पर सेंदुआरी गांव से पूर्व दिशा में पानापुर लंगा गांव स्थित है जहां भुइंया बाबा का स्थान है। हाजीपुर मुख्यालय से सार्वजनिक वाहन यहां जाने के लिए उपलब्ध हैं। यहां अब भव्य मंदिर बन चुका है।
--- विद्युत प्रकाश मौर्य   - vidyutp@gmail.com 
( BHUIYAN BABA, PANAPUR LANGA, VAISHALI, BIHAR, YADAV, MILK )

7 comments:

  1. कुछ तो बात रही होगी बाबा में ...पहले के लोग होते ही ऐसे थे आज मिलना मुमकिन नहीं .....
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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